बिना अनुमति के जमीन से पानी निकाला तो लगेगा भारी जुर्माना, उत्तराखंड के इन 3 जिलों में लागू हुए नियम

देहरादून/हरिद्वार: उत्तराखंड में गिरते भूजल स्तर (Groundwater Level) को बचाने के लिए सरकार ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। अब राज्य में बिना आधिकारिक अनुमति के बोरवेल या ट्यूबवेल के जरिए पानी निकालना भारी पड़ सकता है। उत्तराखंड भूजल नियामक प्राधिकरण ने देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल जैसे संवेदनशील जिलों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। नए नियमों के उल्लंघन पर अब न केवल भारी आर्थिक दंड लगेगा, बल्कि अवैध बोरिंग को सील करने की कार्रवाई भी की जाएगी।

दोगुना जुर्माना और ‘ग्रीन सेस’: औद्योगिक और कमर्शियल यूजर्स पर शिकंजा

सरकार ने स्पष्ट किया है कि भूजल का दोहन करने वाले कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए अब अनुमति लेना अनिवार्य है।

  • अवैध दोहन पर पेनल्टी: यदि कोई बिना एनओसी (NOC) के भूजल का उपयोग करते हुए पाया जाता है, तो उस पर निर्धारित दरों से दोगुना जुर्माना वसूला जाएगा।

  • मीटरिंग सिस्टम: सभी बड़े उपभोक्ताओं को अपने बोरवेल पर ‘डिजिटल वाटर फ्लो मीटर’ लगाना होगा, ताकि पानी की खपत की सटीक निगरानी की जा सके।

  • रजिस्ट्रेशन जरूरी: पुराने बोरवेल धारकों को भी एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपना पंजीकरण (Registration) कराना होगा, अन्यथा उन्हें भी अवैध मानकर कार्रवाई की जाएगी।

देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल में स्थिति चिंताजनक

मौसम विभाग और केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड के इन तीन मैदानी जिलों में जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। विशेष रूप से देहरादून और हरिद्वार के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थिति ‘ओवर-एक्सप्लॉइटेड’ (अत्यधिक दोहन) की श्रेणी की ओर बढ़ रही है। इसी को देखते हुए प्राधिकरण ने इन इलाकों में नए कमर्शियल बोरवेल पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं।

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए क्या हैं नियम?

आम जनता के लिए नियमों में थोड़ी राहत दी गई है, लेकिन कुछ शर्तें लागू हैं:

  1. एकल आवास: व्यक्तिगत घरों के लिए एक सीमित गहराई तक बोरिंग की अनुमति है, लेकिन इसके लिए भी विभाग को सूचित करना और मानक के अनुरूप रेन वाटर हार्वेस्टिंग (Rain Water Harvesting) सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा।

  2. सोसाइटी और अपार्टमेंट: बड़ी रेजिडेंशियल सोसायटियों को कमर्शियल श्रेणी के नियमों का पालन करना होगा और उन्हें पानी की रीसाइक्लिंग के लिए एसटीपी (STP) प्लांट लगाना होगा।

पानी की बर्बादी पर भी होगी निगरानी

केवल पानी निकालना ही नहीं, बल्कि पानी की बर्बादी भी अब अपराध की श्रेणी में आएगी। यदि कोई सड़क पर पानी बहता हुआ छोड़ता है या पीने के पानी का उपयोग निर्माण कार्य/गाड़ी धोने में करता है, तो स्थानीय प्रशासन उस पर भी जुर्माना लगाने के लिए अधिकृत है। सरकार का लक्ष्य ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत भूजल को रिचार्ज करना और आने वाली पीढ़ी के लिए जल संकट को टालना है।