
उत्तराखंड के चंपावत जिले में बुधवार को सामने आए कथित सामूहिक दुष्कर्म कांड ने अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। जिस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था और जिसे लेकर सियासत गरमा गई थी, उसे पुलिस ने पूरी तरह से ‘फर्जी’ और एक ‘गहरा षड्यंत्र’ करार दिया है। चंपावत की पुलिस अधीक्षक (SP) रेखा यादव ने खुलासा किया है कि भाजपा नेता और अग्निवीर को फंसाने के लिए बदले की भावना से यह पूरी साजिश रची गई थी। खुद पीड़िता ने भी कोर्ट में बयान देकर गैंगरेप की घटना से साफ इनकार कर दिया है।
बदले की भावना और रंजिश: पूर्व BDC सदस्य ने बुना जाल
एसपी रेखा यादव के अनुसार, इस पूरे कांड का मास्टरमाइंड सल्ली गांव का पूर्व बीडीसी सदस्य कमल रावत है। पुलिस का दावा है कि कमल रावत की आरोपियों के साथ पुरानी रंजिश थी, जिसे भुनाने के लिए उसने 16 वर्षीय किशोरी और उसके पिता को प्रलोभन दिया। कमल ने पीड़िता के पिता के इलाज और अन्य मदद का झांसा देकर उन्हें इस झूठी कहानी का हिस्सा बनाया। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य तकनीकी जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी घटना के समय वहां मौजूद ही नहीं थे।
कोर्ट में पीड़िता का यू-टर्न: ‘नहीं हुआ मेरे साथ गलत’
पुलिस के खुलासे के बीच सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब पीड़िता को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। धारा 164 के तहत दर्ज बयानों में किशोरी ने स्पष्ट किया कि आरोपियों का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. देवेश चौहान ने बताया कि मेडिकल जांच में पीड़िता के शरीर पर किसी भी तरह की बाहरी या अंदरूनी चोट के निशान नहीं मिले हैं। मेडिकल रिपोर्ट ने भी दुष्कर्म के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
कांग्रेस की फजीहत: भाजपा ने मांगा शर्मनाक रवैये पर जवाब
इस खुलासे के बाद कांग्रेस की जमकर फजीहत हो रही है। घटना सामने आने के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने सरकार पर तीखे हमले किए थे और प्रदेश भर में प्रदर्शन का ऐलान किया था। अब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने पलटवार करते हुए कहा है कि कांग्रेस ने बिना किसी सबूत के भाजपा कार्यकर्ताओं को बदनाम करने की कोशिश की है। उन्होंने इसे कांग्रेस का शर्मनाक रवैया बताते हुए माफी की मांग की है।
कोर्ट परिसर में हंगामा: कमल रावत को पुलिस ने उठाया
गुरुवार को पुलिस ने साजिश के मुख्य आरोपी कमल रावत को जिला न्यायालय परिसर से हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई का अधिवक्ताओं ने कड़ा विरोध किया। चम्पावत बार संघ के पूर्व अध्यक्ष राम सिंह बिष्ट का कहना है कि पुलिस ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन किया है। अधिवक्ताओं का दावा है कि कमल रावत केवल पीड़िता की मदद कर रहा था और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ उन्होंने जिला जज को पत्र सौंपा है।
क्या था कथित मामला?
बुधवार को सल्ली गांव के एक सुनसान घर में 16 वर्षीय किशोरी निर्वस्त्र और हाथ-पैर बंधी अवस्था में मिली थी। पीड़िता के पिता के बयान पर पुलिस ने भाजपा नेता समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इस घटना के बाद पूरे उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे, लेकिन पुलिस की त्वरित जांच ने 24 घंटे के भीतर ही मामले की हकीकत सामने रख दी
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