पीएम मोदी की 7 अपीलों पर सियासी घमासान, राहुल गांधी का तीखा हमला

हैदराबाद: देश की आर्थिक स्थिति और संसाधनों के प्रबंधन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से की गई ‘7 विशेष अपीलों’ ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। जहां भाजपा इसे राष्ट्रहित में उठाया गया कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इसे सरकार की विफलताओं का रिपोर्ट कार्ड करार दिया है।

पीएम मोदी ने जनता से मांगे ‘7 त्याग’, वर्क फ्रॉम होम और स्वदेशी पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में देश की जनता से सात सूत्रीय अपील की है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि जहां तक संभव हो, ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से काम) को प्राथमिकता दें ताकि ऊर्जा की बचत हो सके। इसके अलावा, पीएम ने अगले एक साल तक सोने की खरीद कम करने या बंद करने, विदेश यात्रा के बजाय देश के भीतर पर्यटन को बढ़ावा देने और पेट्रोल-डीजल की खपत सीमित करने के लिए सार्वजनिक वाहनों (मेट्रो आदि) का उपयोग करने का सुझाव दिया है। पीएम ने किसानों से भी केमिकल फर्टिलाइजर का मोह छोड़कर नेचुरल फार्मिंग (प्राकृतिक खेती) अपनाने की अपील की है।

’12 साल में देश को कहां लाकर खड़ा कर दिया?’ – राहुल गांधी का पलटवार

प्रधानमंत्री की इन अपीलों पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी ने लिखा, “मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे- सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो। ये उपदेश नहीं, बल्कि नाकामी के सबूत हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि 12 साल के शासन के बाद देश ऐसे मुकाम पर पहुंच गया है जहां सरकार को जनता को बताना पड़ रहा है कि वे क्या खरीदें और क्या नहीं। राहुल ने इसे ‘जवाबदेही से बचने का तरीका’ बताया।

कांग्रेस की मांग: संसद का विशेष सत्र बुलाए सरकार

इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर देश में ऐसी स्थिति कैसे पैदा हुई कि प्रधानमंत्री को इस तरह की अपीलें करनी पड़ रही हैं। चिदंबरम ने मांग की कि सरकार को तुरंत संसद का सत्र बुलाकर देश को वास्तविक आर्थिक स्थिति से अवगत कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना देश को भरोसे में लिए अचानक इस तरह के सुझाव देना चिंताजनक है।

क्या है इन अपीलों के पीछे का असली संदेश?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पीएम मोदी की इन अपीलों के पीछे विदेशी मुद्रा भंडार को बचाना और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना एक बड़ा कारण हो सकता है। हालांकि, विपक्ष इसे ‘इकोनॉमिक मिसमैनेजमेंट’ (आर्थिक कुप्रबंधन) से जोड़कर देख रहा है। अब देखना यह होगा कि आम जनता पीएम की इन अपीलों को किस तरह लेती है और आने वाले दिनों में यह सियासी बहस क्या मोड़ लेती है।