Tuesday , September 1 2026

शेयर बाजार में कोहराम सेंसेक्स 1100 अंक टूटा, निवेशकों के 5 लाख करोड़ डूबे

मार्केट डेस्क: भारतीय शेयर बाजार के लिए हफ्ते की शुरुआत बेहद खराब रही। सोमवार, 11 मई 2026 को बाजार खुलते ही बिकवाली का भारी दबाव देखा गया, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी धड़ाम हो गए। बीएसई (BSE) सेंसेक्स करीब 1100 अंकों की भारी गिरावट के साथ 76,200 के स्तर के पास पहुंच गया, वहीं एनएसई (NSE) निफ्टी भी 300 अंकों से ज्यादा टूटकर 23,900 के नीचे फिसल गया। इस जबरदस्त गिरावट के कारण महज कुछ ही घंटों में निवेशकों की करीब 5 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति खाक हो गई। बाजार में मचे इस हाहाकार के पीछे कई बड़े वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं।

1. अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल: युद्ध का बढ़ा खतरा

बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ता तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के शांति प्रस्ताव को ‘अस्वीकार्य’ बताकर खारिज करने के बाद खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की आशंका और गहरी हो गई है। शांति वार्ता विफल होने से निवेशकों में घबराहट बढ़ी है, जिसका सीधा असर ग्लोबल और भारतीय मार्केट पर दिख रहा है।

2. पीएम मोदी की ‘मितव्ययिता’ अपील का असर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से ईंधन (Fuel) की बचत करने, सोने (Gold) की अनावश्यक खरीद से बचने और गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं को टालने की अपील की है। पीएम की इस ‘Austerity’ (किफायत) वाली सलाह को निवेशकों ने भविष्य में खपत और आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी होने के संकेत के रूप में लिया है। जानकारों के अनुसार, इस अपील ने निवेशकों के कॉन्फिडेंस को हिला दिया है।

3. कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग: $105 के पार

ईरान-अमेरिका विवाद के चलते कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने के डर से ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतें बढ़ने से देश का चालू खाता घाटा (CAD) और महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, जो शेयर बाजार के लिए नकारात्मक संकेत है।

4. रिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया: 95 प्रति डॉलर के करीब

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर की भारी मांग के कारण भारतीय रुपया अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है। सोमवार को रुपया 40 पैसे टूटकर 94.88 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। रुपये की कमजोरी से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) में बिकवाली बढ़ गई है, क्योंकि उन्हें अपने निवेश की वैल्यू घटने का डर सता रहा है।

5. बैंकिंग और ऑटो शेयरों में भारी बिकवाली

बाजार को नीचे गिराने में बैंकिंग और ऑटो सेक्टर का सबसे बड़ा हाथ रहा। दिग्गज शेयर जैसे HDFC Bank और SBI में भारी गिरावट दर्ज की गई। वहीं, पीएम मोदी द्वारा फ्यूल बचाने की अपील के बाद ऑटो शेयरों (जैसे टाटा मोटर्स और महिंद्रा) में जबरदस्त बिकवाली देखी गई। जानकारों के अनुसार, जब तक ग्लोबल टेंशन कम नहीं होती, बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।