UER-II Toll Plaza: एनएचएआई की नई ऑटोमैटिक टोल प्रणाली को चकमा दे रहे वाहन चालक, अपना रहे ये 4 अवैध तरकीबें

देश के नेशनल हाईवेज पर वाहनों की रफ्तार बढ़ाने और टोल बूथों पर लगने वाले लंबे जाम से मुक्ति दिलाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) लगातार नई तकनीक को धरातल पर उतार रहा है। इसी कड़ी में एनएचएआई ने हाल ही में शहरी विस्तार सड़क-2 (UER-II) के मुंडका-बक्करवाला खंड पर भारत का दूसरा और दिल्ली का पहला अत्याधुनिक ‘बैरियर-लेस’ (बाधा रहित) टोल प्लाजा सफलतापूर्वक शुरू किया है। इस पूरी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह है कि एक्सप्रेसवे या हाईवे पर चलने वाले वाहनों को टोल टैक्स चुकाने के लिए एक सेकंड के लिए भी रुकना न पड़े और वे बिना किसी रुकावट या बैरियर के सीधे गुजर सकें।

हालांकि, इस आधुनिक और पूरी तरह से कैमरा-आधारित व्यवस्था के लागू होने के साथ ही एनएचएआई के सामने राजस्व (टैक्स) चोरी की एक बेहद अनोखी और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। कई शातिर वाहन चालकों ने इस आधुनिक टोल-मुक्त व्यवस्था और स्पीड कैमरों को चकमा देकर टैक्स व चालान से बचने के कई अवैध व हैरान करने वाले तरीके खोज निकाले हैं।

बिना बैरियर कैसे काम करती है यह एआई (AI) आधारित टोल प्रणाली?

पारंपरिक टोल प्लाजा के विपरीत, इस ‘बैरियर-लेस’ टोल सिस्टम में सड़क पर कोई भौतिक अवरोध, बूम बैरियर या केबिन नहीं होता है।

  • अत्याधुनिक कैमरे और रीडर्स: इस प्रणाली के तहत सड़क के ऊपर मजबूत लोहे के खंभे (गैन्ट्री) लगाए जाते हैं। इन खंभों में उच्च-प्रदर्शन वाले आरएफआईडी (RFID) रीडर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (ANPR) कैमरे फिट होते हैं।

  • ऑटोमैटिक डिडक्शन: जैसे ही कोई कार या भारी वाहन इस गैन्ट्री के नीचे से सामान्य या तेज गति से गुजरता है, ये हाई-टेक कैमरे पलक झपकते ही उसकी हाई-सिक्योरिटी नंबर प्लेट (HSRP) और विंडस्क्रीन पर चिपके फास्टैग (FASTag) को स्कैन कर लेते हैं। इसके बाद टोल की निर्धारित राशि वाहन को बिना रोके सीधे उसके लिंक बैंक खाते से स्वतः कट जाती है।

कैमरों को अंधा बनाने के लिए लोग अपना रहे हैं ये 4 अवैध तरकीबें

चूंकि इस नए सिस्टम में गाड़ी को रोकने के लिए आगे कोई बूम बैरियर नहीं गिरता, इसलिए कुछ गैर-जिम्मेदार लोग इसका अनुचित और अवैध लाभ उठा रहे हैं। एनएचएआई और ट्रैफिक पुलिस की जांच में टैक्स और स्पीड चालान से बचने के निम्नलिखित तरीके सामने आए हैं:

  1. नंबर प्लेटों से जानबूझकर छेड़छाड़: यह पूरी डिजिटल व्यवस्था सटीक नंबर प्लेट पहचान (ANPR) पर टिकी है। इससे बचने के लिए कई लोग अपनी नंबर प्लेट के अक्षरों पर जानबूझकर कीचड़ या गहरी गंदगी लगा देते हैं, या अक्षरों को कतरकर या घिसकर इस तरह धुंधला कर देते हैं कि कैमरे उन्हें सही-सही पढ़ न सकें।

  2. लाइसेंस प्लेट पर रिफ्लेक्टिव फिल्म/केमिकल: स्पीड कैमरों के फ्लैश को मात देने के लिए लोग अपनी नंबर प्लेट पर एक विशेष चमकदार केमिकल, रिफ्लेक्टिव लेयर या पारदर्शी फिल्म चिपका देते हैं। जब रात के समय या तेज गति में कैमरे की फ्लैशलाइट उस प्लेट पर पड़ती है, तो रोशनी पूरी तरह परावर्तित (रिफ्लेक्ट) हो जाती है। इसके चलते कैमरे के फुटेज में केवल एक चमकीला सफेद धब्बा दिखाई देता है, गाड़ी का नंबर नहीं।

  3. नंबर प्लेट को उल्टा या तिरछा करना: एक्सप्रेसवे पर निर्धारित सीमा से अधिक तेज गति से वाहन चलाने वाले लोग ऑटोमैटिक स्पीड कैमरों की नजर से बचने के लिए नंबर प्लेट को नीचे की तरफ झुका देते हैं या उल्टा लगा देते हैं, जिससे चलते वाहन में कैमरे का एंगल प्लेट को कैप्चर नहीं कर पाता।

  4. फॉन्ट और डिजाइन में मामूली बदलाव: कुछ लोग नंबर प्लेट पर लिखे अंकों और अक्षरों के फॉन्ट और डिजाइन के साथ इस तरह चालाकी से मामूली बदलाव करवाते हैं कि एआई (AI) सॉफ्टवेयर कन्फ्यूज हो जाता है और 8 को 0 या 3 को 8 के रूप में गलत पढ़ लेता है।

एनएचएआई और ट्रैफिक पुलिस कस रही है शिकंजा

एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, बिना फास्टैग के या जानबूझकर फास्टैग छुपाकर चलने वाले वाहनों की संख्या वर्तमान में 1% से भी कम है, लेकिन नंबर प्लेट के साथ छेड़छाड़ करने वाले ये जालसाज विभाग के लिए बड़ा सिरदर्द बन गए हैं।

इस हाई-टेक धोखाधड़ी और टैक्स चोरी से निपटने के लिए एनएचएआई अब ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर एक विशेष अभियान शुरू करने जा रहा है। इसके तहत हाईवे के एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर फिजिकल चेकिंग बढ़ाई जाएगी और नंबर प्लेट के साथ छेड़छाड़ करने वाले वाहनों को सीधे ब्लैकलिस्ट में डालकर उन पर भारी आर्थिक जुर्माना और गाड़ी सीज करने जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।