मिडिल ईस्ट संकट का बड़ा असर! सऊदी अरब ने पश्चिमी कंपनियों के नए कॉन्ट्रैक्ट्स किए सस्पेंड, भुगतान भी रोका

अमेरिका-ईरान के बीच गहराते संघर्ष और पूरे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में फैले गंभीर भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर अब वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। खाड़ी क्षेत्र के सबसे शक्तिशाली देश सऊदी अरब ने अपनी सीमाओं के भीतर काम कर रही बड़ी पश्चिमी परामर्श (Consulting) कंपनियों के साथ होने वाले सभी नए अनुबंधों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही सरकार ने इन फर्मों को किए जाने वाले कई महत्वपूर्ण भुगतानों को भी बीच में ही रोक दिया है। सूत्रों के मुताबिक, बढ़ते वित्तीय घाटे और कच्चे तेल की आय में आई अनिश्चितता से निपटने के लिए रियाद को यह सख्त और अप्रत्याशित कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

होर्मुज स्ट्रेट संकट और चरमराई वैश्विक सप्लाई चेन

वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस पूरे संकट की जड़ें हालिया सैन्य तनाव से जुड़ी हुई हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग तीन महीने तक चले अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष ने रणनीतिक रूप से बेहद खास होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से होकर गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी और व्यापारिक मार्गों को बुरी तरह से ठप कर दिया था। इसके परिणामस्वरूप वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में अचानक भारी उछाल आया, दुनिया भर की आपूर्ति श्रृंखलाएं (Supply Chains) पूरी तरह से बाधित हो गईं और कई देशों में आवश्यक वस्तुओं की भारी किल्लत पैदा हो गई। इसी आर्थिक झटके से अपने बजट को बचाने के लिए सऊदी अरब को यह फैसला लेना पड़ा है।

मैकिन्से और बीसीजी जैसी दिग्गज वैश्विक कंपनियों को लगा झटका

जैसे ही खाड़ी क्षेत्र में यह संघर्ष तेज हुआ, सऊदी सरकार ने गुपचुप तरीके से नए कमर्शियल अनुबंधों पर रोक लगा दी। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मैकिन्से (McKinsey), बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) और दुनिया की प्रतिष्ठित ‘बिग फोर’ (Big Four) अकाउंटिंग-एडवाइजरी कंपनियों समेत कई प्रमुख कंसल्टिंग फर्मों के शीर्ष अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है। हालांकि रियाद प्रशासन ने इसकी कोई औपचारिक या सार्वजनिक घोषणा नहीं की है, लेकिन पर्दे के पीछे सभी कंपनियों को स्पष्ट संकेत दे दिए गए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उन्हें साफ कह दिया गया है कि जुलाई तक कोई नया भुगतान नहीं किया जाएगा, जबकि एक अन्य अधिकारी के अनुसार सभी नए समझौतों और पुराने बिलों के निपटारे संबंधी बड़े फैसले साल की दूसरी तिमाही के अंत तक के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिए गए हैं।

क्राउन प्रिंस के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘विजन 2030’ पर मंडराया संकट!

रक्षा और आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अत्यंत महत्वाकांक्षी और बहुचर्चित ‘विजन 2030’ (Vision 2030) योजना के तहत सरकारी खर्च को सख्त नियंत्रण में रखने का एक आपातकालीन प्रयास है। इस दूरगामी योजना का मुख्य उद्देश्य सऊदी अर्थव्यवस्था की तेल पर पारंपरिक निर्भरता को खत्म करना, आर्थिक विविधीकरण को बढ़ावा देना और देश को वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बनाना है। हालांकि, ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक किए जाने की निरंतर धमकी के कारण अब सऊदी अरब को अपने नेशनल डिफेंस बजट और लाल सागर (Red Sea) के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर अप्रत्याशित रूप से अतिरिक्त निवेश करना पड़ रहा है, जिससे उसके राष्ट्रीय बजट पर भारी दबाव आ गया है।

सऊदी वित्त मंत्रालय ने दावों पर क्या दी सफाई?

इस पूरे विवाद और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चल रही खबरों के बीच सऊदी अरब के वित्त मंत्रालय ने इन दावों को आंशिक रूप से खारिज करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है। मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि सऊदी सरकार अपनी सभी निवेश योजनाओं और विदेशी परामर्श सेवाओं से ‘विजन 2030’ के रणनीतिक लक्ष्यों के अनुरूप एक स्पष्ट और निश्चित रिटर्न सुनिश्चित करती है। मंत्रालय ने अपने आर्थिक रिकॉर्ड का बचाव करते हुए यह दावा भी किया कि वर्ष 2026 में देश के लगभग 99.5 प्रतिशत व्यावसायिक बिलों का भुगतान तय समयसीमा के भीतर ही पूरी ईमानदारी से किया गया था।

युद्धविराम के बावजूद मिडिल ईस्ट में तनाव अभी भी बरकरार

गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए भीषण सैन्य टकराव के बाद हालांकि ईरान और अमेरिका के बीच एक अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) तो हो गया है, लेकिन दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत पूरी तरह से ठप्प पड़ी हुई है। ईरान ने अभी भी होर्मुज स्ट्रेट को प्रभावी रूप से अपने नियंत्रण में ले रखा है, जिससे जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। अप्रैल में हुए युद्धविराम के बावजूद जमीनी स्तर पर तनाव रत्ती भर भी कम नहीं हुआ है। ईरान ने हाल ही में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समेत कई खाड़ी देशों पर पिछले दिनों हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों में परोक्ष रूप से शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया है, जिसे खाड़ी देशों के संगठन ने सिरे से पूरी तरह खारिज कर दिया है।