
उत्तर प्रदेश में पिछले कई दिनों से जारी भीषण गर्मी और तपिश का सिलसिला सोमवार देर रात आई तेज आंधी और हल्की बारिश के बाद थम तो गया, लेकिन इस तूफान ने राजधानी लखनऊ समेत आसपास के जिलों में भारी तबाही मचाई है। 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली धूल भरी आंधी के कारण कहीं मकानों की दीवारें ढह गईं, तो कहीं सैकड़ों पेड़ और बिजली के पोल उखड़ गए। इस प्राकृतिक आपदा में सीतापुर में एक महिला की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। साथ ही बड़े पैमाने पर मवेशियों को भी नुकसान पहुंचा है।
लखनऊ: खराब मौसम के अलर्ट के बाद छा गया अंधेरा, गुल हुई बत्ती
राजधानी लखनऊ में सोमवार रात को आंधी और हल्की बौछारों ने लोगों को चिलचिलाती गर्मी से कुछ राहत जरूर दी, लेकिन इसके साथ ही शहर की बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।
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एडवांस अलर्ट रहा चर्चा में: शहर के ज्यादातर लोगों के मोबाइल पर रात लगभग 10:30 बजे ही मौसम खराब होने का अलर्ट आ गया था, जो सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच काफी चर्चा का विषय बना रहा। इसके ठीक पौने घंटे बाद रात सवा 11 बजे अचानक तेज आंधी शुरू हो गई।
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इन इलाकों में ठप हुई बिजली: आंधी के कारण गोमतीनगर, चिनहट, गोमतीनगर विस्तार, अर्जुनगंज, इंदिरा नगर, अयोध्या रोड और उतरेटिया समेत एक बहुत बड़े इलाके की बिजली पूरी तरह ठप हो गई। कई जगहों पर पेड़ की डालियां टूटकर तारों पर गिर गईं, जिससे मौसम साफ होने के बाद भी रातभर बिजली बहाल नहीं हो सकी।
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तापमान का हाल: इस आंधी-बारिश से पहले सोमवार को शहर का अधिकतम तापमान सामान्य से 2.1 डिग्री सेल्सियस अधिक यानी 42.3°C दर्ज किया गया था, जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से 3.1 डिग्री ज्यादा 28.6°C रहा।
सीतापुर: निर्माणाधीन दीवार गिरने से हादसा, एक की मौत और ४ घायल
आंधी का सबसे दर्दनाक रूप सीतापुर के पिसावां इलाके में देखने को मिला। यहाँ के मऊ खुर्द गांव में सोमवार रात सकील नाम के व्यक्ति अपने परिवार के साथ घर के अंदर सो रहे थे, तभी तेज आंधी के कारण एक निर्माणाधीन मकान की दीवार अचानक ढह गई।
मलबे में दबा परिवार: दीवार का मलबा सीधे सो रहे परिवार पर जा गिरा, जिसके नीचे सकील, उनकी पत्नी किस्मत जहां और तीन बच्चे (अमन बेग, अहद बेग और समद बेग) दब गए। ग्रामीणों ने भारी मशक्कत के बाद सबको बाहर निकाला और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया। वहाँ डॉक्टरों ने किस्मत जहां को मृत घोषित कर दिया। सकील की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया है, जबकि बच्चों का इलाज जारी है।
गोंडा: सौ साल पुराना बरगद गिरा, मवेशियों की मौत और रेल मार्ग बाधित
गोंडा जिले में भी आंधी-तूफान ने भयंकर तबाही मचाई है। यहाँ सड़कों, बिजली के बुनियादी ढांचे के साथ-साथ रेलवे ट्रैक को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
१. देहात क्षेत्र में मवेशियों पर गिरा बरगद
कोतवाली देहात क्षेत्र के हरखापुर (बिरसिंहपुर बालक पुरवा) में एक सौ साल से भी पुराना बरगद का पेड़ अचानक जमींदोज हो गया। इस पेड़ के नीचे करीब डेढ़ दर्जन मवेशी बंधे हुए थे। पेड़ की चपेट में आने से गंगा राम और हरि शंकर नामक दो सगे भाइयों की एक भैंस और एक गाय की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य मवेशी गंभीर रूप से घायल हो गए।
२. सैकड़ों पोल गिरे, आवागमन ठप
बेलसर, नवाबगंज और वजीरगंज क्षेत्रों में आंधी के कारण सैकड़ों बड़े पेड़ और बिजली के ट्रांसफार्मर समेत खंभे उखड़ गए। बेलसर-गोंडा मार्ग पर चांदपुर विजयनगर के पास सड़क पर पेड़ गिरने से रास्ता पूरी तरह बंद हो गया, जिससे लोगों को कई किलोमीटर घूमकर जाना पड़ रहा है।
३. रेलवे ट्रैक पर पेड़ गिरने से ८ घंटे खड़ी रही मालगाड़ी
नवाबगंज क्षेत्र के किशुनदासपुर और पर्वती गांव के पास रेलवे ट्रैक पर भारी पेड़ गिर जाने के कारण मनकापुर से अयोध्या धाम जा रही मालगाड़ी (संख्या 12सी) को बीच रास्ते में ही रोकना पड़ा। कटरा रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर संतोष त्रिपाठी के मुताबिक, सोमवार रात 11:30 बजे हुए इस हादसे के कारण मालगाड़ी करीब 8 घंटे तक ट्रैक पर खड़ी रही और मंगलवार सुबह तक रेल यातायात को सामान्य करने का काम जारी था।
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