Commercial Real Estate Boom: विदेशी कंपनियों के दम पर टूटे ऑफिस लीजिंग के सारे रिकॉर्ड, अगले 2 साल में 75% कंपनियां खोलेंगी नए दफ्तर; जानिए पूरा ब्योरा

भारतीय कमर्शियल रियल एस्टेट और ऑफिस स्पेस मार्केट में ऐतिहासिक तेजी का दौर शुरू हो चुका है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत दुनिया की दिग्गज बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के लिए सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन बनकर उभरा है। प्रमुख रियल एस्टेट कंसल्टिंग फर्म सीबीआरई साउथ एशिया (CBRE South Asia) के ताजा सर्वे और मार्केट डेटा ने यह खुलासा किया है कि भारत में काम कर रही हर चार में से तीन कंपनियां यानी लगभग 75 प्रतिशत कॉरपोरेट ऑक्यूपायर्स अगले दो वर्षों के भीतर देश में अपना ऑफिस पोर्टफोलियो और वर्कस्पेस काफी बढ़ाने की तैयारी में हैं। इसके साथ ही चालू वित्तीय वर्ष में ऑफिस स्पेस लीजिंग के सभी पुराने ऑल-टाइम हाई रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए हैं, जिससे देश में बड़े पैमाने पर नए रोजगार और निवेश के अवसर पैदा होने का रास्ता साफ हो गया है।

75% कंपनियों का विस्तार प्लान: 30% से अधिक दायरा बढ़ाने की तैयारी

सीबीआरई द्वारा जारी ऑक्यूपायर सेंटिमेंट सर्वे के अनुसार, कंपनियों के बीच भारत में अपने कारोबार के विस्तार को लेकर आत्मविश्वास नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। सर्वे में शामिल लगभग 30 प्रतिशत कॉरपोरेट कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि वे अपने मौजूदा ऑफिस स्पेस में 30 प्रतिशत से अधिक की बड़ी वृद्धि करने की योजना बना रही हैं। पिछले वर्ष ऐसी आक्रामक विस्तार योजना रखने वाली कंपनियों की संख्या केवल 18 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर लगभग दोगुनी हो चुकी है। इसके अलावा, लगभग 63 प्रतिशत बड़े आकार के कॉरपोरेट ऑक्यूपायर्स अगले 24 महीनों में अपने मौजूदा ऑपरेशंस को कंसोलिडेट करने और नए शहरों में अपनी शाखाएं खोलने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। भारत का कुल ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस स्टॉक पहले ही 1 अरब (1 Billion) वर्ग फुट का विशाल आंकड़ा पार कर चुका है, जो देश के मजबूत कॉरपोरेट बुनियादी ढांचे को दर्शाता है।

ऑफिस लीजिंग का ऑल-टाइम रिकॉर्ड: पहली छमाही में 4.55 करोड़ वर्ग फुट की लीजिंग

ऑफिस स्पेस की मांग में आए इस जबर्दस्त उछाल ने अब तक के सभी पुराने लीजिंग रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही (जनवरी से जून) के दौरान देश के शीर्ष 9 प्रमुख शहरों में कुल ग्रॉस ऑफिस लीजिंग 4.55 करोड़ वर्ग फुट (45.5 Million Sq Ft) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। यह किसी भी वर्ष की पहली छमाही में दर्ज किया गया अब तक का सबसे बड़ा लीजिंग वॉल्यूम है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 10 प्रतिशत से अधिक की ग्रोथ दर्ज करता है। केवल दूसरी तिमाही (अप्रैल से जून) में ही 2.46 करोड़ वर्ग फुट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया गया, जो यह साबित करता है कि विदेशी व घरेलू कंपनियों के बीच प्राइम वर्कस्पेस हासिल करने की होड़ लगी हुई है।

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) बने ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन

भारत में ऑफिस स्पेस की इस अभूतपूर्व मांग के पीछे सबसे बड़ी ताकत ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) बनकर उभरे हैं। कुल ऑफिस लीजिंग में जीसीसी की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 42 से 43 प्रतिशत तक पहुंच गई है। अमेरिका, यूरोप और एशिया-प्रशांत क्षेत्र की फॉर्च्यून 500 कंपनियां अपने जटिल तकनीकी कार्य, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी और एंटरप्राइज लीडरशिप से जुड़े सेंटर्स भारत में स्थापित कर रही हैं। अकेले अमेरिकी कंपनियों ने कुल जीसीसी लीजिंग में 70 प्रतिशत से अधिक का योगदान दिया है। भारत में उपलब्ध उच्च कुशल और तकनीकी प्रतिभा, लागत का अनुकूल अंतर और आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर इन विदेशी फर्मों को आकर्षित करने का सबसे बड़ा कारण है।

कौन से शहर रहे सबसे आगे: बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर और मुंबई की बादशाहत

देश के प्रमुख मेट्रो शहर ऑफिस स्पेस अवशोषण (Absorption) के मुख्य केंद्र बने हुए हैं:

  • बेंगलुरु: देश की सिलिकॉन वैली के नाम से मशहूर बेंगलुरु 29% से अधिक बाजार हिस्सेदारी के साथ देश का सबसे बड़ा ऑफिस मार्केट बना हुआ है। जीसीसी और टेक फर्म्स की पहली पसंद बेंगलुरु के आउटर रिंग रोड और व्हाइटफील्ड इलाके हैं।

  • दिल्ली-एनसीआर: 22% शेयर के साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दूसरे स्थान पर रहा। साइबर सिटी गुरुग्राम, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड और नोएडा एक्सप्रेसवे पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने बड़े ऑफिस स्पेस लॉक किए हैं।

  • मुंबई व हैदराबाद: मुंबई में बीकेसी और अंधेरी बेल्ट में बीएफएसआई (BFSI) और कंसल्टिंग कंपनियों की मांग के दम पर लीजिंग में 33% तक का उछाल देखा गया। वहीं, हैदराबाद और पुणे ने क्रमशः 29% की मजबूत सालाना वृद्धि दर्ज कर आईटी व इंजीनियरिंग कंपनियों को आकर्षित किया है।

ग्रीन सर्टिफाइड और AI-रेडी वर्कस्पेस की मांग में तेजी

आधुनिक कार्यस्थलों की प्राथमिकताओं में भी एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। विदेशी और घरेलू ऑक्यूपायर्स अब पारंपरिक दफ्तरों के बजाय पर्यावरण अनुकूल और ईएसजी (ESG Compliant) प्रमाणित ‘ग्रीन बिल्डिंग्स’ को पहली प्राथमिकता दे रहे हैं। कंपनियों की मांग ऐसे स्मार्ट वर्कस्पेस की है जो पूरी तरह से एआई-रेडी हों, जिनमें अत्याधुनिक वेलनेस सुविधाएं, एनर्जी एफिशिएंट सिस्टम और हाइब्रिड वर्क मॉडल के अनुकूल फ्लेक्सिबल सिटिंग अरेंजमेंट मौजूद हों। इसके साथ ही को-वर्किंग और फ्लेक्सिबल स्पेस ऑपरेटर्स की हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि कंपनियां अपनी लागत और रिस्क मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के लिए फ्लेक्स स्पेस का उपयोग कर रही हैं।

रियल एस्टेट सेक्टर और अर्थव्यवस्था पर दूरगामी असर

ऑफिस स्पेस की रिकॉर्ड मांग के चलते प्रमुख शहरों में कमर्शियल प्रॉपर्टी की खाली जगह (Vacancy Rate) घटकर 14.6% के निचले स्तर पर आ गई है। मांग की तुलना में नई आपूर्ति सीमित होने के कारण ऑफिस रेंटल वैल्यू में 3% से 13% तक की जोरदार बढ़ोतरी देखी जा रही है। रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) और संस्थागत निवेशकों के लिए यह दौर बंपर रिटर्न का अवसर लेकर आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बूम केवल रियल एस्टेट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे लाखों हाई-पेइंग नौकरियां पैदा होंगी, जिससे हाउसिंग, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को भी सीधा बढ़ावा मिलेगा।