
भारत में इस समय सूरज की तपिश और भीषण गर्मी से हाहाकार मचा हुआ है। दिन के समय चिलचिलाती धूप और लगातार बढ़ता तापमान हर किसी को बेहाल कर रहा है। कई जिलों में तो पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की संभावना है, वहीं रातें भी बेहद गर्म और बेचैन करने वाली हो रही हैं।
इस जानलेवा गर्मी और लू (गर्म हवाओं) के बीच लोग न सिर्फ डिहाइड्रेशन बल्कि एक गंभीर शारीरिक समस्या का शिकार हो रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर मशहूर डायटीशियन श्वेता शाह पंचाल ने इस बारे में बात करते हुए एक अहम चेतावनी जारी की है। उन्होंने बताया कि इन दिनों ज्यादातर लोग वायरल पेट के इंफेक्शन (Viral Gut Infection) की चपेट में आ रहे हैं, जिसे लोग सामान्य डायरिया समझकर खुद से ही एंटीबायोटिक दवाइयां खाना शुरू कर देते हैं, जो कि बेहद गलत और खतरनाक है। आइए जानते हैं इस समस्या के कारण, लक्षण और बचाव के आसान उपाय:
क्या है यह समस्या और गर्मियों में क्यों संवेदनशील हो जाता है पेट?
डायटीशियन श्वेता शाह पंचाल के मुताबिक, इन दिनों अस्पतालों और ओपीडी में सबसे ज्यादा मामले वायरल गैस्ट्रोएंटेराइटिस (Viral Gastroenteritis) के आ रहे हैं।
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गट इंफेक्शन बढ़ने के कारण: अत्यधिक गर्मी, उमस (Humidity), दूषित खान-पान और अशुद्ध पानी की वजह से यह आंतों का संक्रमण (Gut Infection) बच्चों से लेकर बड़ों तक सबको अपनी चपेट में ले रहा है।
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पेट के संवेदनशील होने की वजह: गर्मियों में तापमान अधिक होने के कारण खाना बहुत जल्दी खराब या बैक्टीरिया/वायरस से संक्रमित हो जाता है। इसके अलावा, शरीर में पानी की कमी होने से हमारी आंतों की अंदरूनी परत (Gut Lining) डिहाइड्रेट हो जाती है, जिससे आंतों की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर पड़ जाती है। यही वजह है कि गर्मियों में स्ट्रीट फूड, बासी या बिना ढका खाना और कटे हुए फल खाने से इंफेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक (Antibiotics) खाना क्यों है खतरनाक?
जब लोगों का पेट खराब होता है, तो वे तुरंत मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक दवाएं खरीदकर खा लेते हैं। डायटीशियन ने इसे लेकर सख्त हिदायत दी है:
गट इम्बैलेंस का खतरा: पेट के अधिकांश संक्रमण वायरल (Viral) होते हैं न कि बैक्टीरियल (Bacterial)। एंटीबायोटिक दवाएं केवल बैक्टीरिया पर असर करती हैं, वायरस पर नहीं। इसलिए वायरल इंफेक्शन में ये दवाएं कोई मदद नहीं कर पातीं। इसके विपरीत, बेवजह एंटीबायोटिक खाने से हमारे पेट में मौजूद जरूरी और अच्छे बैक्टीरिया (Good Bacteria) नष्ट हो जाते हैं, जिससे ‘गट इम्बैलेंस’ हो जाता है और पेट ठीक होने में और भी ज्यादा समय लग जाता है।
आंतों को तुरंत ठीक करने वाले ४ बेहतरीन ट्रेडिशनल ड्रिंक्स (घरेलू उपाय)
यदि आप या आपके परिवार में कोई इस इंफेक्शन की शुरुआती स्टेज में है, तो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने और आंतों को शांत करने के लिए इन ४ घरेलू पेयों का सेवन हर दो से तीन घंटे में घूंट-घूंट (Sip-Sip) करके करें:
1.खांड या गुड़ वाला नींबू पानी:ड्रिंक 1.
यह शरीर को तुरंत रिहाइड्रेट करता है और खोए हुए इलेक्ट्रोलाइट्स को वापस लाता है।
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बनाने की विधि: एक गिलास साफ पानी में आधा नींबू निचोड़ें, एक चम्मच खांड या गुड़ डालें और एक चुटकी काला नमक मिलाकर हर दो घंटे में पिएं।
2.चावल की पारंपरिक कांजी (माड़):ड्रिंक 2.
यह एक बेहतरीन पारंपरिक ड्रिंक है जो आंतों की सूजन और डिहाइड्रेशन को शांत करती है और डायरिया की रफ्तार को धीमा करती है।
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बनाने की विधि: थोड़े ज्यादा पानी में चावल को अच्छी तरह पका लें। फिर इसके पानी (माड़) को छानकर अलग कर लें, इसमें थोड़ा सा नमक मिलाएं और हल्का गुनगुना या ठंडा करके घूंट-घूंट पिएं।
3.बेल का शरबत:ड्रिंक 3.
बेल का फल गर्मियों के लिए वरदान माना जाता है जो पेट की गर्मी को शांत करता है और दस्त को प्राकृतिक रूप से रोकता है।
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बनाने की विधि: बेल के गूदे को कुछ देर पानी में भिगोकर मैश कर लें और छान लें। अब इसमें हल्का सा नमक और थोड़ा सा गुड़ मिलाकर दिन में दो बार सेवन करें।
4.नमक वाला नारियल पानी:ड्रिंक 4.
नारियल पानी प्राकृतिक रूप से पोटेशियम, सोडियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स से भरपूर होता है जो कमजोरी को तुरंत दूर करता है।
पेट के संक्रमण से बचने के ५ अचूक तरीके (Prevention Tips)
इंफेक्शन होने के बाद परेशान होने से बेहतर है कि आप अपनी आंतों की सुरक्षा पहले से ही मजबूत रखें:
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हमेशा उबला हुआ या अच्छे से फिल्टर (छाना हुआ) पानी ही पिएं।
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बासी, खुला हुआ या सड़क किनारे बिकने वाला स्ट्रीट फूड खाने से पूरी तरह बचें।
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बाजार से लाई गई सब्जियों और फलों को खाने या पकाने से पहले साफ पानी से अच्छी तरह धोएं।
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बचे हुए भोजन को यदि फ्रिज में नहीं रखा गया है, तो उसे दोबारा गर्म करके भी न खाएं; गर्मी में वह तेजी से विषैला हो जाता है।
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आंतों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए अपने दैनिक आहार में विटामिन सी (जैसे आंवला, नींबू, संतरा) को शामिल करें।
इन गंभीर लक्षणों के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
यदि घरेलू उपायों के बाद भी राहत न मिले और निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर के पास जाएं:
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यदि डायरिया या दस्त की समस्या 48 से 72 घंटों (2 से 3 दिन) से लगातार जारी हो।
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मरीज को पेट दर्द के साथ तेज बुखार हो।
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मल (पॉटी) के रास्ते खून आ रहा हो।
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अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना या आंखों के सामने अंधेरा छाना।
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पेशाब (Urine) का बहुत कम आना या गहरे रंग का आना, जो गंभीर डिहाइड्रेशन का संकेत है।।
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