
अक्सर मौसम बदलने, बाहर का खाना खाने या दूषित पानी के संपर्क में आने के बाद लोगों को पेट दर्द, मरोड़, उल्टी और दस्त की समस्या घेर लेती है। आम बोलचाल में इसे पेट का इन्फेक्शन या ‘स्टमक फ्लू’ (Stomach Flu) कहा जाता है, जबकि मेडिकल भाषा में इसे वायरल गैस्ट्रोएंटेराइटिस (Viral Gastroenteritis) के नाम से जाना जाता है। यह इन्फ्लूएंजा (सांस से जुड़ा फ्लू) से बिल्कुल अलग होता है और मुख्य रूप से आंतों व पेट की अंदरूनी परत में सूजन पैदा करता है। अगर किसी व्यक्ति को यह समस्या बार-बार हो रही है, तो इसे केवल सामान्य बदहजमी मानकर नजरअंदाज करना सेहत पर भारी पड़ सकता है।
बार-बार स्टमक फ्लू या पेट में इन्फेक्शन होने के प्रमुख कारण
स्टमक फ्लू वायरस, बैक्टीरिया और कुछ परजीवियों (Parasites) के संक्रमण से फैलता है। बार-बार इन्फेक्शन की चपेट में आने की मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:
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दूषित पानी और बासी भोजन (Contaminated Food & Water): खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, अस्वच्छ बर्फ, बिना उबला पानी या कच्ची व अधपकी सब्जियों के सेवन से नोरोवायरस (Norovirus), रोटावायरस (Rotavirus) या ई-कोलाई बैक्टीरिया आंतों में प्रवेश कर जाते हैं।
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कमजोर इम्यूनिटी और आंतों का माइक्रोबायोम असंतुलन (Weak Gut Health): शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने या आंतों में ‘गुड बैक्टीरिया’ की कमी होने पर थोड़ा सा भी वायरल लोड तुरंत पेट में गंभीर संक्रमण पैदा कर देता है।
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व्यक्तिगत स्वच्छता में लापरवाही (Poor Hand Hygiene): शौच के बाद या खाना खाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह न धोना और दूषित सतहों को छूकर मुंह पर हाथ लगाना इन्फेक्शन का सबसे बड़ा जरिया है।
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संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना: घर या कार्यक्षेत्र में किसी स्टमक फ्लू से पीड़ित मरीज के बर्तन, तौलिया या वॉशरूम साझा करने से यह वायरस तेजी से फैलता है।
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एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक उपयोग: बार-बार अनावश्यक एंटीबायोटिक दवाएं लेने से आंतों के सुरक्षात्मक बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं, जिससे नया इन्फेक्शन आसानी से हमला कर देता है।
स्टमक फ्लू के मुख्य लक्षण
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अचानक शुरू होने वाले पानी जैसे पतले दस्त (Watery Diarrhea)
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बार-बार जी मिचलाना और उल्टी आना
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पेट के निचले हिस्से में तेज मरोड़ और ऐंठन
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हल्का या मध्यम बुखार और बदन दर्द
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लगातार पानी की कमी (Dehydration), अत्यधिक कमजोरी और चक्कर आना
बचाव और रिकवरी के लिए जरूरी सावधानियां
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हाइड्रेशन बनाए रखें: शरीर में पानी और मिनरल्स की कमी न होने दें। ओआरएस (ORS) का घोल, नारियल पानी, नींबू पानी और दाल का पानी नियमित अंतराल पर पिएं।
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हल्का और सुपाच्य आहार लें: मूंग दाल की खिचड़ी, उबला आलू, दलिया, केला और टोस्ट जैसी चीजें खाएं। भारी, तला-भुना, अत्यधिक मसालेदार और डेयरी उत्पादों से कुछ दिनों तक परहेज करें।
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हाथों की सफाई: खाना खाने से पहले और बाहर से आने के बाद कम से कम 20 सेकंड तक साबुन-पानी से हाथ जरूर धोएं।
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डॉक्टर से संपर्क कब करें: यदि उल्टी या मल में खून आए, तेज बुखार 3 दिन से अधिक रहे, या पेशाब का रंग गहरा पीला होकर मात्रा बहुत कम हो जाए, तो बिना देरी किए गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से परामर्श लें।
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