Dollar Vs Rupee: डॉलर के मुकाबले 97 के करीब पहुंचा रुपया, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुलाई इमरजेंसी बैठक

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मची उथल-पुथल और विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली के चलते भारतीय करेंसी ‘रुपया’ इस समय अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। इस हफ्ते डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर लगभग 97 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिसने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माथे पर चिंता की लकीरें ला दी हैं।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, रुपये में उम्मीद से कहीं अधिक तेजी से आ रही इस गिरावट को रोकने के लिए आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा और बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण आंतरिक (Internal) बैठकें की हैं। नीति निर्माताओं का मानना है कि भले ही भारत की आर्थिक नींव (Economic Fundamentals) मजबूत है और बैंकिंग सिस्टम सुदृढ़ है, लेकिन यह मजबूती फिलहाल एक्सचेंज रेट (विनिमय दर) में दिखाई नहीं दे रही है। इसलिए केंद्रीय बैंक अब किसी भी हद तक जाकर रुपये को स्थिर करने की तैयारी में है।

आइए जानते हैं कि इन बैठकों में रुपये को बचाने के लिए किन 4 बड़े उपायों पर चर्चा हुई है:

1. तय समय से पहले ब्याज दरों में बढ़ोतरी (Rate Hike) की संभावना

रुपये की गिरावट को तुरंत थामने का सबसे असरदार हथियार ब्याज दरों (Repo Rate) में इजाफा करना माना जाता है। हालांकि, आरबीआई की अगली आधिकारिक मौद्रिक नीति (Monetary Policy) समीक्षा बैठक 3 से 5 जून को होनी है, लेकिन बाजार के बिगड़ते हालातों को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि आरबीआई समय से पहले (Out-of-turn) भी दरों में बदलाव कर सकता है। (बता दें कि इससे पहले मई 2022 में भी आरबीआई ने निर्धारित समय से बाहर जाकर अचानक ब्याज दरें बढ़ाई थीं)।

  • कैसे मिलेगा फायदा: भारत में ब्याज दरें बढ़ने से अमेरिका और भारत के बीच इंटरेस्ट रेट का अंतर बढ़ जाएगा। इससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बॉन्ड मार्केट आकर्षक हो जाएगा और वे भारत में निवेश बढ़ाएंगे। गौरतलब है कि इस साल अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से 19 अरब डॉलर से अधिक निकाल चुके हैं।

2. करेंसी स्वैप (Currency Swap) और लिक्विडिटी बूस्ट

आरबीआई ने बाजार में डॉलर की किल्लत को दूर करने के लिए तुरंत कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। केंद्रीय बैंक ने 5 अरब डॉलर की स्वैप नीलामी (Swap Auction) आयोजित करने की घोषणा की है। इस कदम से बैंकिंग प्रणाली में तुरंत लिक्विडिटी (नकदी) आएगी और आरबीआई के डॉलर रिजर्व को भी मजबूती मिलेगी। आने वाले दिनों में ऐसी कई और नीलामियां देखने को मिल सकती हैं।

3. प्रवासियों के लिए विशेष एनआरआई जमा योजना (NRI Schemes)

साल 2013 के ‘टेपर टैंट्रम’ संकट की तर्ज पर आरबीआई इस बार भी एनआरआई (प्रवासी भारतीयों) के लिए एक विशेष डिपॉजिट स्कीम लाने पर विचार कर रहा है। इसके जरिए विदेशों से भारी मात्रा में डॉलर जुटाए जा सकते हैं। 2013 के संकट में इस योजना से भारत को लगभग 30 अरब डॉलर मिले थे, जबकि इस बार जानकारों का अनुमान है कि यह आंकड़ा 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

4. सॉवरेन डॉलर बॉन्ड (Sovereign Dollar Bonds) की बिक्री

डॉलर की आमद बढ़ाने के लिए सरकार की मदद से सॉवरेन डॉलर बॉन्ड जारी किए जा सकते हैं। हालांकि, सरकारी डॉलर बॉन्ड बेचने का अंतिम फैसला केंद्र सरकार को करना होता है, लेकिन आरबीआई इस विकल्प पर भी सरकार के साथ मिलकर गंभीर मंथन कर रहा है।

बाजार पर दिखा आरबीआई की कोशिशों का असर

आरबीआई की सक्रियता और लिक्विडिटी बढ़ाने वाली घोषणाओं का असर गुरुवार को बाजार पर साफ देखने को मिला:

  • रुपया संभला: रिकॉर्ड निचले स्तर को छूने के बाद रुपया आज 0.5% मजबूत होकर 96.38 प्रति डॉलर के स्तर पर वापस आ गया।

  • बॉन्ड यील्ड में गिरावट: भारत के 10-वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड का यील्ड 3 आधार अंक गिरकर 7.05% पर आ गया।

आगे की राह: अधिकांश अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि देश में बढ़ती घरेलू महंगाई और रुपये के इस दबाव को देखते हुए आगामी 5 जून की बैठक में मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला लिया जाना लगभग तय है।