अखिलेश और आई-पैक के रिश्तों पर ओपी राजभर का हवाला अटैक, कोयला घोटाले से जोड़ा तार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर एक बार फिर गरमा गया है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा (SBSP) अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) और अखिलेश यादव पर सोशल मीडिया के जरिए सीधा हमला बोला है। राजभर ने सपा की चुनावी रणनीति बनाने वाली कंपनी I-PAC और पश्चिम बंगाल के कोयला घोटाले के बीच सनसनीखेज संबंध होने का दावा किया है। राजभर के इन तीखे सवालों ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

राजभर का आरोप: बंगाल के ‘घोटाले’ के पैसे से चल रही थी सपा की रणनीति?

ओपी राजभर ने अपनी लंबी पोस्ट में दावा किया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आई-पैक को उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की मदद करने का निर्देश दिया था। राजभर ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आई-पैक की फंडिंग बंगाल में हुए कथित कोयला घोटाले के पैसों से की जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘हवाला’ के जरिए यह पैसा यूपी भेजा जाना था ताकि अखिलेश यादव के चुनावी अभियान को धार दी जा सके।

राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव का दुर्भाग्य रहा कि बंगाल में ममता बनर्जी की स्थिति कमजोर हुई और फंडिंग रुक गई। इसी वजह से ढाई महीने काम कराने के बाद सपा ने आई-पैक से किनारा कर लिया। राजभर ने सीधे पूछा, “इसका जवाब दीजिए अखिलेश जी?”

अखिलेश यादव का पलटवार: ‘हमारे पास बीजेपी जैसा फंड नहीं’

इन आरोपों और आई-पैक से दूरी बनाने के सवाल पर अखिलेश यादव ने बेहद सधे हुए अंदाज में जवाब दिया है। अखिलेश ने स्वीकार किया कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों के लिए आई-पैक के साथ करार हुआ था और कुछ महीनों तक काम भी चला, लेकिन फंड की कमी के कारण इस व्यवस्था को जारी रखना संभव नहीं हो सका।

अखिलेश यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, “हमारे पास उस तरह का बड़ा फंड नहीं है कि हम चुनावी मैनेजमेंट कंपनियों पर भारी खर्च कर सकें। इलेक्टोरल बॉन्ड और धार्मिक चंदा भी बीजेपी के ही पास जा रहा है।” उन्होंने साफ किया कि 2027 में उनका PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) मॉडल ही बीजेपी के नए चुनावी मॉडल को मात देगा और लोकतंत्र को सुरक्षित रखेगा।

यूपी की राजनीति में नई बहस

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजभर का यह हमला आगामी चुनावों से पहले सपा को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरने की सोची-समझी रणनीति है। वहीं, अखिलेश यादव ‘फंड की कमी’ की बात कहकर खुद को एक ऐसी पार्टी के तौर पर पेश कर रहे हैं जो संसाधनों के अभाव के बावजूद जनता के मुद्दों (PDA) पर चुनाव लड़ रही है। फिलहाल, सपा की ओर से राजभर के ‘हवाला’ वाले आरोपों पर कोई आधिकारिक कानूनी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने हैं।