
भारत और उसके पड़ोसी देश नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। नेपाल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बालेन्द्र (बालेन) शाह के एक बेहद विवादास्पद और चौंकाने वाले बयान के बाद दोनों देशों के कूटनीतिक हलकों में भारी खलबली मच गई है। नेपाली पीएम ने खुले मंच से यह दावा किया है कि सिर्फ भारत ने ही नहीं, बल्कि खुद नेपाल ने भी कई जगहों पर भारतीय सीमा के भीतर घुसकर जमीन पर अपना कब्जा जमाया हुआ है। इस बयान के बाद सीमा पर तनाव और सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे थे, जिस पर अब भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने सामने आकर स्थिति को पूरी तरह साफ किया है। भारत सरकार ने नेपाल के दावों की जमीनी हकीकत बताते हुए इस पूरे विवाद का मुख्य कनेक्शन गंडक नदी के बदलते बहाव से जोड़ा है।
नेपाली संसद में पीएम बालेन शाह का विस्फोटक बयान, सुगौली संधि का हवाला देकर मांगी ब्रिटेन-चीन से मदद
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने नेपाली संसद के भीतर एक विशेष सत्र को संबोधित करते हुए यह सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने सांसदों के सामने कहा कि प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने और आधिकारिक फाइलों का अध्ययन करने के बाद उन्हें यह पता चला है कि जमीन अतिक्रमण का यह खेल दोनों तरफ से हुआ है। इस दशकों पुराने सीमा गतिरोध को हमेशा के लिए सुलझाने के लिए नेपाली पीएम ने एक नया और अजीबोगरीब राग अलापते हुए इसमें चीन और ब्रिटेन (UK) जैसे तीसरे देशों की मध्यस्थता का खुला सुझाव दे डाला। बालेन शाह का तर्क था कि चूंकि यह पूरा सीमा विवाद साल 1816 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई ऐतिहासिक ‘सुगौली संधि’ के समय से चला आ रहा है, इसलिए ब्रिटेन की सरकार को इस मामले में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभानी चाहिए।
भारत का बेहद कड़ा और स्पष्ट जवाब, तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को सिरे से किया खारिज
नेपाल के इस अप्रत्याशित और विवादास्पद रुख पर भारत के विदेश मंत्रालय ने बेहद सख्त और दो टूक प्रतिक्रिया दी है। नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नेपाल के सभी दावों की हवा निकालते हुए भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया। भारत सरकार ने साफ शब्दों में कहा कि भारत और नेपाल के बीच की सीमा का मामला पूरी तरह से एक द्विपक्षीय (Bilateral) मुद्दा है। इस मामले में दुनिया के किसी भी तीसरे पक्ष, चाहे वह चीन हो या ब्रिटेन, की कोई भूमिका नहीं हो सकती और न ही भारत ऐसे किसी हस्तक्षेप को कभी स्वीकार करेगा। प्रवक्ता ने दोहराया कि दोनों देशों के बीच जो भी अनसुलझे सीमा संबंधी मामले हैं, उन्हें केवल और केवल आपसी विश्वास व सीधी बातचीत के जरिए ही सुलझाया जा सकता है।
जानिए क्या है गंडक नदी का कनेक्शन और नो-मैन्स लैंड का पूरा जमीनी सच
भारतीय राजनयिकों और सीमा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-नेपाल सीमा पर विवाद की मुख्य और असल वजह कोई जानबूझकर किया गया सैन्य कब्जा नहीं, बल्कि गंडक नदी के बहाव में आने वाला प्राकृतिक बदलाव है। गंडक नदी जिसे नेपाल में नारायणी नदी भी कहा जाता है, समय के साथ अपनी धारा और रास्ता बदलती रहती है। नदी का बहाव बदलने के कारण जो ‘नो-मैन्स लैंड’ (No Man’s Land) यानी दोनों देशों के बीच की खाली सीमा पट्टी होती है, उसके पिलर कई बार पानी में बह जाते हैं या उनकी स्थिति बदल जाती है। इसी प्राकृतिक भौगोलिक बदलाव के कारण दोनों तरफ के स्थानीय किसानों और नागरिकों के बीच खेती की जमीन को लेकर भ्रम और विवाद की स्थिति पैदा होती है जिसे नेपाल के राजनीतिक दल हवा देने की कोशिश कर रहे हैं। भारत सरकार ने साफ किया है कि दोनों देशों की तकनीकी टीमें सीमा का वैज्ञानिक मानचित्रण करने में सक्षम हैं और किसी को भी इस पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
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