
बॉलीवुड एक्ट्रेस सेलिना जेटली इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर काफी चर्चा में हैं। पति पीटर हॉग के खिलाफ कोर्ट में तलाक का केस और शोषण के कई गंभीर आरोप लगाने के बाद, अब सेलिना का दर्द सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आया है। हाल ही में हुए ‘ट्विशा शर्मा केस’ ने सेलिना को भीतर तक झकझोर दिया है। इस मामले के बहाने सेलिना ने समाज में महिलाओं के साथ होने वाली मानसिक और घरेलू हिंसा पर एक बेहद विचारणीय और भावुक पोस्ट साझा किया है, जिसमें उन्होंने अपनी आपबीती भी बयां की है।
“हर जख्म शरीर पर नहीं होता…” सेलिना जेटली
ट्विशा शर्मा मामले का जिक्र करते हुए सेलिना ने समाज की कड़वी सच्चाई को सामने रखा है। उन्होंने लिखा:
“शादी जरूरी नहीं कि हमेशा खुशहाल ही हो। कभी-कभी सबसे बुरी हिंसा वो होती है जिसे कोई देख नहीं पाता। ट्विशा शर्मा के दिल तोड़ने वाले मामले ने सबको झकझोर दिया है। एक पढ़ी-लिखी, खूबसूरत और काबिल लड़की, जिसकी जिंदगी धीरे-धीरे मानसिक प्रताड़ना, अकेलेपन, दर्द और बंद दरवाजों के पीछे होने वाली हिंसा में समा गई। सबसे दुखद बात ये रही कि जब उसका परिवार अपनी बेटी के लिए इंसाफ मांग रहा था, तब कुछ लोगों को पौधों में पानी न डाले जाने जैसी मामूली बातें ज्यादा परेशान कर रही थीं।”
सेलिना आगे लिखती हैं कि कई बार औरतों का दर्द इतना सामान्य मान लिया जाता है कि धीरे-धीरे लोगों को उनकी तकलीफ दिखनी ही बंद हो जाती है। हर जख्म शरीर पर दिखाई दे, यह जरूरी नहीं; मानसिक प्रताड़ना अंदर से इंसान को खोखला कर देती है।
परदेस में अकेलापन और ‘हैपिली एवर आफ्टर’ का भ्रम
सेलिना ने बताया कि अक्सर दुनिया को लगता है कि मशहूर हस्तियों या महिलाओं की जिंदगी कितनी खूबसूरत है, लेकिन बंद दरवाजों के पीछे की हकीकत बिल्कुल अलग होती है।
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सपोर्ट सिस्टम का न होना: कई बार महिलाएं परदेस (विदेश) में होती हैं, जहां न उनका परिवार होता है और न ही कोई सपोर्ट सिस्टम। ऐसे में उनके पास कहीं जाने का रास्ता नहीं बचता।
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दोषी महसूस कराना: प्रताड़ना का एक तरीका यह भी होता है कि पीड़ित महिला को ही यह महसूस कराया जाता है कि गलती उसी की है, और उसका दर्द सिर्फ दूसरों के लिए एक परेशानी (न्यूसेंस) है।
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खुद के वजूद पर शक: अकेलापन जब गहराई तक उतर जाता है, तो घर की दीवारें भारी और खामोश लगने लगती हैं। इंसान खुद को समझाने लगता है कि बस किसी तरह सांस लेते रहना ही जिंदगी है और धीरे-धीरे उसे अपने ही वजूद पर शक होने लगता है।
बच्चों की खातिर और समाज के डर से सहती रहीं प्रताड़ना
अपने निजी जीवन और पति पीटर हॉग के साथ चल रहे विवाद पर बात करते हुए सेलिना ने उन कारणों का खुलासा किया जिनकी वजह से वह लंबे समय तक चुप रहीं:
| रुकावटें (The Barriers) | सेलिना की आपबीती और लाचारी |
| माता-पिता का साया न होना | सेलिना के माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका था, जिससे उनका सबसे बड़ा सहारा छिन गया था। |
| आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर न होना | उस वक्त वह फाइनैंशियली इंडिपेंडेंट (आर्थिक रूप से स्वतंत्र) नहीं थीं, जिससे कदम उठाना मुश्किल था। |
| बच्चों का भविष्य | उनके तीन छोटे बच्चे थे। बहुत सी महिलाओं की तरह वह भी सिर्फ इसलिए रिश्ता खींचती रहीं ताकि उनका परिवार बचा रहे और बच्चों को कोई तकलीफ न हो। |
| स्वीकार करने में शर्म | सेलिना ने बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया कि उन्हें दुनिया के सामने यह मानने में शर्म आ रही थी कि वह कितनी अकेली और लाचार हो चुकी हैं। |
माता-पिता और परिवारवालों से सेलिना की बड़ी अपील
अपने पोस्ट के आखिरी हिस्से में सेलिना जेटली ने समाज और खासकर बेटियों के माता-पिता से एक बेहद जरूरी गुजारिश की है। उन्होंने लिखा:
girls globe