
अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले चाहे जितने भी शातिर क्यों न हों, कानून के लंबे हाथ उन तक पहुंच ही जाते हैं। ऐसा ही एक पुराना मामला उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से सामने आया है, जहां अदालत ने एक संगठित गिरोह चलाने वाले अपराधी को उसके किए की सजा भुगतने के लिए जेल भेज दिया है।
गाजियाबाद के विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) एवं अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-12 ने गैंगस्टर एक्ट से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी अरुण कुमार को दोषी पाया है। अदालत ने दोषी को दो वर्ष पांच महीने के सश्रम कारावास (कठोर कारावास) और 5,000 रुपये के आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई है। यदि दोषी इस जुर्माने की रकम को जमा करने में नाकाम रहता है, तो उसे 10 दिन की अतिरिक्त जेल काटनी होगी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि आरोपी द्वारा पहले जेल में बिताई जा चुकी अवधि को उसकी मुख्य सजा में एडजस्ट (समायोजित) किया जाएगा।
साल 2010 से शुरू हुई थी कानून की शिकंजा
यह पूरा मामला करीब 16 साल पुराना है। वर्ष 2010 में गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने की पुलिस ने अरुण कुमार के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की धारा 2/3 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस की तफ्तीश और जांच में यह कड़वा सच सामने आया था कि अरुण कुमार कोई छोटा-मोटा अपराधी नहीं था, बल्कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर पूरे इलाके में एक संगठित गिरोह (गैंग) संचालित करता था।
यह गिरोह मुख्य रूप से राहगीरों से लूटपाट, डकैती और अवैध हथियारों के बल पर डराने-धमकाने जैसे गंभीर और दुस्साहसिक अपराधों को अंजाम देता था। इंदिरापुरम थाने में उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट, डकैती और लूट से जुड़े कई मुकदमे पहले से दर्ज थे, जिन्हें आधार बनाकर पुलिस ने उसका ‘गैंग चार्ट’ तैयार किया था और उस पर गैंगस्टर लगाया था।
पीड़ित की गवाही ने कोर्ट में खोली पोल
इस केस की अदालती सुनवाई के दौरान सरकारी अभियोजन पक्ष ने जुर्म को साबित करने के लिए तीन महत्वपूर्ण गवाहों को कोर्ट के सामने पेश किया। इनमें से एक गवाह खुद उस खौफनाक वारदात का शिकार हुआ पीड़ित व्यक्ति था।
पीड़ित ने अदालत के सामने आपबीती सुनाते हुए बताया कि मई 2010 में जब वह नोएडा के सेक्टर-62 के पास से गुजर रहा था, तब अरुण कुमार और उसके बदमाशों ने चाकू की नोक पर उसका अपहरण (Kidnap) कर लिया था। इसके बाद बदमाशों ने डरा-धमकाकर उसकी सारी नकदी और मोबाइल फोन लूट लिया था। हालांकि, वारदात के बाद सक्रिय हुई पुलिस ने घेराबंदी करके आरोपियों को धर दबोचा था और पीड़ित का लूटा गया शत-प्रतिशत सामान भी बरामद कर लिया था।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: समाज में डर फैलाना बर्दाश्त नहीं
विशेष अदालत ने अपने फैसले में समाज विरोधी तत्वों को कड़ा संदेश दिया है। न्यायाधीश ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए दस्तावेजी सबूतों और चश्मदीद गवाहों के बयानों से यह पूरी तरह सिद्ध होता है कि आरोपी की आपराधिक गतिविधियों की वजह से समाज में डर, खौफ और आतंक का माहौल पैदा हुआ था। उसने केवल अपने अवैध आर्थिक फायदे के लिए कानून को हाथ में लिया।
सुनवाई के दौरान जहां सरकारी वकील ने आरोपी को एक पेशेवर और आदतन अपराधी बताते हुए कठोरतम सजा देने की मांग की, वहीं दूसरी तरफ बचाव पक्ष के वकील ने उसकी कमजोर आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देकर कोर्ट से थोड़ी नरमी बरतने की गुहार लगाई थी। लेकिन अदालत ने अपराध की गंभीरता और समाज की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए आरोपी को जेल की सजा सुना दी।
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