
वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के सबसे जघन्य और चर्चित मामलों में शामिल खुफिया ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में अदालत द्वारा आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपितों को दोषी ठहराया जा चुका है। इस बड़े फैसले के पीछे दिल्ली पुलिस की लंबी, सुनियोजित और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित जांच की सबसे अहम भूमिका रही। कोविड-19 महामारी के खौफ, घटनास्थल पर खराब सीसीटीवी फुटेज और डरे-सहमे गवाहों जैसी असाधारण चुनौतियों के बावजूद जांच टीम ने ऐसे अचूक सबूत जुटाए, जिसने अदालत में अभियोजन के पक्ष को लोहे की तरह मजबूत कर दिया।
महामारी और खौफ के बीच गवाहों को सुरक्षित लाना था बड़ी चुनौती
इस बेहद संवेदनशील मामले के जांच अधिकारी अमलेश्वर राय के अनुसार, यह दंगा उस दौर में हुआ था जब पूरा देश कोरोना महामारी की चपेट में आ रहा था। पुलिस के सामने एक तरफ कानून-व्यवस्था बहाल करने की चुनौती थी, तो दूसरी तरफ महामारी के बीच जांच की रफ्तार बनाए रखना बेहद कठिन था। सबसे बड़ी समस्या उन प्रत्यक्षदर्शी गवाहों को ढूंढना और उनका भरोसा जीतना था, जो उसी दंगा प्रभावित इलाके में रहते थे और जिनका रोजगार भी वहीं से जुड़ा था। ताहिर हुसैन जैसे रसूखदार नाम के सामने भय और सामाजिक दबाव के माहौल में गवाहों का अदालत तक सहयोग सुनिश्चित करना पुलिस के लिए सबसे टेढ़ी खीर साबित हुआ।
खराब सीसीटीवी फुटेज के बाद पुलिस ने बुना तकनीकी साक्ष्यों का जाल
जांच के दौरान टीम को एक और तगड़ा झटका तब लगा जब पता चला कि घटनास्थल के आसपास लगे कई सीसीटीवी कैमरों की फुटेज या तो उपलब्ध नहीं थी या दंगाइयों द्वारा खराब कर दी गई थी। ऐसे में दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने हार नहीं मानी। पुलिस ने अत्याधुनिक फोरेंसिक टूल्स, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR), प्रत्यक्षदर्शियों के गोपनीय बयानों और दंगों के दौरान आम लोगों द्वारा बनाए गए अन्य उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को आपस में जोड़कर पूरे घटनाक्रम की एक-एक कड़ी तैयार की।
वायरल वीडियो से खुला राज: खजूरी नाले से जुड़े सभी 11 आरोपित
पुलिस की इस मुस्तैद जांच को सबसे बड़ी और निर्णायक सफलता उस वायरल वीडियो से मिली, जिसमें अंकित शर्मा की नृशंस हत्या के बाद उनके शव को खजूरी नाले में फेंकने का खौफनाक दृश्य कैद था। पुलिस ने इस वीडियो की गहन डिजिटल पड़ताल की और इसे सोशल मीडिया पर सबसे पहले प्रसारित करने वाले तथा वीडियो में दिख रहे संदिग्धों की पहचान की। इन पुख्ता कड़ियों के आधार पर पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता ताहिर हुसैन सहित सभी 11 आरोपितों तक अपनी पहुंच बनाई और उन्हें एक-एक कर सलाखों के पीछे भेजा।
648 पन्नों की चार्जशीट और 6 पूरक दस्तावेजों ने तय की दोषियों की सजा
अदालती कार्यवाही को मुकाम तक पहुंचाने के लिए दिल्ली पुलिस ने 2 जून 2020 को अदालत में 648 पन्नों की एक बेहद विस्तृत और अचूक चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद जैसे-जैसे वैज्ञानिक जांच आगे बढ़ी, पुलिस ने 6 सप्लीमेंट्री (पूरक) चार्जशीट भी कोर्ट के सामने पेश कीं। इन पूरक दस्तावेजों में नए फोरेंसिक साक्ष्य, गवाहों के धारा 164 के तहत दर्ज बयान और अन्य पुख्ता सामग्री शामिल थी। इसी वैज्ञानिक और साक्ष्य आधारित तफ्तीश का नतीजा है कि अदालत ने दोषियों को कड़ा सबक सिखाया, जो यह साबित करता है कि पेशेवर जांच के सामने बड़े से बड़ा अपराधी भी बच नहीं सकता।
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