
अक्सर सिगरेट पीने या गुटखा-खैनी खाने वाले लोग यह दलील देते हैं कि वे बहुत कम मात्रा में इसका सेवन करते हैं, इसलिए उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा। लेकिन चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, तंबाकू की एक छोटी सी मात्रा भी आपके शरीर के लिए बेहद जानलेवा साबित हो सकती है। आज के समय में तंबाकू का सेवन सिर्फ एक बुरी आदत नहीं, बल्कि शरीर को अंदर से खोखला करने वाली गंभीर बीमारियों की मुख्य वजह बन चुका है। हैदराबाद के यशोदा हॉस्पिटल्स के सीनियर कंसलटेंट (क्लिनिकल एंड इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी) Dr V. Nagarjuna Maturu ने विस्तार से बताया है कि कैसे तंबाकू का हर एक कश और हर एक दाना आपके शरीर के अंगों को तबाही की ओर ले जाता है।
फेफड़ों पर अटैक: सांस की नलियों में सूजन और एम्फायसीमा का खतरा
डॉ. वी. नागार्जुन मातुरू के अनुसार, जब कोई व्यक्ति सिगरेट या बीड़ी का कश खींचता है, तो निकोटिन के साथ-साथ हजारों जहरीले केमिकल्स कुछ ही सेकंड में फेफड़ों और ब्लड स्ट्रीम (खून) में प्रवेश कर जाते हैं। धुएं के बार-बार संपर्क में आने से फेफड़ों के नाजुक टिश्यू और सांस की नलियां गंभीर रूप से सूज जाती हैं। इसके कारण फेफड़ों की कार्यक्षमता नष्ट होने लगती है, जिससे एम्फायसीमा और क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस जैसी जानलेवा बीमारियां घेर लेती हैं, जो आगे चलकर फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) में तब्दील हो जाती हैं।
दिल और धमनियों पर असर: दोगुना हो जाता है हार्ट अटैक का रिस्क
तंबाकू में मौजूद निकोटिन शरीर में जाते ही ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट को असामान्य रूप से बढ़ा देता है। वहीं, धुएं से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस खून में ऑक्सीजन की सप्लाई को बेहद कम कर देती है, जिससे दिल को जरूरत से ज्यादा काम करना पड़ता है। तंबाकू धमनियों को सख्त और संकुचित करने की प्रक्रिया (एथेरोस्क्लेरोसिस) को बहुत तेज कर देता है। यही वजह है कि धूम्रपान करने वालों में आम लोगों के मुकाबले हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा सीधे दोगुना हो जाता है।
तंबाकू चबाने के घातक परिणाम: दांतों के टूटने से लेकर मुंह का कैंसर
जो लोग सिगरेट नहीं पीते लेकिन गुटखा, खैनी या जर्दा चबाते हैं, वे भी उतने ही बड़े खतरे में हैं। तंबाकू चबाने से निकोटिन और कैंसर पैदा करने वाले तत्व (कार्सिनोजेन्स) सीधे मुंह की नाजुक त्वचा के संपर्क में आते हैं। इससे मसूड़ों की पुरानी और गंभीर बीमारियां शुरू हो जाती हैं, दांत समय से पहले टूटने लगते हैं और मुंह के अंदर ल्यूकोप्लाकिया (सफेद या लाल धब्बे) बनने लगते हैं। डॉक्टर के मुताबिक, ये धब्बे ओरल कैंसर (मुंह के कैंसर) के शुरुआती लक्षण होते हैं।
पाचन तंत्र और फर्टिलिटी पर प्रहार, प्रेग्नेंसी में बड़ा जोखिम
धूम्रपान और बिना धुएं वाले तंबाकू (चबाने वाले) दोनों ही पेट, अग्न्याशय (पैंक्रियाज) और भोजन नली के कैंसर के खतरे को कई गुना बढ़ा देते हैं। इसके अलावा, यह महिला और पुरुष दोनों की फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) को कमजोर करता है। शरीर का इम्यून सिस्टम इतना कमजोर हो जाता है कि कोई भी सामान्य घाव जल्दी नहीं भरता। प्रेग्नेंसी के दौरान तंबाकू का सेवन बेहद खतरनाक है; इससे गर्भपात (Miscarriage), समय से पहले डिलीवरी (प्री-मैच्योर बर्थ) और जन्म के समय बच्चे का वजन बेहद कम होने का खतरा रहता है।
छोड़ने के तुरंत बाद कैसे रिकवर होता है शरीर? जानिए उपाय
डॉक्टर का कहना है कि अगर आप सेहतमंद जिंदगी चाहते हैं, तो तंबाकू को आज और इसी वक्त छोड़ दें। इसे छोड़ने के कुछ ही घंटों के भीतर आपका ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट सामान्य होने लगता है। धीरे-धीरे फेफड़ों की क्षमता और शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर हो जाता है। समय के साथ कैंसर का जोखिम भी घटने लगता है। अगर लत छोड़ना मुश्किल लग रहा है, तो निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी (NRT), बिहेवियरल सपोर्ट और डॉक्टरी दवाओं की मदद से एक सही क्विटिंग प्लान तैयार करें।
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