
नीट यूजी (NEET UG) के परिणाम घोषित होते ही देश भर के मेडिकल एस्पिरेंट्स के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है। इस साल की परीक्षा ने न केवल रिकॉर्ड तोड़ प्रतिभा दिखाई है, बल्कि देश के शैक्षणिक मानचित्र पर कुछ राज्यों को ‘मेडिकल हब’ के रूप में स्थापित कर दिया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस बार कुल 1.70 लाख से अधिक छात्रों ने नीट यूजी की कठिन परीक्षा को क्वालीफाई कर एक नया बेंचमार्क सेट किया है। हर साल की तरह इस बार भी कुछ राज्यों का दबदबा बरकरार रहा है, जहाँ के छात्रों ने अपनी मेहनत और रणनीति के दम पर टॉपर्स की सूची में अपनी जगह पक्की की है।
इन राज्यों ने मारी बाजी, टॉपर्स की लिस्ट में रहा दबदबा
रिजल्ट का विश्लेषण करें तो उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान ने इस साल भी सबसे अधिक सफल उम्मीदवार दिए हैं। उत्तर प्रदेश से सबसे बड़ी संख्या में छात्र क्वालीफाई हुए हैं, जो राज्य में बढ़ती कोचिंग संस्कृति और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं का प्रमाण है। वहीं, शिक्षा की राजधानी कोटा के कारण राजस्थान से भी सफल होने वाले छात्रों का प्रतिशत देश में सबसे ऊपर रहा है। महाराष्ट्र और दिल्ली-एनसीआर ने भी इस बार शानदार प्रदर्शन किया है, जहां से हजारों छात्रों ने बेहतरीन स्कोर के साथ मेडिकल कॉलेज में अपनी सीट सुरक्षित करने की राह आसान कर ली है।
क्यों बढ़ रहा है सफल छात्रों का आंकड़ा?
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा और बेहतर स्टडी मैटेरियल की सुलभता ने सफलता का आंकड़ा बढ़ाया है। ऑनलाइन एजुकेशन, बेहतर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और एआई (AI) आधारित लर्निंग टूल्स ने ग्रामीण इलाकों के छात्रों के लिए भी टॉपर्स के साथ कदमताल करना संभव बना दिया है। लखनऊ, पटना और इंदौर जैसे टियर-2 शहरों से भी इस बार बड़ी संख्या में छात्रों ने 650 से ऊपर स्कोर किया है, जो इस बात का संकेत है कि अब नीट की तैयारी किसी एक शहर या बड़े महानगर तक सीमित नहीं रह गई है। 1.70 लाख क्वालीफायर्स का यह आंकड़ा यह भी बताता है कि मेडिकल शिक्षा की चाह रखने वाले युवाओं में जोश और जुनून चरम पर है।
अगले कदम की तैयारी: काउंसलिंग और एडमिशन का दौर शुरू
क्वालीफाई करने वाले इन 1.70 लाख छात्रों के लिए अब काउंसलिंग का अहम पड़ाव शुरू होने जा रहा है। अब छात्रों को अपने अंकों के आधार पर सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में सीट के लिए आवेदन करना होगा। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि इस बार कट-ऑफ में मामूली बदलाव हो सकता है, इसलिए छात्रों को अपनी पसंद के कॉलेज के चयन में सावधानी बरतनी चाहिए। ऑल इंडिया कोटा (AIQ) और स्टेट कोटा के माध्यम से होने वाली यह काउंसलिंग प्रक्रिया आने वाले हफ्तों में पूरी की जाएगी। सफल छात्रों को अब अपने दस्तावेजों को तैयार रखने और काउंसलिंग पोर्टल पर लगातार नजर रखने की जरूरत है ताकि वे अपनी पसंदीदा मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पा सकें।
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