पटना: बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत के बीच, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी सक्रियता से स्पष्ट कर दिया है कि वे भले ही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर न हों, लेकिन बिहार के विकास का रिमोट कंट्रोल अभी भी उनके ‘मार्गदर्शन’ में है। रविवार को सम्राट चौधरी सरकार में शामिल जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नवनियुक्त मंत्रियों ने नीतीश कुमार से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान नीतीश कुमार ने मंत्रियों को साफ लहजे में हिदायत दी कि सरकार की योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका सीधा असर आम जनता के जीवन में दिखना चाहिए।
“काम बोलता है”: मंत्रियों को समय सीमा का पाठ
नीतीश कुमार ने मंत्रियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने विभागों की लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर समय पर पूरा करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह कितनी जल्दी धरातल पर उतरती है। नीतीश ने कहा, “योजनाओं का क्रियान्वयन इस तरह से हो कि जनता को लगे कि सरकार उनके लिए काम कर रही है।” उन्होंने मंत्रियों को नियमित रूप से फील्ड विजिट करने और जिलों में योजनाओं की प्रगति की खुद निगरानी करने की सलाह दी।
सम्राट सरकार को नीतीश का ‘सुरक्षा कवच’
बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद यह पहली बार है जब नीतीश कुमार ने सार्वजनिक रूप से मंत्रियों को इस तरह के कड़े दिशा-निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी कई बार दोहराया है कि उनकी सरकार नीतीश कुमार के दिखाए रास्ते और उनके मार्गदर्शन पर ही आगे बढ़ेगी। नीतीश कुमार ने स्पष्ट किया कि “न्याय के साथ विकास” का जो संकल्प उन्होंने दो दशक पहले लिया था, उसे नई सरकार को और अधिक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाना है।
निशांत कुमार और युवा टीम पर खास नजर
इस कैबिनेट में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। नीतीश कुमार ने न केवल अपने बेटे बल्कि जदयू के सभी युवा मंत्रियों को नसीहत दी कि वे अपनी ऊर्जा का उपयोग प्रशासनिक दक्षता सुधारने में करें। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और लापरवाही के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति बनी रहनी चाहिए। इस मुलाकात में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और मंत्री जैसे बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी भी मौजूद थे, जिन्होंने नीतीश के विजन को लागू करने का भरोसा दिलाया।
ग्रेस पीरियड खत्म, अब परफॉर्मेंस की बारी
मंत्रियों के साथ हुई इस बैठक को एक तरह का ‘वर्किंग ऑडिट’ माना जा रहा है। नीतीश कुमार ने मंत्रियों को स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल पदभार ग्रहण करने तक सीमित न रहें। उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों और जनता की अपेक्षाओं को देखते हुए हर मंत्री को अपने विभाग का ‘रिपोर्ट कार्ड’ तैयार रखना होगा। सम्राट चौधरी सरकार के लिए यह निर्देश एक तरह से ‘ब्लूप्रिंट’ का काम करेंगे, जिससे बिहार में विकास की गति को और तेज करने की कोशिश की जाएगी।
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