8th Pay Commission: सरकारी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले 2.85 फिटमेंट फैक्टर और 69,000 न्यूनतम वेतन की उठी मांग

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर हलचल तेज हो गई है। आगामी बजट और वेतन आयोग के गठन की चर्चाओं के बीच अब कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। ताजा अपडेट रक्षा क्षेत्र के असैन्य कर्मचारियों (Defence Civilian Employees) की ओर से आया है, जिन्होंने न केवल न्यूनतम वेतन में भारी बढ़ोतरी की मांग की है, बल्कि फिटमेंट फैक्टर को लेकर भी नया फॉर्मूला पेश किया है।

फिटमेंट फैक्टर पर बड़ी मांग: 2.57 नहीं अब 2.85 की चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, विभिन्न कर्मचारी संगठनों और रक्षा क्षेत्र से जुड़े महासंघों ने सरकार को पत्र लिखकर 8वें वेतन आयोग के गठन में तेजी लाने का आग्रह किया है। इस बार कर्मचारियों की मुख्य मांग फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 2.85 करने की है। अगर सरकार इस मांग को स्वीकार कर लेती है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में जबरदस्त उछाल देखने को मिलेगा। इससे न केवल वर्तमान कर्मचारियों को फायदा होगा, बल्कि रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन में भी सम्मानजनक वृद्धि सुनिश्चित होगी।

न्यूनतम वेतन 18,000 से सीधे 69,000 रुपये करने का प्रस्ताव

सबसे चौंकाने वाली और राहत भरी खबर न्यूनतम वेतन (Minimum Pay) को लेकर है। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये निर्धारित है। हालांकि, महंगाई के बढ़ते स्तर और जीवन यापन की लागत को देखते हुए संगठनों ने इसे बढ़ाकर सीधे 69,000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा है। कर्मचारियों का तर्क है कि पिछले कुछ वर्षों में आवश्यक वस्तुओं के दामों में जो वृद्धि हुई है, उसके मुकाबले वर्तमान वेतन पर्याप्त नहीं है। यह मांग यदि पूरी होती है, तो निचले स्तर के कर्मचारियों के जीवन स्तर में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।

रिस्क अलाउंस और रक्षा कर्मियों के लिए विशेष लाभ

रक्षा क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ‘रिस्क अलाउंस’ (Risk Allowance) हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। नई मांगों में जोखिम भरे क्षेत्रों में काम करने वाले असैन्य कर्मचारियों के लिए भत्तों में संशोधन की बात कही गई है। संगठनों का कहना है कि विषम परिस्थितियों में काम करने वाले इन कर्मचारियों को मिलने वाला जोखिम भत्ता उनकी मेहनत और जान के जोखिम के अनुपात में होना चाहिए। इसके अलावा, नाइट ड्यूटी अलाउंस और अन्य भत्तों को भी 8वें वेतन आयोग के दायरे में लाकर पुनर्गठित करने की मांग की गई है।

क्या बजट 2024-25 में होगी बड़ी घोषणा?

केंद्रीय कर्मचारी संगठनों की इस सक्रियता के बाद सबकी निगाहें अब केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। हालांकि सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर 8वें वेतन आयोग के गठन की तारीख का ऐलान नहीं किया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि कर्मचारियों की नाराजगी मोल लेना सरकार के लिए आसान नहीं होगा। आने वाले समय में फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम वेतन पर सरकार की ओर से कोई सकारात्मक संकेत मिल सकता है। अगर ये मांगें मानी जाती हैं, तो करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 67 लाख पेंशनभोगियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।