करियर की शुरुआत में जब 100 लोगों के सामने कपड़े बदलने पर मजबूर हुईं दीया मिर्जा, छलका एक्ट्रेस का दर्द

बॉलीवुड में अपनी सादगी और बेहतरीन अदाकारी के लिए पहचानी जाने वाली पूर्व मिस एशिया पैसिफिक और अभिनेत्री दीया मिर्जा ने हाल ही में अपने शुरुआती करियर के एक बेहद असहज अनुभव का खुलासा किया है। ग्लैमर इंडस्ट्री की चकाचौंध के पीछे अक्सर कई ऐसे कड़वे सच छिपे होते हैं, जिनका सामना नए कलाकारों को करना पड़ता है। दीया मिर्जा ने बताया कि करियर के शुरुआती दौर में जब वह मॉडलिंग और विज्ञापनों की दुनिया में कदम रख रही थीं, तब बुनियादी सुविधाओं और महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल की भारी कमी थी। एक विज्ञापन की शूटिंग के दौरान उन्हें ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा जिसे वह आज तक नहीं भुला पाई हैं।

दीया मिर्जा ने उस घटना को याद करते हुए बताया कि वह एक बड़े कमर्शियल ऐड की शूटिंग कर रही थीं। आउटडोर लोकेशन पर शूट चल रहा था और सेट पर लगभग 100 से अधिक पुरुष क्रू मेंबर्स मौजूद थे। उस दौर में आज की तरह वैनिटी वैन या अलग से चेंजिंग रूम का कोई खास कल्चर नहीं था। जब निर्देशक ने उनसे तुरंत कॉस्ट्यूम बदलने के लिए कहा, तो कोई भी प्राइवेट स्पेस उपलब्ध नहीं था। मजबूरी में कुछ महिला क्रू मेंबर्स ने चादर और तौलिए की एक कच्ची आड़ बनाई, जिसके पीछे खड़े होकर उन्हें खुले में अपने कपड़े बदलने पड़े। एक्ट्रेस के मुताबिक, उस वक्त सैकड़ों लोगों की मौजूदगी के बीच खुद को इतना असुरक्षित और लाचार महसूस करना उनके लिए बेहद डरावना और अपमानजनक था।

दीया मिर्जा ने स्वीकार किया कि वह पल उनके दिमाग में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। उन्होंने कहा कि उस समय वह काफी कम उम्र की थीं और इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रही थीं। कई बार नए कलाकारों को लगता है कि अगर वे बुनियादी सुविधाओं या सम्मान की मांग करेंगे, तो उन्हें काम से हटा दिया जाएगा या नखरेबाज समझ लिया जाएगा। इसी दबाव के चलते वह उस वक्त चुप रहीं, लेकिन उस घटना ने उनके आत्मसम्मान को गहरी ठेस पहुंचाई। एक्ट्रेस ने स्पष्ट किया कि ग्लैमर की दुनिया बाहर से जितनी आकर्षक लगती है, उसके अंदर महिला कलाकारों के लिए बुनियादी स्तर पर सम्मान और सुरक्षा हासिल करना एक लंबी लड़ाई रही है।

इस खुलासे के जरिए दीया मिर्जा ने फिल्म और मॉडलिंग इंडस्ट्री में महिलाओं के वर्किंग कंडीशंस को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले दो दशकों में स्थिति में काफी सुधार आया है। आज सेट्स पर वैनिटी वैन, सुरक्षित वॉशरूम, प्राइवेट ग्रीन रूम और विमेंस सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य रूप से किया जाने लगा है। हालांकि, उनका मानना है कि इंडिपेंडेंट और छोटे बजट के प्रोजेक्ट्स में आज भी महिला कलाकारों और महिला तकनीशियनों को बुनियादी सम्मान और प्राइवेसी के लिए जूझना पड़ता है, जिसे पूरी तरह खत्म करने की जरूरत है।

साल 2000 में ‘मिस एशिया पैसिफिक’ का ताज जीतकर भारत का नाम रोशन करने वाली दीया मिर्जा ने फिल्म ‘रहना है तेरे दिल में’ (2001) से बॉलीवुड में शानदार डेब्यू किया था। इसके बाद उन्होंने ‘दम’, ‘लगे रहो मुन्ना भाई’, ‘संजू’ और ‘थप्पड़’ जैसी कई चर्चित फिल्मों में अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों का दिल जीता। फिल्मों के अलावा दीया मिर्जा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की गुडविल एंबेसडर के तौर पर पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण के मुद्दों पर भी लगातार खुलकर अपनी बात रखती रही हैं।