Bengal Election: दूसरों के घरों में बर्तन मांजने वाली कलिता माजी अब बन गईं विधायक अमित शाह ने बजाई तालियां

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने न केवल राज्य की सत्ता बदली है, बल्कि लोकतंत्र की उस ताकत को भी दुनिया के सामने रखा है जहां एक साधारण ‘कामवाली बाई’ प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत यानी विधानसभा तक पहुंच गई। औसग्राम (सुरक्षित) सीट से भाजपा की टिकट पर जीत दर्ज करने वाली कलिता माजी (Kalita Majhi) की सफलता की गूंज अब पूरे देश में है। खुद गृह मंत्री अमित शाह ने उनकी इस जीत की सराहना की है, जिसे सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।

मात्र 2500 रुपये महीने पर करती थीं दूसरों के घरों में काम

कलिता माजी की कहानी संघर्ष और अदम्य साहस की मिसाल है। विधायक बनने से पहले तक कलिता पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले में करीब पांच-छह घरों में बर्तन मांजने और साफ-सफाई का काम करती थीं। इस काम से उन्हें महीने के मात्र 2500 रुपये मिलते थे। बेहद गरीबी में पली-बढ़ीं कलिता के पति प्लंबर का काम करते हैं। आर्थिक तंगी के कारण वह खुद अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सकी थीं, लेकिन आज उनकी इसी मेहनत ने उन्हें सत्ता के शिखर पर पहुंचा दिया है।

अमित शाह ने मंच से दी शाबाशी, कार्यकर्ताओं में जोश

कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जब कलिता माजी के नाम का जिक्र हुआ, तो गृह मंत्री अमित शाह ने खुद उनके संघर्ष को सलाम किया। शाह ने तालियां बजाते हुए कहा कि भाजपा एक ऐसी पार्टी है जो जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को पहचानती है। कलिता की जीत यह बताती है कि अब बंगाल की राजनीति में बड़े घरानों का नहीं, बल्कि गरीबों और मेहनतकशों का बोलबाला होगा। इस दौरान कलिता भी भावुक नजर आईं और उन्होंने अपनी जीत को उन सभी महिलाओं को समर्पित किया जो अभावों में भी हार नहीं मानतीं।

‘मैं उन्हीं की आवाज बनूंगी जिनके घर मैंने झाड़ू-पोछा किया’

अपनी जीत के बाद कलिता माजी ने बेहद सादगी से कहा, “मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं कभी विधायक बनूंगी। मैं आज भी वही कलिता हूं। विधानसभा में मैं उन गरीबों, मजदूरों और घरेलू सहायिकाओं की आवाज बनूंगी जिनकी परेशानियां कोई नहीं सुनता। मैं चाहती हूं कि मेरे क्षेत्र के हर बच्चे को वो शिक्षा मिले जिससे मैं वंचित रह गई।” कलिता ने औसग्राम सीट पर तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार को 12,535 से अधिक मतों के अंतर से शिकस्त दी है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई ‘इच्छाशक्ति’ की दास्तां

कलिता की जीत की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड कर रही है। लोग उन्हें ‘बंगाल की बेटी’ और ‘असली जननायक’ बता रहे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान भी उनकी सादगी ने लोगों का दिल जीत लिया था, जब वह पैदल ही गलियों में जाकर लोगों से वोट मांगती थीं। उनकी यह जीत यह भी दर्शाती है कि राजनीति में अब धनबल और बाहुबल के बजाय सेवाभाव और ईमानदारी की जीत होने लगी है।