
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस समय चीन के आधिकारिक दौरे पर हैं और बुधवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी मुलाकात ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान पुतिन ने एक बड़ा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि रूस अमेरिका के साथ काम करने को तैयार है। पुतिन का यह बयान इसलिए भी काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही अमेरिका ने मास्को पर कड़े आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंध लगा रखे हैं। डोनाल्ड ट्रंप लगातार रूस से बातचीत के रास्ते खोलने की कोशिश कर रहे हैं ताकि इस युद्ध को किसी तरह रोका जा सके। अब पुतिन की ओर से अमेरिका के साथ सहयोग की बात सामने आने के बाद दुनिया भर के जानकारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जा रहा है।
बीजिंग में ट्रंप और पुतिन का दौर: कूटनीतिक हलचल
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनके रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को द्विपक्षीय संबंधों, ईरान संकट, यूक्रेन युद्ध और व्यापार जैसे प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर व्यापक वार्ता की। यह घटनाक्रम काफी दिलचस्प है क्योंकि इससे ठीक पहले 14-15 मई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बीजिंग की यात्रा की थी और उन्होंने भी शी जिनपिंग के साथ ईरान और यूक्रेन युद्ध से लेकर द्विपक्षीय व्यापारिक तनाव पर गहन चर्चा की थी। ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल’ में वार्ता से पहले, शी जिनपिंग ने पुतिन का औपचारिक स्वागत किया। मंगलवार रात बीजिंग पहुंचे पुतिन का स्वागत चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने किया था। अपनी यात्रा से पहले मंगलवार को एक वीडियो संबोधन में पुतिन ने कहा कि रूस-चीन संबंध वास्तव में अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गए हैं और दोनों देशों के बीच नियमित उच्च स्तरीय सहयोग उनकी “असीमित क्षमता” को उजागर करने का एक अभिन्न हिस्सा है। चीनी विदेश मंत्रालय ने भी पुष्टि की है कि शी और पुतिन विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग और आपसी हित के अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गहराई से विचार-विमर्श कर रहे हैं।
तनाव के बीच चीन की ‘न्यूट्रल’ रणनीति
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि यह पुतिन की चीन की 25वीं यात्रा है, जो बीजिंग और मास्को के बीच घनिष्ठ रणनीतिक संबंधों को रेखांकित करती है। पुतिन की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है। यह तनाव ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के बाद पैदा हुआ है। ईरान रूस और चीन दोनों का करीबी रणनीतिक साझेदार है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चीन ईरान से 90 प्रतिशत तेल आयात करता है। वर्ष 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से चीन रूस का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है और रूसी तेल व गैस का सबसे बड़ा खरीदार भी है। चीन ने इस पूरे विवाद में एक तटस्थ रुख अपनाया है और अमेरिका व यूरोप द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की परवाह किए बिना रूस के साथ अपने व्यापारिक संबंध बनाए रखे हैं। राष्ट्रपति के सहायक यूरी उशाकोव ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप और पुतिन की यात्राओं के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है, क्योंकि पुतिन की यह यात्रा फरवरी में ही तय हो गई थी।
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