पटना: बिहार की सियासत में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के मंत्रिमंडल का भव्य विस्तार शुक्रवार को संपन्न हुआ। राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की गरिमामयी उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। राज्यपाल ने भाजपा, जदयू, लोजपा-आर, ‘हम’ और रालोमो के कुल 32 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
कैबिनेट का गणित: 35 मंत्रियों के साथ ‘सम्राट’ की नई टीम तैयार
इस विस्तार के साथ ही बिहार सरकार में मंत्रियों की कुल संख्या अब 35 हो गई है। इसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, दो उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के अलावा नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार भी शामिल हैं। गौरतलब है कि बिहार विधानसभा की क्षमता के अनुसार अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। भाजपा ने अपने कोटे की सभी 16 सीटों को भर लिया है, जबकि जदयू ने 15 मंत्री बनाकर एक पद भविष्य के लिए सुरक्षित रखा है।
पुराने चेहरों पर भरोसा और नए चेहरों को मौका
कैबिनेट विस्तार में अनुभव और जोश का अनूठा संगम देखने को मिला है। 32 नए मंत्रियों में से 19 ऐसे हैं जो पिछली सरकार में भी मंत्री रह चुके थे। वहीं, 13 नए चेहरों को पहली बार लालबत्ती नसीब हुई है।
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भाजपा का दांव: भाजपा ने बड़े चेहरों जैसे मंगल पांडेय और सुरेंद्र मेहता को इस बार मौका नहीं दिया है। उनकी जगह मिथिलेश तिवारी, रामचंद्र प्रसाद और इंजीनियर शैलेंद्र जैसे नए चेहरों को तरजीह दी गई है।
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जदयू की रणनीति: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के अलावा बुलो मंडल और श्वेता गुप्ता पहली बार मंत्री बने हैं। वहीं, भगवान सिंह कुशवाहा जैसे दिग्गजों की कैबिनेट में वापसी हुई है।
जातिगत समीकरण: सवर्णों और ओबीसी का खास ख्याल
सम्राट चौधरी की कैबिनेट में सोशल इंजीनियरिंग का पूरा ध्यान रखा गया है।
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राजपूत: सबसे ज्यादा 4 मंत्री राजपूत समाज से बनाए गए हैं।
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कोइरी और भूमिहार: कोइरी (कुशवाहा) और भूमिहार समाज से 3-3 मंत्री बनाए गए हैं, जिसमें स्वयं सीएम सम्राट चौधरी कोइरी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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अन्य वर्ग: यादव, ब्राह्मण, कुर्मी, धानुक और दलित समुदायों से 2-2 मंत्री लेकर संतुलन साधने की कोशिश की गई है। साथ ही, अल्पसंख्यक कोटे से एक मुस्लिम मंत्री को भी कैबिनेट में जगह मिली है।
क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व: मिथिला और अंग का बढ़ा कद
भौगोलिक दृष्टि से देखें तो इस बार मिथिलांचल और अंग प्रदेश का कद कैबिनेट में बढ़ गया है।
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मधुबनी और वैशाली: इन दोनों जिलों से सबसे अधिक 3-3 मंत्री बनाए गए हैं।
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जमुई का रिकॉर्ड: जमुई जिले के एक ही गांव के दो पड़ोसी, दामोदर रावत और श्रेयसी सिंह, अब एक साथ कैबिनेट में बैठेंगे।
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पिछड़े जिले: हालांकि, क्षेत्रीय असंतुलन की झलक भी दिखी है, जहां राज्य के 38 में से 14 जिलों को मंत्रिमंडल में कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका है।
मगध को नुकसान, तिरहुत और कोसी को मिला लाभ
पिछली सरकार की तुलना में मगध क्षेत्र की हिस्सेदारी कम हुई है (7 से घटकर 6), जबकि तिरहुत और शाहाबाद में मंत्रियों की संख्या बढ़ी है। अंग क्षेत्र, जहां से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी स्वयं आते हैं, वहां मंत्रियों की संख्या 3 से बढ़कर 6 हो गई है, जो इस क्षेत्र के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है।
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