
उत्तर प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों (Government Universities) और डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई कर रही मेधावी छात्राओं के लिए एक बेहद शानदार और बड़ी खुशखबरी है। राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Government) ने अपने चुनावी वादे को अमलीजामा पहनाने के लिए ‘रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना’ की रफ्तार बढ़ा दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना के पहले चरण में प्रदेश की करीब 45 हजार मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी देने की तैयारी है।
आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए पात्रता (Eligibility) और मेरिट तय करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद उच्च शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की और काम में देरी को लेकर अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए।
सीएम योगी की अफसरों को फटकार; जल्द गाइडलाइंस बनाने के निर्देश
लोक भवन में हुई उच्च स्तरीय बैठक के दौरान जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्कूटी वितरण को लेकर अब तक तैयार की गई पात्रता, नियमों और रूपरेखा के बारे में पूछा, तो अधिकारियों ने बताया कि इस पर अभी अंतिम नियम और ड्राफ्ट (Draft) पूरी तरह तैयार नहीं हो सका है।
अधिकारियों की इस सुस्ती पर मुख्यमंत्री ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। सीएम योगी ने सख्त लहजे में निर्देश दिए कि बिना किसी देरी के जल्द से जल्द गाइडलाइंस और पात्रता के नियम निर्धारित किए जाएं, ताकि योजना के अगले चरण का काम शुरू हो सके। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी (Transparent) और त्वरित बनाकर मेधावी छात्राओं को जल्द से जल्द स्कूटी का वितरण सुनिश्चित किया जाए।
पहले चरण के लिए ₹400 करोड़ का भारी-भरकम बजट मंजूर
मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद अब उच्च शिक्षा विभाग मुफ्त स्कूटी वितरण के लिए मेरिट का पैमाना तय करने में युद्धस्तर पर जुट गया है।
बजट: राज्य सरकार ने इस योजना के सुचारू संचालन के लिए पहले ही 400 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट स्वीकृत कर रखा है।
लाभार्थी: शिक्षा विभाग के आकलन के अनुसार, इस आवंटित बजट के जरिए पहले चरण में प्रदेश की लगभग 45,000 सबसे मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी दी जा सकती है। हालांकि, लाभार्थियों की अंतिम संख्या पर आखिरी मुहर शासन स्तर से ही लगाई जाएगी।
मेरिट के पैमाने पर मंथन जारी
विभाग इस बात पर गंभीरता से मंथन कर रहा है कि छात्राओं का चयन स्नातक (UG) व स्नातकोत्तर (PG) कक्षाओं में प्रथम वर्ष (First Year) के अंकों के आधार पर किया जाए या फिर अंतिम वर्ष (Final Year) के परीक्षा परिणामों को आधार बनाया जाए। इसके नियम जल्द ही सार्वजनिक किए जाएंगे।
9 लाख छात्राओं में से होगा भाग्यशाली मेधावियों का चयन
मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के विभिन्न सरकारी और सहायता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थानों में स्नातक स्तर पर करीब 9 लाख छात्राएं नामांकित (Enrolled) हैं। इन सभी छात्राओं के डेटा में से कड़ी स्क्रीनिंग और राज्य स्तरीय मेरिट लिस्ट के जरिए ही भाग्यशाली मेधावियों का चुनाव किया जाएगा।
योजना का मुख्य उद्देश्य: योगी सरकार की इस योजना का मुख्य उद्देश्य न केवल बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना और आगे बढ़ाना है, बल्कि कॉलेज आने-जाने के सफर में उन्हें आत्मनिर्भर, गतिशील और सुरक्षित बनाना भी है। शासन से अंतिम ड्राफ्ट को हरी झंडी मिलते ही विभाग द्वारा ऑनलाइन आवेदन और कॉलेजों के जरिए डेटा जुटाने का काम आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया जाएगा।
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