वाराणसी: धर्म की नगरी काशी (Varanasi) अपने घाटों और मंदिरों के लिए विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन मणिकर्णिका घाट पर स्थित रत्नेश्वर महादेव मंदिर (Ratneshwar Mahadev Temple) विज्ञान और वास्तुकला के लिए एक पहेली बना हुआ है। इसे ‘काशी का करवट’ या ‘झुका हुआ मंदिर’ भी कहा जाता है। आश्चर्य की बात यह है कि इसकी तुलना इटली की मशहूर ‘पीसा की मीनार’ (Leaning Tower of Pisa) से की जाती है, क्योंकि यह मंदिर उससे भी कहीं अधिक झुका हुआ है।
पीसा की मीनार से ज़्यादा है झुकाव
इटली की पीसा की मीनार लगभग 3.99 डिग्री झुकी हुई है, जबकि रत्नेश्वर महादेव मंदिर का झुकाव 9 डिग्री से भी अधिक है। लगभग 40 फीट ऊंचे इस मंदिर का एक हिस्सा जमीन में धंसा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद सदियों से यह उसी अवस्था में अडिग खड़ा है, जो इंजीनियरों के लिए आज भी शोध का विषय है।
इतिहास और पौराणिक कथाएँ: ‘मां का ऋण’
इस मंदिर के साथ एक बेहद भावुक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है, जिसके कारण इसे ‘मातृ ऋण’ मंदिर भी कहा जाता है:
-
अहिल्याबाई की दासी का निर्माण: कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण रानी अहिल्याबाई होलकर की दासी रत्नाबाई ने कराया था।
-
मां का कर्ज उतारने की कोशिश: रत्नाबाई ने अपनी माता के नाम पर यह मंदिर बनवाया और गर्व से कहा कि उन्होंने इस मंदिर को बनवाकर अपनी मां का कर्ज उतार दिया है।
-
श्राप और झुकाव: मान्यता है कि मां का कर्ज कभी उतारा नहीं जा सकता। जैसे ही रत्नाबाई ने यह शब्द कहे, मंदिर पीछे की ओर झुक गया, यह संकेत देने के लिए कि मां का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता। इसी कारण यह मंदिर ‘करवट’ ले चुका है और इसमें पूजा वर्जित मानी जाती है।
वास्तुकला का चमत्कार: आधा समय गंगा में समाया
रत्नेश्वर महादेव मंदिर की एक और बड़ी खासियत इसका स्थान है। यह घाट के निचले हिस्से में बना हुआ है:
-
जलमग्न रहना: साल के 6 से 8 महीने यह मंदिर गंगा के जल में समाया रहता है। बाढ़ के दौरान तो केवल इसका शिखर ही दिखाई देता है।
-
मजबूत नींव: सदियों तक पानी के अंदर रहने और मलबे के दबाव के बावजूद इसके पत्थर और नक्काशी आज भी सुरक्षित हैं, जो प्राचीन भारत के बेहतरीन निर्माण कौशल को दर्शाते हैं।
-
पूजा-अर्चना: मंदिर के अधिकांश समय जलमग्न रहने और इसके ‘शापित’ होने की मान्यता के कारण यहाँ नियमित रूप से पूजा-पाठ नहीं होता है।
पर्यटन और रहस्य का केंद्र
वाराणसी आने वाले विदेशी पर्यटक और इतिहास प्रेमी रत्नेश्वर महादेव को देखने मणिकर्णिका घाट जरूर पहुंचते हैं। गंगा की लहरों के बीच तिरछा खड़ा यह भव्य मंदिर न केवल सनातन संस्कृति की गहराई को दर्शाता है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि कुछ चीजें विज्ञान के तर्क से परे श्रद्धा और इतिहास के धागों से बुनी होती हैं।
girls globe
