ईरान का शांति प्रस्ताव और ट्रंप का सख्त रुख, अमेरिका ने प्रस्ताव को बताया पूरी तरह अस्वीकार्य

वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में चल रहे भीषण संघर्ष के बीच शांति की एक और कोशिश नाकाम होती नजर आ रही है। ईरानी सरकार द्वारा पाकिस्तान के माध्यम से भेजे गए नए ‘शांति प्रस्ताव’ (Peace Proposal) को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सिरे से खारिज कर दिया है। रविवार (10 मई 2026) को प्राप्त हुए इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने इसे “पूरी तरह अस्वीकार्य” (Totally Unacceptable) करार दिया है।

क्या था ईरान का प्रस्ताव?

ईरान ने इस प्रस्ताव के जरिए महीनों से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए कुछ शर्तें रखी थीं:

  • प्रतिबंधों को हटाना: ईरान ने अमेरिका से उन सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की मांग की है जो युद्ध के दौरान और उससे पहले लगाए गए थे।

  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी खत्म करने और सुरक्षित नौवहन की गारंटी मांगी है।

  • स्थायी युद्धविराम: तेहरान चाहता है कि वार्ता का केंद्र केवल अस्थायी संघर्षविराम नहीं, बल्कि युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने पर हो।

ट्रंप ने क्यों किया खारिज?

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए ईरानी प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की। ट्रंप का रुख स्पष्ट है:

  1. परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका और इजरायल की मुख्य शर्त यह है कि ईरान को अपना समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) का भंडार देश से बाहर भेजना होगा और परमाणु केंद्रों को नष्ट करना होगा। ईरान के जवाबी प्रस्ताव में इन शर्तों पर नरमी बरती गई थी, जो ट्रंप को मंजूर नहीं है।

  2. सैन्य विकल्प: ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि ईरान शर्तों पर सहमत नहीं होता है, तो अमेरिका फिर से सैन्य हमले तेज कर सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पहले ही 70% तय लक्ष्यों को नष्ट कर दिया है।

इजरायल का रुख: “युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ”

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ईरानी प्रस्ताव पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने एक अमेरिकी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि जब तक ईरान से परमाणु सामग्री पूरी तरह बाहर नहीं निकाल ली जाती, तब तक युद्ध खत्म नहीं माना जाएगा। नेतन्याहू ने “सटीक और सीधी कार्रवाई” (Go in and take it out) की वकालत की है।

वैश्विक ऊर्जा संकट और चीन का दखल

हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के कारण दुनिया भर में ईंधन की भारी किल्लत हो गई है और तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसी बीच:

  • ट्रंप का चीन दौरा: ट्रंप 13 से 15 मई के बीच चीन की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं। माना जा रहा है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग उन पर युद्ध खत्म करने और तेल आपूर्ति बहाल करने का दबाव बना सकते हैं।

  • यूरोप की पहल: ब्रिटेन और फ्रांस 12 मई को 40 से अधिक देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक कर रहे हैं, ताकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके