ट्रंप का नो पाकिस्तान के जरिए आए ईरान के शांति प्रस्ताव को बताया अस्वीकार्य, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव

मिडिल ईस्ट में महीनों से जारी युद्ध को समाप्त करने की कोशिशों को एक बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के जरिए भेजे गए ईरान के शांति प्रस्ताव (Ceasefire Response) को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) पर एक तीखी पोस्ट साझा करते हुए ईरान के जवाब को “पूरी तरह से अस्वीकार्य” (Totally Unacceptable) करार दिया है। इस फैसले के बाद वैश्विक बाजार और कूटनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इससे ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में जारी संकट और गहराने की आशंका बढ़ गई है।

पाकिस्तान बना था मध्यस्थ: रविवार को भेजा गया था जवाब

ईरान ने रविवार, 10 मई 2026 को अमेरिका के नए शांति प्रस्ताव पर अपना आधिकारिक जवाब भेजा था। चूंकि वाशिंगटन और तेहरान के बीच सीधे राजनयिक संबंध नहीं हैं, इसलिए पाकिस्तान इस वार्ता में मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, उनके जवाब में क्षेत्र में युद्ध की तत्काल समाप्ति, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने और विदेशों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने जैसी मांगें शामिल थीं। ईरान का कहना है कि वे कोई ‘रियायत’ नहीं मांग रहे, बल्कि केवल अपने वैध अधिकारों की बात कर रहे हैं।

“47 साल से खेल खेल रहा है ईरान”: ट्रंप का कड़ा तेवर

राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के प्रस्ताव से बिल्कुल भी संतुष्ट नजर नहीं आए। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “मैंने अभी-अभी ईरान के तथाकथित ‘प्रतिनिधियों’ का जवाब पढ़ा है। मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया यह पूरी तरह अस्वीकार्य है।” ट्रंप ने आगे आरोप लगाया कि ईरान पिछले 47 वर्षों से अमेरिका और पूरी दुनिया के साथ खेल खेल रहा है, लेकिन अब वह और ज्यादा समय तक नहीं हंस पाएगा। ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि ईरान अपनी शर्तों में बदलाव नहीं करता, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है।

निशाने पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य और तेल की आपूर्ति

इस कूटनीतिक विफलता का सबसे बुरा असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर पड़ने वाला है। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी पाबंदियां जारी रखेगा और किसी भी नए विदेशी युद्धपोत की मौजूदगी को बर्दाश्त नहीं करेगा। उधर, अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकेबंदी (Naval Blockade) को और सख्त करने के निर्देश दिए हैं। इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं, जिससे दुनिया भर में ईंधन की किल्लत का खतरा पैदा हो गया है।

इज़रायल और परमाणु कार्यक्रम पर भी फंसा पेंच

ट्रंप के इस फैसले के पीछे इज़रायल के साथ हुई बातचीत को भी अहम माना जा रहा है। इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप से बात कर चिंता जताई थी कि ईरान अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) के भंडार को खत्म करने के लिए तैयार नहीं है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अमेरिका ईरान के परमाणु ठिकानों की निगरानी ‘स्पेस फोर्स’ (Space Force) के जरिए कर रहा है र यदि किसी ने भी वहां जाने की कोशिश की, तो उन ठिकानों को “उड़ा दिया जाएगा”।