
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में हुए बहुचर्चित चढ़ावा चोरी कांड (Ayodhya Ram Mandir Donations Theft) के बाद मचे देशव्यापी हड़कंप के बीच ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ ने अपनी पूरी कार्यप्रणाली और सांगठनिक ढांचे को बदलने की कवायद शुरू कर दी है. मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता, सुरक्षा और शुचिता को बहाल करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर बड़े और कड़े फैसले लिए जा रहे हैं.
इस कड़ी में सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों के इस्तीफे मंजूर कर लिए गए हैं और पूरी व्यवस्था को डिजिटल व पारदर्शी बनाने की तैयारी कर ली गई है.
चंपत राय और अनिल मिश्रा की विदाई; ट्रस्ट की वेबसाइट अपडेट
चढ़ावा चोरी विवाद के सामने आने के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने वाले ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे आधिकारिक तौर पर मंजूर कर लिए गए हैं.
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नाम और तस्वीरें हटीं: ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट को पूरी तरह से अपडेट कर दिया गया है. चंपत राय और अनिल मिश्रा के नाम, फोटो और उनके अन्य सभी विवरण साइट से हटा दिए गए हैं.
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अब बचे सिर्फ 12 सदस्य: 15 सदस्यीय इस प्रतिष्ठित ट्रस्ट में से अब केवल 12 पदाधिकारियों और सदस्यों का विवरण ही वेबसाइट पर दर्ज है. इनमें ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, अंतरिम महासचिव कृष्णमोहन, कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी और अन्य पदेन व नामित सदस्य (जैसे नृपेंद्र मिश्रा, आईएएस संजय प्रसाद और अयोध्या के डीएम शशांक त्रिपाठी) शामिल हैं.
22 जुलाई को नई टीम का एलान; रिक्त पदों पर नियुक्तियों की रेस
राम मंदिर ट्रस्ट में सांगठनिक बदलावों का दौर बेहद तेज हो चुका है और आगामी 22 जुलाई 2026 को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में कई बड़े एलान होने वाले हैं:
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महासचिव पद पर औपचारिक मुहर: सूत्रों के अनुसार, 6 जुलाई की बैठक में अंतरिम महासचिव बनाए गए डॉ. कृष्णमोहन आगामी 22 जुलाई को औपचारिक तौर पर इस बड़ी जिम्मेदारी को संभाल सकते हैं. इसी बैठक में उनके नाम पर अंतिम मुहर लगेगी.
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अयोध्या राजपरिवार की एंट्री: खाली पड़े तीन पदों को भरने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. चर्चा है कि अयोध्या राजपरिवार के सदस्य यतींद्र मोहन मिश्र को सदस्य के रूप में ट्रस्ट में शामिल किया जा सकता है.
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संतों को मिलेगी जगह: ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी गोपाल राव लगातार अयोध्या के विभिन्न मठ-मंदिरों (जैसे श्रीरामबल्लभाकुंज, हरिधाम गोपाल पीठ) का दौरा कर संतों से मुलाकात कर रहे हैं. अयोध्या के किसी प्रमुख संत— जैसे जगद्गुरु वासुदेवाचार्य, महंत मिथिलेश नंदिनी शरण या अधिकारी राजकुमार दास को भी ट्रस्ट की नई टीम में शामिल किया जा सकता है.
बड़ा फैसला: दानदाताओं को चढ़ावा वापस लौटाने पर विचार!
चोरी का मामला उजागर होने के बाद कई बड़े श्रद्धालुओं और दानदाताओं ने आरोप लगाया था कि उनके द्वारा भेंट की गई मूल्यवान वस्तुओं (सोने-चांदी की कलाकृतियों) की न तो कोई रसीद दी गई और न ही उन्हें गर्भगृह में सुरक्षित रखा गया.
जगह की कमी मुख्य कारण: इन गंभीर आरोपों के बीच ट्रस्ट अब श्रद्धालुओं द्वारा भेंट की गई इन मूल्यवान वस्तुओं को वापस लौटाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. ट्रस्ट का मानना है कि गर्भगृह के भीतर इतनी बड़ी संख्या में सोने-चांदी या अन्य कीमती धातुओं की कलाकृतियों को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त जगह (Space) उपलब्ध नहीं है.
पारदर्शिता के लिए अब वेबसाइट पर दिखेगा ‘पाई-पाई का हिसाब’
भविष्य में ऐसी किसी भी वित्तीय अनियमितता या चोरी को रोकने के लिए ट्रस्ट ने पूरी तरह से पारदर्शी (Transparent) व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है. अब राम मंदिर को मिलने वाले दान का पूरा लेखा-जोखा हर महीने ट्रस्ट की वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाएगा:
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क्या-क्या होगा शामिल: दानपात्रों (हुंडी), दान काउंटरों से होने वाली नकद आय, विदेशी मुद्रा अधिनियम (FCRA) के खातों में आने वाली विदेशी रकम और विभिन्न बैंकों से मिलने वाले ब्याज का पूरा ब्यौरा हर महीने वेबसाइट पर अपडेट रहेगा.
इन 5 प्रमुख समितियों में होगा बड़ा फेरबदल
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की आगामी बैठक में मंदिर के सुचारू और सुरक्षित संचालन के लिए गठित पांचों मुख्य समितियों का पुनर्गठन किया जाएगा और नए चेहरों की एंट्री होगी:
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निर्माण समिति (Construction Committee)
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वित्त समिति (Finance Committee)
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ऑडिट समिति (Audit Committee)
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धार्मिक समिति (Religious Committee)
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मैनेजिंग समिति (Managing Committee)
इसके अलावा, सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए राम मंदिर कंट्रोल रूम में भी बड़ा फेरबदल करते हुए पुराने कर्मियों की छुट्टी कर दी गई है और नई टीम ने परिसर में एंट्री की कमान संभाल ली है. एसआईटी (SIT) की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि चोरी का मुख्य आरोपी एक दागी अतीत वाला व्यक्ति है जो पहले बैंक से भी बर्खास्त हो चुका था.
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