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Railway Pension Rules: रेल कर्मचारियों के लिए असाधारण पेंशन नियमों का एलान, 100% तक परिवार पेंशन और ₹18,000 न्यूनतम डिसेबिलिटी पेंशन तय

भारतीय रेल में कठिन और जोखिम भरे हालातों में ड्यूटी करने वाले लाखों कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए रेल मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने रेलवे कर्मचारियों के लिए रेलवे सेवा (असाधारण पेंशन) नियम [Railway Service (Extraordinary Pension) Rules] को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया है। इस नए फ्रेमवर्क का मकसद ऑन-ड्यूटी गंभीर दुर्घटनाओं, आतंकी हमलों, दंगों, प्राकृतिक आपदाओं या जोखिम भरे अभियानों के दौरान जान गंवाने या गंभीर रूप से दिव्यांग होने वाले रेल कर्मियों के परिवारों को मजबूत सामाजिक व वित्तीय सुरक्षा कवच देना है।

आमतौर पर सामान्य पेंशन नियमों के तहत परिवार को अंतिम आहरित वेतन का एक तय हिस्सा ही फैमिली पेंशन के रूप में मिलता है। लेकिन नए असाधारण पेंशन नियमों के तहत विशेष परिस्थितियों में आश्रितों को अंतिम वेतन का 100% तक परिवार पेंशन देने का कानूनी रास्ता साफ किया गया है। इसके अलावा डिसेबिलिटी और फैमिली पेंशन की न्यूनतम सीमा भी ₹18,000 प्रति माह तय कर दी गई है। यह नया ढांचा ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) और तय शर्तों के साथ नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के कर्मचारियों पर भी लागू होगा।

नए नियमों में सेवा के दौरान होने वाली मृत्यु और दिव्यांगता को घटनाओं की गंभीरता और परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:

कैटेगरी ‘ख’ (Category Kha): इसके तहत वे मामले आते हैं जो सीधे तौर पर रेल सेवा के प्रतिकूल माहौल, व्यावसायिक खतरों (Occupational Hazards) या सामान्य ऑन-ड्यूटी दुर्घटनाओं के कारण होते हैं। इस श्रेणी में मृत्यु होने पर परिवार को कर्मचारी के अंतिम वेतन का 60% हिस्सा परिवार पेंशन के रूप में दिया जाएगा।

कैटेगरी ‘ग’ (Category Ga): इस श्रेणी में सार्वजनिक स्थानों पर अंधाधुंध गोलीबारी, बम विस्फोट, साथी कर्मचारी द्वारा की गई हिंसा, दंगे, भारी प्राकृतिक आपदाएं, अत्यधिक खराब मौसम या राहत एवं बचाव कार्यों (Rescue Operations) के दौरान होने वाली मौतें शामिल हैं। ऐसे मामलों में आश्रित परिवार को कर्मचारी के बेसिक वेतन के 100% के बराबर परिवार पेंशन मिलेगी।

कैटेगरी ‘घ’ (Category Gha): इसमें आतंकवादियों, चरमपंथियों या असामाजिक तत्वों द्वारा रेल कर्मियों पर किए गए जानलेवा हमले, ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्रवाई, अंतरराष्ट्रीय युद्ध, सीमा पर झड़पें या युद्ध जैसी गंभीर जोखिम भरी परिचालन स्थितियां शामिल हैं। इस श्रेणी में भी परिवार को 100% फैमिली पेंशन का पूरा अधिकार दिया गया है।

यदि कोई रेलवे कर्मचारी सेवा के दौरान किसी गंभीर हादसे या आतंकी हमले में दिव्यांग हो जाता है और सेवा से डिस्चार्ज कर दिया जाता है, तो उसे दी जाने वाली डिसेबिलिटी पेंशन को दो हिस्सों—’सर्विस एलिमेंट’ और ‘डिसेबिलिटी एलिमेंट’ में बांटा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि असाधारण पेंशन नियमों के तहत कुल मासिक डिसेबिलिटी पेंशन किसी भी स्थिति में ₹18,000 प्रति माह से कम नहीं हो सकती।

इसके साथ ही दिव्यांगता प्रतिशत के निर्धारण के लिए ‘ब्रॉड-बैंडिंग’ (Broad-banding) का मानवीय फॉर्मूला लागू किया गया है:

  • यदि मेडिकल बोर्ड द्वारा दिव्यांगता 50% तक आंकी जाती है, तो उसे 50% माना जाएगा।

  • 50% से अधिक और 75% तक की दिव्यांगता को 75% माना जाएगा।

  • 75% से अधिक और 100% तक की दिव्यांगता को पूरा 100% माना जाएगा।

100% दिव्यांगता के मामले में सर्विस एलिमेंट के अतिरिक्त अंतिम परिलब्धियों का 30% हिस्सा डिसेबिलिटी एलिमेंट के रूप में जुड़ेगा। सबसे खास बात यह है कि इसके लिए किसी न्यूनतम क्वालिफाइंग सर्विस की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है।

असाधारण पेंशन नियमों में एक और संवेदनशील प्रावधान जोड़ा गया है। यदि मेडिकल बोर्ड यह प्रमाणित करता है कि 100% दिव्यांगता का शिकार हुआ पूर्व कर्मचारी अपनी दैनिक दिनचर्या (उठने-बैठने, खाने, देखभाल) के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर है और उसे हर समय एक सहायक की जरूरत है, तो उसे मासिक डिसेबिलिटी पेंशन के साथ-साथ आजीवन कांस्टेंट अटेंडेंट अलाउंस (Constant Attendant Allowance) भी दिया जाएगा। यह राशि सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित दर पर दी जाएगी, हालांकि इस विशेष भत्ते पर महंगाई राहत (DR) देय नहीं होगी।

परिवार पेंशन की पात्रता में सबसे पहला अधिकार पति या पत्नी (Widow/Widower) का होगा। उनके न होने पर आश्रित बच्चे (गोद लिए और सौतेले बच्चों सहित), उसके बाद माता-पिता और फिर आश्रित भाई-बहन पात्रता क्रम में आएंगे।

अक्सर देखा जाता था कि ऑन-ड्यूटी किसी कर्मचारी की शहादत या दुर्घटना के बाद शोकाकुल परिवार को पेंशन मंजूर कराने के लिए अलग-अलग अर्जियां देनी पड़ती थीं और महीनों दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। नए नियमों ने इस व्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया है।

अब दिव्यांगता पेंशन या परिवार पेंशन के लिए कर्मचारी या उसके परिवार को कोई अलग से आवेदन (Application) देने की आवश्यकता नहीं होगी। कार्यालय प्रमुख (Head of Office) की यह सीधी जिम्मेदारी होगी कि वह मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट मिलने के 3 महीने के भीतर स्वतः संज्ञान लेकर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष केस प्रस्तुत करे। अधिकारी की देरी के कारण किसी भी दावे को खारिज नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सभी मामलों को अनिवार्य रूप से HRMS (ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम) या इंटीग्रेटेड पे एंड अकाउंटिंग सिस्टम के जरिए ऑनलाइन प्रोसेस करना अनिवार्य कर दिया गया है।