
अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य तनाव के बीच अब एक नई और खतरनाक ‘पर्यावरणीय जंग’ शुरू हो गई है। सैटेलाइट तस्वीरों से हुए खुलासे ने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया है। ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल हब, खार्क द्वीप (Kharg Island) के पास समुद्र में भारी मात्रा में तेल का रिसाव (Oil Leak) हो रहा है। यह काला और जहरीला तेल अब तेजी से सऊदी अरब, कतर और यूएई के समुद्री तटों की ओर बढ़ रहा है। रक्षा विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि यह रिसाव केवल एक पर्यावरणीय आपदा नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक ‘टाइम बम’ साबित हो सकता है।
खार्क द्वीप: ईरान की लाइफलाइन पर पड़ा बड़ा डेंट
खार्क द्वीप ईरान के कच्चे तेल के निर्यात का मुख्य केंद्र है। यहीं से ईरान का लगभग 90% तेल दुनिया भर में भेजा जाता है। यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) की सैटेलाइट तस्वीरों (Sentinel-1 और Sentinel-2) में देखा गया है कि द्वीप के पश्चिमी तट से काले रंग की लंबी धारियां समुद्र में फैल रही हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अब तक 80,000 बैरल से ज्यादा कच्चा तेल समुद्र में बह चुका है, जो 120 वर्ग किलोमीटर (किसी बड़े शहर के बराबर) से अधिक के क्षेत्र को कवर कर चुका है। हालांकि, ईरान की सरकारी तेल कंपनियों ने इस रिसाव की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है।
सऊदी अरब और पड़ोसियों के लिए बढ़ा खतरा
हवाओं और समुद्री लहरों के रुख को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि अगले 10 से 14 दिनों में यह तेल का सैलाब सऊदी अरब, यूएई और कतर के तटों तक पहुंच सकता है। इससे न केवल समुद्री जीव और मूंगे की चट्टानें (Coral Reefs) नष्ट होंगी, बल्कि खाड़ी देशों के डिसैलिनेशन प्लांट्स (Desalination Plants) पर भी संकट मंडरा सकता है, जो वहां पीने के पानी का मुख्य स्रोत हैं। अगर तेल इन संयंत्रों तक पहुंचता है, तो क्षेत्रीय स्तर पर जल संकट की स्थिति पैदा हो जाएगी।
अमेरिकी नाकेबंदी और ‘फुल स्टोरेज’ की थ्योरी
पश्चिमी मीडिया की मानें तो यह रिसाव एक बड़ी मजबूरी का परिणाम हो सकता है। अमेरिका के साथ जारी युद्ध और नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) के कारण ईरान का तेल निर्यात ठप है। ऐसे में ईरान के पास कच्चे तेल को जमा करने की जगह खत्म हो गई है। चर्चा यह भी है कि स्टोरेज टैंकों के फुल होने और अत्यधिक दबाव के कारण पाइपलाइनों में रिसाव हुआ है। कुछ विश्लेषक इसे बुनियादी ढांचे की खराबी मान रहे हैं, तो कुछ इसे इस युद्धग्रस्त क्षेत्र में एक सोची-समझी रणनीतिक चाल भी बता रहे हैं।
ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर पड़ेगा बुरा असर
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की समुद्री बाधा सीधे वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित करती है। अगर यह रिसाव और बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर आग लग सकती है। सक्रिय युद्ध क्षेत्र (Active War Zone) होने के कारण वर्तमान में समुद्र में सफाई अभियान (Clean-up operation) चलाना भी लगभग नामुमकिन बना हुआ है
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