ट्रंप की ईरान को अंतिम चेतावनी: या तो शांति समझौता मानो,वरना झेलनी होगी भारी बमबारी

वॉशिंगटन/तेहरान: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अब तक का सबसे कड़ा अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के पास अब केवल दो ही रास्ते हैं या तो वह युद्ध समाप्ति के लिए प्रस्तावित शांति समझौते पर हस्ताक्षर करे, या फिर अमेरिकी सेना की विनाशकारी बमबारी का सामना करने के लिए तैयार रहे।

‘एपिक फ्यूरी’ या महाविनाश: ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर दी धमकी

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक के बाद एक कई पोस्ट लिखकर ईरान को चेतावनी दी। उन्होंने लिखा कि अगर ईरान तय शर्तों को मानने के लिए राजी हो जाता है, तो अमेरिका अपना ‘एपिक फ्यूरी’ अभियान तुरंत रोक देगा। लेकिन, अगर तेहरान ने अड़ियल रवैया अपनाया, तो अमेरिका ऐसी बमबारी शुरू करेगा जो “इतिहास में पहले कभी नहीं देखी गई” और पिछले हमलों से कहीं अधिक घातक होगी।

क्या समझौते के करीब हैं अमेरिका और ईरान?

ट्रंप की इस धमकी के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट भी सामने आई है। अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘एक्सियोस’ के अनुसार, वॉशिंगटन और तेहरान एक पेज के ‘समझौता ज्ञापन’ (MoU) पर सहमत होने के बेहद करीब पहुंच गए हैं। इस समझौते में न केवल युद्ध समाप्ति, बल्कि व्यापक परमाणु वार्ता का खाका भी शामिल है।

हालांकि, ट्रंप ने बातचीत के तरीकों पर संदेह जताया है। न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में उन्होंने पाकिस्तान के जरिए ईरान के साथ प्रत्यक्ष बातचीत की संभावना को ‘बहुत दूर की कौड़ी’ बताया। गौरतलब है कि पाकिस्तान इस तनाव को कम करने के लिए दोनों महाशक्तियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ पर अचानक लगा ब्रेक, लेकिन नाकाबंदी जारी

मंगलवार देर रात एक बड़े घटनाक्रम में ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में फंसे जहाजों को निकालने के लिए चल रहे सैन्य अभियान ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को रोकने का आदेश दिया।

  • मध्यस्थों का अनुरोध: ट्रंप के अनुसार, यह फैसला पाकिस्तान और अन्य मित्र देशों के अनुरोध पर लिया गया है ताकि शांति समझौते को अंतिम रूप दिया जा सके।

  • सख्त नाकाबंदी: भले ही सैन्य ऑपरेशन रुक गया हो, लेकिन ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी (Blockade) पूरी तरह लागू रहेगी। ट्रंप का मानना है कि यह दबाव ही ईरान को टेबल पर लाने के लिए मजबूर करेगा।

ट्रंप की विरोधाभासी नीति: आखिर चाहते क्या हैं राष्ट्रपति?

ईरान मुद्दे पर राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों ने विशेषज्ञों को उलझन में डाल दिया है। एक तरफ वे ‘महाविनाश’ की धमकी देते हैं, तो दूसरी तरफ कहते हैं कि समझौते की दिशा में ‘बड़ी प्रगति’ हो रही है। हाल ही में उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस को संकेत दिया था कि 28 फरवरी से शुरू हुआ यह युद्ध व्यावहारिक रूप से समाप्त हो चुका है, लेकिन उनके ताजा अल्टीमेटम ने फिर से युद्ध की आहट तेज कर दी है।

अगले 48 घंटे मिडिल ईस्ट की किस्मत तय करने वाले साबित हो सकते हैं। यदि ईरान समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करता, तो दुनिया को एक भीषण सैन्य टकराव देखने को मिल सकता है।