
भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों ने न केवल आम जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि हमारी आंखों की सेहत पर भी बुरा असर डालना शुरू कर दिया है। अस्पतालों के ओपीडी में इन दिनों आंखों के संक्रमण (Eye Infection) के मरीजों की संख्या में भारी उछाल देखा जा रहा है। धूल, तेज धूप और पसीने के कारण ‘कंजंक्टिवाइटिस’ (Conjunctivitis) और ‘ड्राई आई’ (Dry Eye) जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। अगर आपकी आंखों में भी हल्का सा दर्द या चुभन महसूस हो रही है, तो इसे सामान्य मानकर छोड़ने की गलती न करें, क्योंकि यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
इन 5 लक्षणों को कभी न करें इग्नोर, हो सकता है संक्रमण
आई स्पेशलिस्ट्स के अनुसार, आंखों के संक्रमण की शुरुआत बहुत सामान्य लक्षणों से होती है। यदि आपको नीचे दिए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत सावधान हो जाएं:
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आंखों का लाल होना: बिना किसी चोट के आंखों का सफेद हिस्सा गुलाबी या लाल दिखने लगना।
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लगातार खुजली और जलन: आंखों को बार-बार मलने की इच्छा होना और जलन महसूस होना।
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चिपचिपा पदार्थ निकलना: सुबह सोकर उठने पर आंखों का कीचड़ से चिपका होना या पीला डिस्चार्ज निकलना।
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धुंधला दिखाई देना: आंखों में भारीपन महसूस होना और दृष्टि में हल्का धुंधलापन आना।
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प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता: तेज रोशनी या धूप में जाने पर आंखों में तेज दर्द या पानी आना।
क्यों बढ़ जाते हैं गर्मियों में आंखों के रोग?
गर्मी के मौसम में आई इन्फेक्शन बढ़ने के पीछे कई मुख्य कारण हैं। तेज अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें सीधे तौर पर कॉर्निया को नुकसान पहुंचाती हैं। इसके अलावा, स्विमिंग पूल का क्लोरीन युक्त पानी भी आंखों में इन्फेक्शन पैदा कर सकता है। हवा में उड़ती धूल और एलर्जी पैदा करने वाले कण (Pollens) आंखों की झिल्ली को प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब हम गंदे हाथों से आंखों को छूते हैं, तो बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं, जो ‘आई फ्लू’ का मुख्य कारण बनते हैं।
आई इन्फेक्शन से बचने के लिए डॉक्टर की खास सलाह
आंखों को सुरक्षित रखने के लिए लाइफस्टाइल में ये छोटे बदलाव बहुत जरूरी हैं:
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सनग्लासेस का उपयोग: बाहर निकलते समय हमेशा अच्छी क्वालिटी के UV प्रोटेक्टेड चश्मे पहनें।
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ठंडे पानी से सिकाई: दिन में 3-4 बार आंखों को ताजे और साफ पानी से धोएं।
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कॉन्टैक्ट लेंस से परहेज: संक्रमण के दौरान या स्विमिंग करते समय कॉन्टैक्ट लेंस न पहनें।
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साफ-सफाई का ध्यान: अपना तौलिया, रुमाल और आई-मेकअप किसी के साथ शेयर न करें।
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खुद न बनें डॉक्टर: आंखों में कोई भी दिक्कत होने पर खुद से ‘स्टेरॉयड’ वाली आई ड्रॉप्स न डालें, यह आंखों की रोशनी के लिए खतरनाक हो सकता है। हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही दवा लें।
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