
उत्तर प्रदेश में रेल यात्रियों के सफर को अधिक सुगम, तेज और समय का पाबंद बनाने के लिए भारतीय रेलवे अपने बुनियादी ढांचे में लगातार बड़े बदलाव कर रहा है। इसी कड़ी में पूर्वोत्तर रेलवे (NER) के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण रूटों में से एक— बाराबंकी से गोरखपुर रेल मार्ग को लेकर एक बेहद शानदार खबर सामने आई है। इस रूट पर सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों को अब ट्रेनों की कशमकश और स्टेशनों के आउटर पर घंटों खड़े रहने की समस्या से हमेशा के लिए निजात मिलने वाली है।
पहली बार 4 लाइनों पर दौड़ेंगी ट्रेनें; सर्वे का काम संपन्न
बाराबंकी से गोरखपुर के बीच के रेल ट्रैक को अब पूरी तरह अपग्रेड करते हुए ‘फोर-लेन’ (चार लाइनें) में बदलने की तैयारी पूरी हो चुकी है। वर्तमान में इस रूट के एक महत्वपूर्ण हिस्से यानी बुढ़वल से लेकर गोंडा कचेहरी स्टेशन तक तीसरी रेल लाइन बिछाने का काम काफी तेजी से चल रहा है।
लेकिन रेलवे प्रशासन केवल तीसरी लाइन तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि भविष्य की बढ़ती आबादी और ट्रेनों की संख्या को ध्यान में रखते हुए चौथी रेल लाइन बिछाने की योजना पर भी अपनी मुहर लगा दी है। इस चौथी लाइन को जमीन पर उतारने के लिए जो शुरुआती सर्वे का काम किया जा रहा था, वह अब सफलता पूर्वक पूरा कर लिया गया है।
पूर्वोत्तर रेलवे का सबसे व्यस्त और लाइफलाइन रूट
इस रेल खंड की अहमियत और इस नए प्रोजेक्ट से होने वाले बड़े बदलावों को आप नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझ सकते हैं:
क्या कह रहे हैं जिम्मेदार अधिकारी?
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) सुमित कुमार ने इस ऐतिहासिक परियोजना की प्रगति को लेकर मीडिया से ताजा जानकारी साझा की है।
CPRO सुमित कुमार के मुताबिक: > “बाराबंकी-गोरखपुर रेल खंड पूर्वोत्तर रेलवे के लिए बेहद रीढ़ की हड्डी जैसा मार्ग है। इस रूट पर यातायात के भारी दबाव को कम करने के लिए चौथी लाइन बिछाने का प्रारंभिक सर्वे पूरी तरह से पूरा कर लिया गया है। उम्मीद है कि उच्च स्तर से जरूरी स्वीकृतियां मिलते ही जल्द ही जमीनी स्तर पर चौथी लाइन बिछाने का निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा। चार ट्रैक हो जाने के बाद इस पूरे रूट पर ट्रेनों का संचालन और उनका समय पालन (Punctuality) पहले से कहीं ज्यादा सटीक और आसान हो जाएगा।”
आम मुसाफिरों को कैसे मिलेगी राहत?
इस रूट पर चार लाइनें चालू हो जाने के बाद सबसे बड़ा और सीधा फायदा आम जनता और नौकरीपेशा यात्रियों को होगा। अक्सर देखा जाता है कि वीआईपी या एक्सप्रेस ट्रेनों को पास कराने के लिए लोकल पैसेंजर और मालगाड़ियों को आउटर या छोटे स्टेशनों पर घंटों रोक दिया जाता है।
जब इस रूट पर चार ट्रैक उपलब्ध होंगे, तो एक्सप्रेस, पैसेंजर और मालगाड़ियों के लिए अलग-अलग लाइनें इस्तेमाल की जा सकेंगी। इससे न केवल ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि हादसों की आशंका भी कम होगी और पूर्वी उत्तर प्रदेश से लखनऊ-दिल्ली आने-जाने वाले लोगों का कीमती समय बचेगा।
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