तेहरान टस से मस नहीं! महाशक्ति अमेरिका के छूटे पसीने, डोनाल्ड ट्रंप की मेज पर पहुंचा ईरान का ‘सीक्रेट’ प्रस्ताव, क्या टल जाएगा युद्ध

मिडिल ईस्ट में पिछले कई महीनों से जारी भीषण तनाव के बीच वैश्विक कूटनीति के गलियारों से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। ईरान को घुटनों पर लाने के लिए कड़े प्रतिबंधों, सैन्य धमकियों और हवाई हमलों का सहारा ले रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति फिलहाल पूरी तरह नाकाम साबित होती दिख रही है। सुपरपावर अमेरिका के भारी दबाव के बावजूद ईरान अपने रुख पर पूरी तरह अडिग है। इस बीच, दोनों देशों की तरफ से आ रहे विरोधाभासी बयानों ने दुनिया को भ्रम में डाल दिया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस गतिरोध को तोड़ने के लिए ईरान ने अब अमेरिका के सामने एक बेहद चौंकाने वाला और व्यापक नया शांति प्रस्ताव रख दिया है, जिसने वाशिंगटन में हलचल तेज कर दी है।

परमाणु डील से बहुत आगे की शर्तें, ईरान ने अमेरिका से मांग लिया युद्ध का भारी मुआवजा

ईरान का यह नया शांति प्रस्ताव केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उससे कहीं आगे जाता है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम गरीबाबादी ने सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए (IRNA) को दिए इंटरव्यू में इस बात की पुष्टि की है कि तेहरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को अपनी नई शर्तें भेज दी हैं। ईरान ने इस प्रस्ताव में दोटूक शब्दों में कहा है कि अमेरिका को उसके ऊपर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंधों को तुरंत और पूरी तरह से हटाना होगा। इसके साथ ही, विदेशों में फ्रीज (जब्त) की गई ईरान की अरबों डॉलर की सरकारी संपत्तियों को बिना शर्त रिहा करना होगा।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ईरान ने इस बार बैकफुट पर जाने के बजाय फ्रंटफुट पर आकर अमेरिका से मुआवजे की मांग की है। तेहरान ने शर्त रखी है कि फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिकी और इजरायली सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के कारण ईरान में जो भारी तबाही हुई है, उसका पूरा हर्जाना अमेरिका को भुगतना होगा। इसके अलावा, ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ से अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और ईरान के पड़ोसी मुल्कों से अमेरिकी सैनिकों की पूर्ण वापसी की मांग भी शामिल की है।

पाकिस्तान बना मध्यस्थ, कतर और सऊदी अरब के दबाव में पीछे हटे ट्रंप?

इस भयंकर कूटनीतिक रस्साकशी के बीच पाकिस्तान दोनों कट्टर दुश्मन देशों के बीच मुख्य मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहा है। पिछले महीने इस्लामाबाद में हुई गुप्त और प्रत्यक्ष शांति वार्ता के बाद यह नया प्रस्ताव अमेरिकी प्रशासन को सौंप दिया गया है। पाकिस्तानी राजनयिक सूत्रों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि इस संकट को सुलझाने के लिए दुनिया के पास अब बहुत ज्यादा वक्त नहीं बचा है। दूसरी तरफ, युद्ध टलने की उम्मीदों को बल तब मिला जब खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में सकारात्मक संकेत दिए।

ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि हम जल्द ही कोई बड़ा समझौता कर लेंगे और अगर बिना बमबारी और खूनखराबे के यह मामला सुलझ जाता है, तो मुझे इससे बेहद खुशी होगी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर यह भी स्वीकार किया कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे खाड़ी देशों के शीर्ष नेताओं ने उनसे ईरान पर नए हमलों को फिलहाल टालने की अपील की है, क्योंकि राजनयिक स्तर पर बातचीत सफल होने की पूरी संभावना दिख रही है।

प्रतिबंधों में छूट के दावों पर अमेरिका का बड़ा यू-टर्न, तेल बाजार में भारी अनिश्चितता

ईरान की तरफ से यह दावा किया जा रहा है कि बैकचैनल वार्ताओं में अमेरिका ने अपने कड़े रुख में थोड़ा लचीलापन दिखाया है। ईरानी मीडिया तसनीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, वाशिंगटन ने ईरान की कुछ जब्त संपत्तियों की आंशिक रिहाई और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की कड़ी निगरानी में सीमित स्तर पर परमाणु रिसर्च जारी रखने की हरी झंडी दे दी है।

हालांकि, व्हाइट हाउस इन दावों को पूरी तरह खारिज कर रहा है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में किसी भी तरह की कोई अस्थायी छूट नहीं दी है और ईरान के दावों में कोई सच्चाई नहीं है। अमेरिका का कहना है कि वे ईरान की इन शर्तों को पहले भी ‘बकवास’ बता चुके हैं और वे केवल ठोस सुधारों पर ही बात करेंगे।

युद्धविराम के बाद भी बारूद के ढेर पर मिडिल ईस्ट, खाड़ी देशों पर मंडराया ड्रोन अटैक का साया

भले ही दोनों देश टेबल पर बातचीत का दिखावा कर रहे हों, लेकिन जमीन पर तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में इराक की धरती से सऊदी अरब और कुवैत के तेल प्रतिष्ठानों की तरफ हुए घातक ड्रोन हमलों ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है, जिसका सीधा शक ईरान समर्थित विद्रोही गुटों पर जताया जा रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही साफ कर चुके हैं कि उनके संयुक्त सैन्य अभियान का एकमात्र उद्देश्य ईरान के परमाणु बम बनाने के सपने को हमेशा के लिए दफन करना, उसकी खतरनाक मिसाइल क्षमता को पंगु बनाना और पूरे मिडिल ईस्ट में फैले उसके प्रॉक्सी मिलिशिया नेटवर्क (हिजबुल्लाह और हूतियों) की कमर तोड़ना है। अब देखना यह होगा कि ईरान का यह नया 14 सूत्रीय फॉर्मूला इस महायुद्ध को रोकता है या यह केवल किसी बड़े तूफान से पहले की शांति है।