ईरान की नाक के नीचे खेल: कैसे UAE और कतर हर रोज LPG टैंकरों से दे रहे हैं चकमा

स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) इन दिनों दुनिया की सबसे बड़ी खुफिया तेल और गैस जंग का गवाह बन रहा है। एक तरफ जहां ईरान इस रणनीतिक समुद्री रास्ते पर अपना कड़ा दबदबा होने का दावा करता है, वहीं दूसरी तरफ संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर मिलकर एक ऐसा खुफिया खेल खेल रहे हैं जिसने तेहरान की रातों की नींद उड़ा दी है। वैश्विक ऊर्जा बाजार और शिपिंग डेटा से आ रही खबरें बेहद चौंकाने वाली हैं, जिसमें दावा किया जा रहा है कि आधुनिक तकनीक और चालाकी भरे रूटिंग के जरिए ईरान को रणनीतिक रूप से लगातार पीछे धकेला जा रहा है, और उसे भनक तक नहीं लग पा रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में बंदूकों के साये में ‘सफेद खेल’

होर्मुज का यह इलाका दुनिया के सबसे संवेदनशील जलमार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक एलपीजी (LPG) और कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। सूत्रों और मरीन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, UAE और कतर के विशालकाय एलपीजी टैंकर इस पूरे इलाके में बेहद चालाकी से नेविगेट कर रहे हैं। इन जहाजों द्वारा इस्तेमाल की जा रही ट्रैकिंग मैनिपुलेशन तकनीक और साइलेंट ऑपरेशन्स के कारण ईरान के रडार सिस्टम इन्हें उस तरह से ट्रैक नहीं कर पा रहे हैं जैसा तेहरान चाहता है। यह एक ऐसा अदृश्य चक्रव्यूह है जिसमें ईरान हर गुजरते दिन के साथ खुद को बेबस और एक तरह से ‘अंधा’ महसूस करने पर मजबूर हो रहा है।

कैसे काम कर रही है कतर और यूएई की यह खुफिया रणनीति

जानकारों का मानना है कि इस पूरे खेल के पीछे केवल समुद्री रूट का बदलाव नहीं, बल्कि बेहद हाई-टेक मैरीटाइम इंजीनियरिंग और सैटेलाइट स्पूफिंग शामिल है। कतर और यूएई के ये गैस टैंकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और क्षेत्रीय तनाव के बीच अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) को इस तरह से संचालित कर रहे हैं कि उनकी सटीक लोकेशन और डेस्टिनेशन को पकड़ पाना ईरान की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी पहेली बन गया है। इस रणनीति के जरिए दोनों देश न केवल सुरक्षित रूप से अपना बिजनेस कर रहे हैं, बल्कि ईरान के उस खतरे को भी बेअसर कर रहे हैं जिसके दम पर वह अक्सर इस रूट को ब्लॉक करने की धमकी देता है।

ईरान की संप्रभुता को चुनौती या आर्थिक महाजंग

इस पूरे घटनाक्रम ने मिडिल ईस्ट की भू-राजनीति (Geopolitics) में एक नया उबाल ला दिया है। ईरान जो खुद को इस इलाके का अघोषित राजा समझता था, अब आर्थिक और तकनीकी मोर्चे पर घिरता नजर आ रहा है। प्रतिबंधों की मार झेल रहे तेहरान के लिए यह स्थिति किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि उसकी नाक के नीचे से अरब देशों का अरबों डॉलर का व्यापार बिना किसी रुकावट के लगातार जारी है। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि अगर ईरान ने जल्द ही अपनी इस तकनीकी कमजोरी को दूर नहीं किया, तो खाड़ी देशों का यह दबदबा उसे इस पूरे समुद्री व्यापार से पूरी तरह अलग-थलग कर देगा।