Loan Recovery New Rules: अब शादी या शोक के वक्त घर नहीं आ सकेंगे रिकवरी एजेंट, पुलिस वेरिफिकेशन भी हुआ अनिवार्य

यदि आपने किसी बैंक, एनबीएफसी (NBFC) या डिजिटल लेंडिंग ऐप से कोई लोन लिया है और किसी कारणवश उसकी किस्त (EMI) चुकाने में देरी हो रही है, तो आपके लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की तरफ से एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर है। केंद्रीय बैंक ने लोन रिकवरी की पूरी प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी, मानवीय, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए एक कड़क ड्राफ्ट नियम (Draft Guidelines) जारी किया है। इन नए नियमों का मुख्य मकसद कर्ज वसूली के नाम पर बाहरी रिकवरी एजेंटों द्वारा की जाने वाली बदसलूकी, मानसिक उत्पीड़न, धमकी और आधी रात को फोन करके परेशान करने वाली गुंडागर्दी पर हमेशा के लिए लगाम लगाना है।

फिलहाल, आरबीआई ने इस प्रस्तावित ड्राफ्ट पर सभी संबंधित पक्षों और आम जनता से उनकी राय व सुझाव मांगे हैं। यदि इन नियमों को अंतिम रूप दे दिया जाता है, तो आगामी 8 अक्टूबर 2026 से देश भर के वित्तीय संस्थानों को अनिवार्य रूप से इनका पालन करना होगा।

सुबह 8 से पहले और शाम 7 के बाद फोन करने पर पूरी तरह रोक

आरबीआई के इस नए ड्राफ्ट में ग्राहकों की प्राइवेसी (निजता) और उनके मानसिक सुकून का विशेष ख्याल रखा गया है। नियमों के तहत रिकवरी एजेंटों के काम करने के तौर-तरीकों के लिए कुछ बेहद कड़े दायरे तय किए गए हैं:

  • तय समयावधि: रिकवरी एजेंट लोन वसूली या याद दिलाने के लिए ग्राहकों को केवल सुबह 8 बजे से लेकर शाम 7 बजे के बीच ही फोन या संपर्क कर सकेंगे। इस समय के बाद या पहले फोन करना पूरी तरह गैर-कानूनी माना जाएगा।

  • रिश्तेदारों को परेशान करने पर रोक: अक्सर देखा जाता है कि एजेंट लोन लेने वाले व्यक्ति पर दबाव बनाने के लिए उनके दोस्तों, रिश्तेदारों या सहकर्मियों को फोन करके बदनाम करते हैं। नए नियमों में स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी बाहरी व्यक्ति या रिश्तेदार से अनावश्यक संपर्क बिल्कुल नहीं किया जाएगा।

  • गाली-गलौज और धमकी का अंत: बातचीत के दौरान किसी भी तरह की धमकी, डराने वाले लहजे, गलत भाषा या गाली-गलौज का इस्तेमाल करने पर संबंधित एजेंसी और बैंक पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।

पहली बार परिभाषित हुए ‘एजेंसी’ और ‘एजेंट’, बढ़ गया आरबीआई का दायरा

इस ऐतिहासिक ड्राफ्ट नियम में रिजर्व बैंक ने पहली बार ‘रिकवरी एजेंसी’ और ‘रिकवरी एजेंट’ को बेहद कूटस्थ और स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है। इसके अनुसार, बैंक या वित्तीय संस्थान द्वारा लोन वसूली के काम के लिए नियुक्त की गई कोई भी बाहरी संस्था (Third-party Firm) अब सीधे ‘रिकवरी एजेंसी’ के दायरे में आएगी। वहीं, इन एजेंसियों की तरफ से ग्राहकों से सीधे संवाद करने वाले, उनके घर जाने वाले या फोन करने वाले व्यक्ति ‘रिकवरी एजेंट’ कहलाएंगे।

विशेष बात यह है कि इस बार ग्राहकों से सीधे जुड़े रहने वाले बिजनेस करेस्पॉन्डेंट्स (BCs) को भी इसी श्रेणी में शामिल किया गया है। इस परिभाषा के स्पष्ट होने से अब देश की तमाम छोटी-बड़ी रिकवरी एजेंसियां सीधे तौर पर आरबीआई की सख्त निगरानी और रडार के दायरे में आ जाएंगी। यह नियम प्रभावी होने पर देश के सभी कमर्शियल बैंकों पर पूरी तरह लागू होगा, हालांकि स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और लोकल एरिया बैंक को फिलहाल के लिए इस गाइडलाइन से बाहर रखा गया है।

एजेंटों का पुलिस वेरिफिकेशन होगा अनिवार्य, गलत एक्शन पर मिलेगा मुआवजा

आरबीआई ने लोन डिफॉल्टरों के मानवीय अधिकारों को मजबूत करते हुए बैंकों के लिए कुछ बेहद कड़े नीतिगत निर्देश प्रस्तावित किए हैं, जो बैंकिंग व्यवस्था को पूरी तरह बदल देंगे:

अति-महत्वपूर्ण बदलाव: अब बैंकों को अपनी एक व्यापक और पारदर्शी ‘रिकवरी पॉलिसी’ बनानी होगी। इस पॉलिसी के तहत किसी भी व्यक्ति को रिकवरी एजेंट के तौर पर फील्ड में उतारने से पहले उसका पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification) कराना पूरी तरह अनिवार्य होगा, ताकि आपराधिक प्रवृत्ति के लोग इस पेशे में न आ सकें।

इसके साथ ही, यदि किसी ग्राहक के घर में कोई दुखद घटना (शोक) हुई हो या कोई मांगलिक उत्सव (विवाह आदि) चल रहा हो, तो ऐसी परिस्थितियों के दौरान बैंक या उनका कोई भी रिकवरी एजेंट उधार लेने वाले व्यक्ति से किसी भी माध्यम से संपर्क नहीं कर सकेगा। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि यदि कोई एजेंसी या एजेंट नियमों का उल्लंघन करके ग्राहक को प्रताड़ित करता है, तो बैंकों को अपने स्तर पर ही त्वरित शिकायत निवारण व्यवस्था करनी होगी और गलत रिकवरी एक्शन पाए जाने पर पीड़ित ग्राहक को उचित मुआवजा (Compensation) भी देना पड़ेगा। रिजर्व बैंक के इस मानवीय कदम से देश के करोड़ों बैंकिंग उपभोक्ताओं को ऋण वसूली के नाम पर होने वाले मानसिक शोषण से हमेशा के लिए आजादी मिल जाएगी।