इराक के रेगिस्तान में इजरायल का सीक्रेट मिलिट्री बेस, ईरान पर हमले के लिए बनाया था लॉजिस्टिकल हब

मिडिल ईस्ट के दो कट्टर दुश्मन देशों इराक और इजरायल के बीच एक ऐसा सनसनीखेज राज खुला है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। वर्षों की अदावत और एक-दूसरे को मान्यता न देने के बावजूद, इजरायल ने इराक की नाक के नीचे उसका सैन्य इस्तेमाल किया। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने पश्चिमी इराक के सुनसान रेगिस्तान में एक गुप्त सैन्य अड्डा (Secret Military Base) बना रखा था। यह अड्डा न केवल इजरायली स्पेशल फोर्सेज का ठिकाना था, बल्कि ईरान के खिलाफ हवाई हमलों के लिए एक रणनीतिक लॉन्चपैड भी था।

चरवाहे की उत्सुकता ने खोला बरसों पुराना राज

इजरायल के इस बेहद गोपनीय मिशन का भंडाफोड़ किसी जासूस ने नहीं, बल्कि पश्चिमी इराक के एक स्थानीय चरवाहे ने किया। रिपोर्ट के मुताबिक, चरवाहे ने रेगिस्तान में बहुत कम ऊंचाई पर संदिग्ध हेलीकॉप्टरों को उड़ते देखा, जो इराकी सेना के नहीं लग रहे थे। पीछा करते हुए वह एक दूर-दराज के इलाके में पहुंच गया, जहां इजरायल ने अपना सीक्रेट बेस स्थापित किया था। यह बेस ईरान सीमा से महज 1,000 मील दूर था, जिससे इजरायली वायुसेना के लिए ईरान तक पहुंचना तेल अवीव की तुलना में कहीं अधिक आसान और तेज हो गया था।

स्पेशल फोर्सेज और सर्च-एंड-रेस्क्यू टीमों का था ठिकाना

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि यह गुप्त अड्डा इजरायली वायुसेना के लिए एक ‘लॉजिस्टिकल हब’ के रूप में काम कर रहा था। यहाँ की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार थीं:

  • स्पेशल फोर्स यूनिट्स: यहाँ इजरायल के घातक कमांडो तैनात थे जो किसी भी गुप्त मिशन को अंजाम देने के लिए तैयार थे।

  • सर्च-एंड-रेस्क्यू (SAR): यहाँ बचाव टीमें इसलिए रखी गई थीं ताकि अगर ईरान के खिलाफ हवाई हमले के दौरान कोई इजरायली पायलट दुश्मन के इलाके में गिर जाए, तो उसे तुरंत वहां से निकाला जा सके।

  • ईंधन और रसद: यह बेस इजरायली लड़ाकू विमानों के लिए ईंधन भरने और तकनीकी सहायता प्रदान करने का प्रमुख केंद्र था।

इराकी सैनिकों पर हमला और कूटनीतिक बवाल

राज खुलने के डर से इजरायल ने इस अड्डे को खाली करने से पहले आक्रामक रुख अपनाया। चरवाहे की सूचना पर जब इराकी सेना जांच के लिए वहां पहुंची, तो इजरायली वायुसेना ने उन पर हमला कर दिया। इस हमले में एक इराकी सैनिक की मौत हो गई और दो घायल हो गए। जब इराक ने अतिरिक्त कुमुक भेजी, तब तक इजरायली सेना वह अड्डा खाली कर चुकी थी, लेकिन वहां छोड़े गए सैन्य अवशेषों ने इजरायल की मौजूदगी की पुष्टि कर दी। इराक ने अब संयुक्त राष्ट्र (UN) में इस संप्रभुता के उल्लंघन के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।

अमेरिका को था पता, इराक रहा बेखबर

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू अमेरिका की भूमिका है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका को इस सीक्रेट अड्डे की पूरी जानकारी थी, लेकिन उसने अपने सहयोगी इजरायल के मिशन को गुप्त बनाए रखा और इराक सरकार को इसकी भनक तक नहीं लगने दी। इराक ने इस हमले और अपनी धरती के गलत इस्तेमाल के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इराकी सैनिकों पर हुए सीधे हमले में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। फिलहाल, यह मुद्दा इराक, अमेरिका और इजरायल के बीच एक बड़े राजनयिक गतिरोध का कारण बन गया है।