
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद अब ‘पावर सेंटर’ के पते बदलने की कवायद तेज हो गई है। बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी जल्द ही अपने चिनार पार्क स्थित फ्लैट को अलविदा कहकर अलीपुर के अति-प्रतिष्ठित ‘सौजन्य’ कॉम्प्लेक्स में रहने जा सकते हैं। यह वही आलीशान सरकारी आवास है जिसे खास तौर पर मुख्यमंत्री और राज्य के सबसे महत्वपूर्ण वीवीआईपी (VVIP) लोगों के लिए तैयार किया गया था।
ममता के ‘गढ़’ में सुवेंदु की एंट्री: महज 950 मीटर का फासला
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि ‘सौजन्य’ कॉम्प्लेक्स भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जिसे ममता बनर्जी का अभेद्य किला माना जाता रहा है। गूगल मैप्स के मुताबिक, कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के पुराने निवास और सुवेंदु के इस संभावित सरकारी आवास के बीच की दूरी अब महज 950 मीटर रह जाएगी। यानी बंगाल की राजनीति के दो सबसे बड़े धुरंधर अब एक ही इलाके में पड़ोसी होंगे। इस बदलाव के सुरक्षा और प्रशासनिक मायने भी हैं, क्योंकि मुख्य सचिव और डीजीपी के आवास भी इसी के पास स्थित हैं।
180 करोड़ की वह आलीशान इमारत, जो 6 साल से थी खाली
अलीपुर स्थित इस प्रीमियम कॉम्प्लेक्स का निर्माण करीब 180 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से हुआ था। साल 2018 में खुद ममता बनर्जी ने इसका उद्घाटन किया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि तब से यह आलीशान इमारत लगभग खाली ही पड़ी रही। अब राज्य का लोक निर्माण विभाग (PWD) इसे मुख्यमंत्री के अस्थायी आवास के रूप में तैयार करने में जुट गया है। सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रविवार को संयुक्त पुलिस आयुक्त रूपेश कुमार की टीम ने खुद वहां पहुंचकर सुरक्षा इंतजामों का बारीकी से मुआयना किया।
“मैं सबके लिए मुख्यमंत्री हूं”: कोंताई में सुवेंदु का बड़ा संदेश
इस बीच, सुवेंदु अधिकारी ने अपने गृह जिले पूर्वी मेदिनापुर के कोंताई स्थित पुश्तैनी घर ‘शांतिकुंज’ में समर्थकों के बीच अपनी भावी कार्यशैली की झलक दी। ‘जय श्री राम’ के नारों के बीच उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को दोहराते हुए कहा, “मैं सबके लिए मुख्यमंत्री हूं।” उन्होंने संतुलित रुख अपनाते हुए समर्थकों से कहा कि मुख्यमंत्री को कम बोलना चाहिए और काम ज्यादा करना चाहिए। जब भीड़ ने ‘बदला’ लेने के नारे लगाए, तो सुवेंदु ने तुरंत टोकते हुए कहा कि वह इस तरह की भाषा के पक्ष में नहीं हैं, जिसे उनके संयमित और समावेशी नेतृत्व के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
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