ब्रेस्ट से जुड़े वो मिथक जिन्हें महिलाएं मानती हैं सच, जानिए क्या है इनके पीछे का विज्ञान

महिलाओं के शरीर को लेकर समाज में कई तरह की बातें और भ्रांतियां फैली हुई हैं। खासकर ब्रेस्ट के आकार और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर कई ऐसे मिथक हैं, जिन्हें ज्यादातर महिलाएं सच मान बैठती हैं। आमतौर पर अगर दोनों ब्रेस्ट के आकार में थोड़ा बहुत अंतर हो, तो महिलाएं घबरा जाती हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि दोनों स्तनों का आकार कभी भी बिल्कुल एक जैसा नहीं होता। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण यह अंतर आना बहुत ही सामान्य बात है। कई बार विकास के दौरान एक ब्रेस्ट की ग्रोथ पहले शुरू हो जाती है, लेकिन दोनों की ग्रोथ रुकती एक साथ ही है। ऐसे में एक का आकार थोड़ा छोटा रह सकता है। इसके अलावा जेनेटिक कारणों से भी स्तनों के आकार में बदलाव दिखता है। इसके लिए किसी भी तरह के मेडिकल ट्रीटमेंट की कोई जरूरत नहीं होती है। आइए ब्रेस्ट से जुड़े ऐसे ही कुछ और मिथकों और उनके पीछे के असली सच (फैक्ट्स) के बारे में विस्तार से जानते हैं।

क्या ब्रेस्टफीडिंग से ब्रेस्ट का शेप बिगड़ जाता है?

यह सबसे आम भ्रम है जिसकी वजह से कई नई माएं अपने बच्चों को अपना दूध पिलाने से घबराती हैं और उन्हें बोतल का दूध देने लगती हैं, जो बच्चे की सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। सच्चाई यह है कि ब्रेस्टफीडिंग से स्तनों का आकार खराब नहीं होता। असल में, प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं का वजन बढ़ने के कारण ब्रेस्ट का साइज बढ़ता है। इसके अलावा, बढ़ती उम्र के साथ त्वचा का लचीलापन (इलास्टिसिटी) कम होने लगता है, जिससे स्किन ढीली पड़ सकती है। बल्कि विज्ञान तो यह कहता है कि ब्रेस्टफीडिंग करवाने से ब्रेस्ट को वापस उनके सही शेप में लाने और सुडौल बनाए रखने में काफी मदद मिलती है।

ब्रा पहनने और ब्रेस्ट कैंसर का सच

समाज में एक डर यह भी फैला है कि टाइट या अंडरवायर ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। दिल्ली के शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल के सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अजय शर्मा के मुताबिक, इस बात का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। आज तक ऐसी कोई भी रिसर्च सामने नहीं आई है जो यह साबित कर सके कि रात में अंडरवायर ब्रा पहनकर सोने से या डार्क रंग की ब्रा पहनने से ब्रेस्ट कैंसर होता है। हां, यह जरूर है कि अगर आप गलत साइज की या बहुत ज्यादा कसी हुई ब्रा पहनती हैं, तो आपकी स्किन पर रैशेज या अन्य त्वचा संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। यहां तक कि निप्पल पियर्सिंग से भी कैंसर होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है।

क्या छूने या प्रेस करने से साइज बढ़ता है?

इस मिथक के कारण कई महिलाएं अपनी इंटिमेट लाइफ का पूरा आनंद नहीं ले पाती हैं। उन्हें लगता है कि पार्टनर द्वारा ब्रेस्ट प्रेस करने या छूने से उनका साइज बढ़ जाएगा। यह पूरी तरह से एक कोरी अफवाह है। महिलाओं के ब्रेस्ट का साइज सिर्फ और सिर्फ हार्मोनल इंबैलेंस या शारीरिक बदलावों के कारण बढ़ता है। इसका ब्रेस्ट को प्रेस करने से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए इस बेबुनियाद डर को मन से निकालकर अपनी पर्सनल लाइफ को एन्जॉय करना चाहिए।

ब्रेस्टफीडिंग में दर्द की सच्चाई

कई महिलाओं को लगता है कि बच्चे को दूध पिलाना बहुत दर्दनाक और असुविधाजनक होता है। यह बात पूरी तरह सच नहीं है। ब्रेस्टफीडिंग कराने की एक सही तकनीक होती है। अगर आप अपने डॉक्टर से इसे सही तरीके से सीख लें, तो यह बिल्कुल भी परेशानी भरा नहीं होता। हालांकि, शुरुआत के कुछ हफ्तों में थोड़ा बहुत दर्द या असहजता महसूस हो सकती है, लेकिन कुछ ही दिनों में शरीर इसका आदी हो जाता है। इसके उलट, अगर आप बच्चे को दूध नहीं पिलाती हैं, तो स्तनों में भारीपन और दर्द की शिकायत हो सकती है। दूध पिलाने से स्तनों में काफी हल्कापन और आराम मिलता है।

क्या तेल और क्रीम की मालिश से बढ़ता है साइज?

बाजार में ऐसी कई दवाइयां, तेल और क्रीम मौजूद हैं जो ब्रेस्ट का आकार बढ़ाने का दावा करती हैं। इसी दावे के चलते कई महिलाएं मालिश का सहारा लेती हैं। लेकिन वैज्ञानिक रूप से इसका कोई भी पुख्ता सबूत नहीं है। स्टडीज बताती हैं कि इन औषधियों या तेल की मालिश से स्तनों के आकार पर कोई खास या स्थायी फर्क नहीं पड़ता है। शरीर का विकास उसकी अपनी प्राकृतिक और जेनेटिक प्रक्रिया पर निर्भर करता है।