बिहार में साइबर अपराधियों की मौज ,NCRB की रिपोर्ट ने खोली पोल, 99.8% मामले अटके

पटना: बिहार में साइबर ठगों के हौसले बुलंद हैं, लेकिन उन्हें सलाखों के पीछे भेजने वाली पुलिस की रफ्तार कछुए से भी धीमी है। NCRB की ताजा रिपोर्ट ने बिहार पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आंकड़ों की मानें तो बिहार में साइबर अपराध के दर्ज मामलों में से 99.8 प्रतिशत केस अभी भी लंबित हैं। यह चौंकाने वाला खुलासा बताता है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर बिहार में महज खानापूर्ति हो रही है, जिससे आम जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वालों के मन से कानून का खौफ खत्म होता जा रहा है।

फाइलों में कैद है इंसाफ: जांच की सुस्त रफ्तार ने बढ़ाया खतरा

NCRB के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि बिहार में साइबर अपराध की जांच कछुआ गति से चल रही है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस के पास लंबित मामलों का अंबार लगा हुआ है। ठगी का शिकार हुए लोग महीनों तक थानों और साइबर सेल के चक्कर काटते रहते हैं, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जांच में देरी की वजह से अपराधी डिजिटल सबूत मिटाने में सफल हो जाते हैं, जिससे उन्हें सजा दिलाना नामुमकिन हो जाता है। पुलिस की यह ‘सुस्ती’ न केवल पीड़ितों का मनोबल तोड़ रही है, बल्कि नए अपराधियों के लिए खाद-पानी का काम कर रही है।

तकनीकी संसाधनों और ट्रेनिंग की भारी कमी

सूत्रों की मानें तो बिहार पुलिस के पास साइबर अपराध से निपटने के लिए आवश्यक तकनीकी विशेषज्ञता और अत्याधुनिक उपकरणों का अभाव है। जिला स्तर पर खोले गए साइबर थानों में पर्याप्त मैनपावर और ट्रेनिंग की कमी है। जब तक पुलिस कर्मी पुरानी कार्यप्रणाली को छोड़कर डिजिटल फॉरेन्सिक और एडवांस इन्वेस्टिगेशन टूल्स में माहिर नहीं होंगे, तब तक लंबित मामलों का यह ग्राफ कम होना मुश्किल है। साइबर ठग जहां AI और डीपफेक जैसे आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं पुलिस अब भी पारंपरिक तरीकों में उलझी हुई है।

ठगों के रडार पर बिहार: क्या बनेगा दूसरा जामताड़ा?

आंकड़ों में एक डराने वाली प्रवृत्ति यह भी देखी गई है कि बिहार के कुछ जिले अब साइबर अपराध के नए गढ़ के रूप में उभर रहे हैं। जामताड़ा की तर्ज पर यहाँ के युवा भी ठगी के इस खेल में शामिल हो रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई का डर न होने के कारण यह धंधा अब एक संगठित अपराध का रूप ले चुका है। अगर जल्द ही पुलिसिया तंत्र में सुधार नहीं किया गया और आरोपियों को सजा दिलाने की दर (Conviction Rate) नहीं बढ़ाई गई, तो बिहार देश का सबसे बड़ा साइबर क्राइम हब बन सकता है।