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ज्येष्ठ अमावस्या 2026: शनि जयंती और वट सावित्री का अद्भुत संयोग जानें तिथि,स्नान-दान मुहूर्त

हिंदू कैलेंडर में ज्येष्ठ मास की अमावस्या का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। साल 2026 में यह अमावस्या बेहद खास होने वाली है, क्योंकि इसी दिन शनि जयंती और वट सावित्री व्रत का महापर्व भी मनाया जाएगा। पितरों के तर्पण, शनि देव की शांति और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

ज्येष्ठ अमावस्या 2026 की सही तिथि और मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, साल 2026 में ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 16 मई 2026, शनिवार को पड़ रही है। शनिवार के दिन अमावस्या होने के कारण इसे ‘शनैश्चरी अमावस्या’ भी कहा जाएगा, जो ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत फलदायी है।

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 15 मई 2026 को रात 10 बजकर 05 मिनट से।

  • अमावस्या तिथि समाप्त: 16 मई 2026 को रात 08 बजकर 28 मिनट तक।

  • उदयातिथि: 16 मई को होने के कारण मुख्य व्रत और अनुष्ठान इसी दिन संपन्न होंगे।

तीन प्रमुख पर्वों का महासंयोग

  1. शनि जयंती: न्याय के देवता शनि देव का जन्म इसी तिथि को हुआ था। शनि की साढ़ेसाती और ढैया से मुक्ति के लिए इस दिन पूजा का विशेष महत्व है।

  2. वट सावित्री व्रत: सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए बरगद के पेड़ (वट वृक्ष) की पूजा करती हैं।

  3. ज्येष्ठ अमावस्या: इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और पितरों के निमित्त दान-तर्पण करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

स्नान-दान और पूजा के शुभ मुहूर्त

  • अमृत काल (स्नान के लिए): सुबह 05:30 से 07:11 तक।

  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:51 से दोपहर 12:45 तक।

  • शनि देव पूजा मुहूर्त: शाम 06:30 से रात 08:30 तक (गोधूलि बेला में शनि पूजा श्रेष्ठ मानी जाती है)।

इस दिन क्या करें और क्या न करें?

  • दान का महत्व: ज्येष्ठ की गर्मी को देखते हुए इस दिन जल, छाता, चप्पल, मिट्टी के घड़े (सुराही) और मौसमी फलों का दान करना ‘अक्षय पुण्य’ प्रदान करता है।

  • पितृ तर्पण: अपने पूर्वजों की शांति के लिए पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और “ॐ पितृभ्य: नम:” मंत्र का जाप करें।

  • शनि उपाय: शनि देव को काला तिल, नीले फूल और सरसों का तेल अर्पित करें। गरीबों को भोजन कराने से शनि दोष शांत होता है।

  • सावधानी: इस दिन तामसिक भोजन और शराब से पूरी तरह दूर रहें। किसी का अपमान न करें, विशेषकर बुजुर्गों और जरूरतमंदों का।