
वैश्विक राजनीति के मंच से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। अक्सर अमेरिकी प्राथमिकताओं के आगे घुटने टेकने के आरोपों से घिरने वाले पाकिस्तान ने इस बार सीधे वॉशिंगटन को आंखें दिखाई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े कूटनीतिक प्रस्ताव को पाकिस्तान ने सिरे से खारिज कर दिया है। दरअसल, राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बयान में कहा था कि पाकिस्तान सहित कई प्रमुख मुस्लिम देशों को इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने वाले ‘अब्राहम अकॉर्ड’ (Abraham Accords) पर हस्ताक्षर करने होंगे। ट्रंप के इस फरमान पर पाकिस्तान की तरफ से ऐसा सख्त जवाब आया है जिसने अमेरिकी प्रशासन को भी हैरान कर दिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दोटूक शब्दों में साफ कर दिया है कि उनका देश इस समझौते का हिस्सा कभी नहीं बनेगा।
ट्रंप का दावा- पाक सेना प्रमुख आसिम मुनीर से हुई है बात, मुस्लिम देशों को साथ आना होगा
इस पूरे विवाद की शुरुआत सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बेहद लंबे और विस्तृत सोशल मीडिया पोस्ट से हुई। ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान के साथ अमेरिका की शांति वार्ता ‘बहुत अच्छे’ ट्रैक पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जैसे ही ईरान के साथ अंतिम समझौता संपन्न होता है, वैसे ही सऊदी अरब, कतर, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन और पाकिस्तान को एक साथ आकर इजरायल के साथ कूटनीतिक संबंध स्थापित करने वाले ‘अब्राहम अकॉर्ड’ पर दस्तखत कर देने चाहिए। ट्रंप ने यह सनसनीखेज दावा भी किया कि उन्होंने इस सिलसिले में खुद पाकिस्तानी सेना प्रमुख (चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से सीधी बातचीत की है। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो देश इस समझौते से दूर रहेंगे, उनकी नीयत पर सवाल खड़े होंगे।
हमारी बुनियादी विचारधारा के खिलाफ है यह समझौता, इजरायल को कभी नहीं देंगे मान्यता
ट्रंप के इन बड़े दावों की हवा निकालने में पाकिस्तान सरकार ने जरा भी देर नहीं की। पाकिस्तानी न्यूज चैनल ‘समा टीवी’ को दिए एक विशेष इंटरव्यू में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया। ख्वाजा आसिफ ने कहा, “व्यक्तिगत और आधिकारिक रूप से मेरा यह मानना है कि पाकिस्तान को किसी भी ऐसे समझौते या गठबंधन में शामिल नहीं होना चाहिए जो हमारी बुनियादी और राष्ट्रीय विचारधारा के विपरीत हो। इस संवेदनशील मुद्दे पर पाकिस्तान का रुख पहले दिन से बिल्कुल स्पष्ट रहा है कि इजरायल को स्वीकार करना हमारे लिए किसी भी कीमत पर मुमकिन नहीं है।”
पासपोर्ट पर लिखा है ‘इजरायल वर्जित’, जिनके वादों पर भरोसा नहीं उनके साथ टेबल पर कैसे बैठें?
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने इजरायल पर तीखा हमला बोलते हुए आगे कहा, “आप अंतरराष्ट्रीय मंच पर उन लोगों के साथ एक मेज पर कैसे बैठ सकते हैं, जिनकी बातों, संधियों और वादों पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता?” ख्वाजा आसिफ ने देश की संप्रभुता का हवाला देते हुए याद दिलाया कि पाकिस्तान दुनिया का इकलौता ऐसा मुल्क है जिसके आधिकारिक पासपोर्ट पर साफ तौर पर यह वैधानिक चेतावनी लिखी होती है कि ‘यह पासपोर्ट इजरायल को छोड़कर दुनिया के सभी देशों के लिए मान्य है।’ उन्होंने साफ किया कि जिस देश का नाम तक हमारे पासपोर्ट पर वर्जित है, उसे मान्यता देने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
क्या है डोनाल्ड ट्रंप का ‘अब्राहम अकॉर्ड’ और क्यों इसपर मचा है बवाल?
अब्राहम अकॉर्ड (Abraham Accords) असल में अमेरिकी मध्यस्थता और कूटनीति के तहत तैयार किया गया एक रणनीतिक और ऐतिहासिक समझौता है, जिसकी शुरुआत साल 2020 में डोनाल्ड ट्रंप के पिछले कार्यकाल के दौरान हुई थी। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अरब और मुस्लिम बहुल देशों के साथ इजरायल की दशकों पुरानी कूटनीतिक दुश्मनी को हमेशा के लिए खत्म करना और उनके बीच व्यापारिक, सामरिक व राजनीतिक रिश्तों को सामान्य बनाना है।
शुरुआती दौर में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन जैसे खाड़ी देश इस समझौते का हिस्सा बने थे, जिसके बाद मोरक्को और सूडान ने भी इजरायल के साथ आधिकारिक संबंध बहाल किए थे। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य इस समझौते के जरिए इजरायल और अरब देशों का एक मजबूत ब्लॉक बनाकर मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में ईरान के बढ़ते सैन्य और राजनीतिक प्रभाव को पूरी तरह से काउंटर करना है, जिसे मानने से अब पाकिस्तान ने साफ मना कर दिया है।
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