Parama Ekadashi Paran 2026: व्रत रख लिया पर पारण में की ये छोटी सी भूल, तो व्यर्थ चली जाएगी पूरी पूजा; नोट कर लें सही समय

सनातन परंपरा में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ और सबसे जल्दी फल देने वाला माना गया है। हर महीने आने वाली एकादशी भगवान विष्णु को प्रिय होती है, लेकिन जब यह तिथि ‘अधिक मास’ (पुरुषोत्तम मास) में पड़ती है, तो इसकी महिमा अनंत गुना बढ़ जाती है। इस साल ज्येष्ठ मास में अधिक मास का बेहद पावन संयोग बना है और आज इसकी अंतिम एकादशी यानी परमा एकादशी (पुरुषोत्तमी एकादशी) का उपवास रखा जा रहा है।

धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का पूरा पुण्य फल तभी प्राप्त होता है जब उसका समापन यानी पारण (व्रत खोलने की प्रक्रिया) पूरी तरह से विधि-विधान और सही समय पर किया जाए। अगर पारण के नियमों में थोड़ी सी भी चूक हो जाए, तो साधक को व्रत के पूर्ण लाभ से वंचित होना पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि कल यानी 12 जून 2026 को परमा एकादशी व्रत खोलने का सबसे सटीक समय क्या है और इससे जुड़े जरूरी नियम क्या हैं।

परमा एकादशी व्रत पारण का सटीक समय (12 जून 2026)

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण हमेशा अगले दिन यानी द्वादशी तिथि के भीतर ही किया जाना चाहिए। कल सुबह व्रत खोलने का जो शुभ मुहूर्त बन रहा है, उसका विवरण नीचे दी गई तालिका में देख सकते हैं:

नोट: कोशिश करें कि इसी ढाई घंटे की समयावधि के भीतर स्नान-दान आदि करके अपना व्रत खोल लें।

एकादशी व्रत पारण के 4 सबसे जरूरी नियम

शास्त्रों में व्रत खोलने को लेकर कुछ बेहद कड़े और स्पष्ट नियम बताए गए हैं, जिनका पालन हर श्रद्धालु को करना चाहिए:

  • द्वादशी के भीतर पारण अनिवार्य: एकादशी व्रत को द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले खोलना सबसे जरूरी माना गया है। ग्रंथों के अनुसार, द्वादशी तिथि रहते हुए पारण न करना एक गंभीर भूल या पाप के समान माना जाता है।

  • सूर्योदय के बाद ही खोलें व्रत: कई बार ऐसा संयोग बनता है जब द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले ही खत्म हो रही होती है। ऐसी विशेष परिस्थिति में भी नियम यही कहता है कि व्रत हमेशा सूर्योदय (Sunrise) होने के बाद ही खोला जाना चाहिए।

  • तुलसी दल और जल से शुरुआत: व्रत खोलते समय सबसे पहले भगवान विष्णु को भोग लगाएं और फिर तुलसी के पत्ते (तुलसी दल) और चरणामृत या साफ जल पीकर व्रत की शुरुआत करें। इसके बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण करें।

पारण के दौरान भूलकर भी न करें ये गलतियां (What to Avoid)

 ‘हरि वासर’ के समय व्रत खोलना है वर्जित

एकादशी के अगले दिन यानी द्वादशी तिथि का जो शुरुआती एक-चौथाई (1/4) हिस्सा होता है, उसे धार्मिक भाषा में ‘हरि वासर’ कहा जाता है। शास्त्रों में साफ निर्देश है कि हरि वासर के दौरान व्रत नहीं तोड़ना चाहिए। यदि आप इस समय पारण करते हैं, तो व्रत का पुण्य नष्ट हो सकता है। हमेशा हरि वासर की अवधि बीतने का इंतजार करना चाहिए।

  • दोपहर के समय पारण से बचें: व्रत खोलने के लिए सबसे उत्तम और फलदायी समय सुबह (प्रातःकाल) का ही होता है। मध्याह्न यानी दोपहर के समय व्रत कभी नहीं तोड़ना चाहिए। यदि किसी अपरिहार्य कारण या मजबूरी की वजह से आप सुबह के मुहूर्त में पारण नहीं कर पाए हैं, तो फिर दोपहर का समय बीत जाने के बाद (तीसरे पहर में) ही अपना व्रत खोलें।

  • तामसिक भोजन से दूरी: व्रत खोलने के बाद जो भोजन आप ग्रहण करें, वह पूरी तरह सात्विक होना चाहिए। भोजन में प्याज, लहसुन या भारी तेल-मसाले का उपयोग बिल्कुल न करें।

यदि आप इन सरल और स्पष्ट नियमों का ध्यान रखकर कल सुबह परमा एकादशी का पारण करेंगे, तो भगवान श्री हरि विष्णु की असीम कृपा आपके और आपके पूरे परिवार पर हमेशा बनी रहेगी।