
संभल (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के संभल में प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को संवारने की दिशा में काम तेज हो रहा है। इसी कड़ी में शहर के मोहल्ला ठेर में कोतवाली के सामने स्थित अकर्ममोचन कूप के जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण की तैयारी शुरू हो गई है। प्रशासन का उद्देश्य इस प्राचीन स्थल को बेहतर स्वरूप देने के साथ यहां पहुंचने वाले लोगों को इसके धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी उपलब्ध कराना है। इस पहल के तहत सूचना बोर्ड लगाने और QR कोड के जरिए ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध कराने की योजना भी सामने आई है।
संभल के अकर्ममोचन कूप का होगा जीर्णोद्धार, हटाया गया अतिक्रमण
संभल शहर के बीच स्थित अकर्ममोचन कूप को प्राचीन धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने पुलिस अधीक्षक विकास चंद्र त्रिपाठी और संबंधित अधिकारियों के साथ स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कूप के आसपास की व्यवस्था सुधारने और इसके जीर्णोद्धार से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
कूप के नजदीक हुए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई भी की गई है। प्रशासन का जोर है कि स्थल तक पहुंचने का रास्ता सुगम बनाया जाए और आसपास के क्षेत्र को व्यवस्थित किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यहां आने में परेशानी न हो। जीर्णोद्धार के साथ परिसर के सौंदर्यीकरण और आवश्यक सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
68 तीर्थ और 19 प्राचीन कुएं, संभल की विरासत को सहेजने की तैयारी
संभल को धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर माना जाता है। प्रशासन के अनुसार, यहां 68 तीर्थस्थलों और 19 प्राचीन कुओं यानी महाकूपों का विशेष महत्व है। इन स्थलों के संरक्षण और विकास के लिए अलग-अलग स्तर पर काम किया जा रहा है।
योजना का मकसद केवल पुराने कुओं और तीर्थों की मरम्मत तक सीमित नहीं है। इनके आसपास की जगह को बेहतर बनाना, रास्तों को व्यवस्थित करना और लोगों को इनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से परिचित कराना भी इस पहल का हिस्सा है। अकर्ममोचन कूप का जीर्णोद्धार इसी व्यापक प्रयास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
QR कोड स्कैन करते ही मोबाइल पर खुलेगी पूरी जानकारी
संभल के प्राचीन तीर्थों और कुओं तक पहुंचने वाले लोगों के लिए डिजिटल सुविधा विकसित करने की योजना भी तैयार की जा रही है। इसके तहत प्रमुख स्थलों पर जानकारी देने वाले बोर्ड लगाए जाने की तैयारी है। इन बोर्ड पर QR कोड उपलब्ध कराने का विचार है, जिसे मोबाइल फोन से स्कैन करके संबंधित स्थल के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।
इस सुविधा से पर्यटकों और श्रद्धालुओं को किसी स्थान का महत्व जानने के लिए अलग-अलग जगहों पर जानकारी तलाशने की जरूरत कम होगी। QR कोड के माध्यम से संबंधित स्थल का परिचय और वहां तक पहुंचने का रास्ता मोबाइल पर उपलब्ध कराने की योजना है। इससे संभल की ऐतिहासिक धरोहरों को देखने आने वाले लोगों के लिए भ्रमण अधिक सुविधाजनक बनाया जा सकेगा।
मोबाइल ऐप और वेबसाइट से भी जुड़ेंगे ऐतिहासिक स्थल
डिजिटल जानकारी को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए मोबाइल ऐप और वेबसाइट विकसित करने की योजना का भी उल्लेख किया गया है। इसका उद्देश्य संभल के तीर्थस्थलों और प्राचीन कुओं की जानकारी एक जगह उपलब्ध कराना है, ताकि लोग अपनी यात्रा की योजना आसानी से बना सकें।
यदि यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होती है, तो लोगों को विभिन्न धार्मिक स्थलों की जानकारी, उनके स्थान और वहां तक पहुंचने के रास्तों के बारे में डिजिटल माध्यम से मदद मिल सकेगी। इससे स्थानीय विरासत के प्रचार-प्रसार और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
दिसंबर तक काम पूरा करने का लक्ष्य
प्रशासन के अनुसार, संभल में कई प्राचीन तीर्थों और कुओं के विकास का काम आगे बढ़ाया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 25 से 26 स्थलों पर काम चल रहा है और इन्हें दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, अलग-अलग स्थलों पर काम की स्थिति और समयसीमा में बदलाव संबंधित परियोजनाओं की प्रगति पर निर्भर करेगा।
अकर्ममोचन कूप के जीर्णोद्धार के साथ आसपास की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की पहल भी इसी क्रम में की जा रही है। प्रशासन का प्रयास है कि प्राचीन धार्मिक स्थलों की पहचान और उनका महत्व सुरक्षित रहे तथा यहां आने वाले लोगों को बेहतर अनुभव मिल सके।
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में कदम
संभल के प्राचीन तीर्थों और कुओं का संरक्षण शहर की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बेहतर रास्ते, साफ-सुथरा परिसर, सूचना बोर्ड और डिजिटल जानकारी जैसी सुविधाएं विकसित होने से इन स्थानों तक पहुंचना आसान हो सकता है।
अकर्ममोचन कूप का जीर्णोद्धार इसी दिशा में उठाया गया कदम है। अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि विकास कार्य कितनी तेजी से पूरे होते हैं और QR कोड, मोबाइल ऐप तथा वेबसाइट जैसी सुविधाएं कब तक जमीन पर उतरती हैं। इन प्रयासों के सफल होने से संभल की ऐतिहासिक पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाने में मदद मिल सकती है।
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