
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, जंक फूड और शारीरिक निष्क्रियता के चलते बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) और मोटापा आम समस्या बन चुके हैं। नसों में जमा होने वाला यह मोम जैसा गाढ़ा पदार्थ रक्त प्रवाह को बाधित करता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स और न्यूट्रिशनिस्ट्स का मानना है कि दवाओं के अलावा सही खानपान से भी इन समस्याओं को जड़ से कंट्रोल किया जा सकता है। ऐसा ही एक सुपरफूड फल है ‘एवोकाडो’ (Avocado), जिसे डाइट में शामिल कर आप न सिर्फ अपनी आर्टरीज (धमनियों) को साफ रख सकते हैं, बल्कि बढ़ते वजन और विसरल फैट से भी हमेशा के लिए छुटकारा पा सकते हैं।
अमेरिकी हार्ट एसोसिएशन (AHA) और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय न्यूट्रिशन जर्नल्स में प्रकाशित शोधों के अनुसार, जिन लोगों ने लगातार 6 महीने तक रोजाना एक एवोकाडो को अपनी नियमित डाइट का हिस्सा बनाया, उनके लिपिड प्रोफाइल में जबरदस्त सकारात्मक बदलाव देखे गए। एवोकाडो में मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड्स (MUFA) विशेष रूप से ‘ओलिक एसिड’ प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह हेल्दी फैट धमनियों में चिपके हानिकारक एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को लिवर तक खींचकर बाहर निकालने में मदद करता है और शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) के स्तर को बढ़ाता है। 6 महीने का नियमित सेवन नसों की दीवारों की सूजन (Inflammation) को कम करके आर्टियल प्लाक को बनने से रोकता है।
एवोकाडो को फैट बर्नर सुपरफूड भी कहा जाता है। अक्सर लोगों को लगता है कि फैट युक्त फल वजन बढ़ाएगा, लेकिन एवोकाडो में मौजूद हेल्दी फैट और डाइटरी फाइबर का संयोजन मेटाबॉलिज्म को तेज करता है। एक मध्यम आकार के एवोकाडो में लगभग 10 से 14 ग्राम फाइबर होता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखता है। इससे बार-बार लगने वाली भूख और अनहेल्दी क्रेविंग पर ब्रेक लगता है। यह शरीर में इंसुलिन स्पाइक को रोकता है, जिससे पेट और कमर के आसपास जमा होने वाला विसरल फैट धीरे-धीरे बर्न होने लगता है और 6 महीने के भीतर बॉडी मास इंडेक्स (BMI) में स्पष्ट गिरावट दर्ज की जाती है।
एवोकाडो केवल कोलेस्ट्रॉल घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिल की कार्यप्रणाली को मजबूत बनाने वाला कार्डियो-प्रोटेक्टिव फल है। इसमें केले से भी अधिक मात्रा में पोटैशियम पाया जाता है, जो शरीर में सोडियम के प्रभाव को संतुलित कर हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है। इसके अलावा इसमें ल्यूटिन, जेक्सैंथिन और विटामिन-ई जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से दिल की मांसपेशियों और कोशिकाओं को सुरक्षित रखते हैं। नियमित सेवन से रक्त वाहिकाओं की इलास्टिसिटी बनी रहती है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन सुचारू रहता है और कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का जोखिम 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो जाता है।
इस सुपरफूड का अधिकतम लाभ लेने के लिए इसे सही तरीके से खाना बेहद जरूरी है। न्यूट्रिशनिस्ट्स इसे सुबह के नाश्ते या दोपहर के लंच में लेने की सलाह देते हैं।
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एवोकाडो टोस्ट: होल-ग्रेन ब्रेड पर मैश किया हुआ एवोकाडो, थोड़ा सा काला नमक और काली मिर्च डालकर खाएं।
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सलाद बाउल: खीरा, टमाटर और हरी सब्जियों के साथ इसके क्यूब्स काटकर जैतून के तेल की हल्की ड्रेसिंग के साथ सेवन करें।
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हेल्दी स्मूदी: बिना चीनी के पालक, चिया सीड्स और बादाम के दूध के साथ ब्लेंड करके एनर्जी ड्रिंक बनाएं।
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गुआकामोल डिप: इसे नींबू के रस और बारीक कटे प्याज के साथ डिप की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
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