
वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों के चलते आज एशियाई शेयर बाजारों (Asian Stock Markets) में तेज दबाव और चौतरफा बिकवाली देखने को मिल रही है। अमेरिकी बाजार वॉल स्ट्रीट (Wall Street) में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान टेक शेयरों में आई तेज गिरावट, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में अचानक उछाल और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के असर से एशियाई इंडेक्स लाल निशान में फिसल गए हैं। जापान के बेंचमार्क इंडेक्स निक्केई 225 और दक्षिण कोरिया के कोस्पी में सबसे ज्यादा कमजोरी दर्ज की गई है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आगामी आर्थिक आंकड़ों को लेकर निवेशकों के सतर्क रुख के कारण बाजार में ‘रिस्क-ऑफ’ (Risk-off) माहौल बना हुआ है।
वॉल स्ट्रीट में बिकवाली और बॉन्ड यील्ड की उछाल से बिगड़ा सेंटिमेंट
अमेरिकी बाजारों में डाओ जोंस, नैस्डैक और एसएंडपी 500 में पिछले सत्र में मुनाफावसूली और आईटी सेक्टर में बिकवाली देखी गई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर भविष्य की नीतियों और महंगाई के आंकड़ों से पहले निवेशकों ने हाई-वैल्यूएशन वाले टेक और सेमीकंडक्टर शेयरों में अपनी पोजीशन हल्की की है। इसके साथ ही, अमेरिकी 10-वर्षीय और 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में दोबारा आई मजबूती ने इक्विटी मार्केट से लिक्विडिटी के दबाव को बढ़ा दिया है। जब भी यूएस बॉन्ड यील्ड चढ़ती है, विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) उभरते और एशियाई बाजारों से पूंजी निकालकर सुरक्षित बॉन्ड मार्केट की ओर रुख करते हैं, जिसका सीधा असर एशियाई सूचकांकों पर साफ नजर आ रहा है।
निक्केई और कोस्पी में गिरावट: चिप और टेक शेयरों पर मार
एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में बिकवाली का दायरा काफी व्यापक बना हुआ है:
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जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225): टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निक्केई लगभग 1% तक लुढ़ककर कारोबार कर रहा है। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और एक्सपोर्ट ओरिएंटेड ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव सबसे अधिक देखा जा रहा है। जापानी येन में उतार-चढ़ाव और घरेलू महंगाई के आंकड़ों ने भी ट्रेडर्स की सतर्कता बढ़ा दी है।
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दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI): दक्षिण कोरियाई शेयर बाजार में टेक दिग्गज और मेमोरी चिप निर्माताओं में कमजोरी के चलते कोस्पी 1% से अधिक की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा है, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स ‘कोस्डैक’ (Kosdaq) में 2% से अधिक की भारी फिसलन दर्ज की गई है।
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चीन और हांगकांग के बाजार: हांगकांग का हैंग सेंग (Hang Seng) इंडेक्स और चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स भी सुस्त और सीमित दायरे में लाल निशान के साथ कारोबार कर रहे हैं।
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ऑस्ट्रेलियाई शेयर बाजार: ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 इंडेक्स भी कमोडिटी और माइनिंग शेयरों में दबाव के कारण कमजोर बना हुआ है।
कच्चे तेल में उछाल और भू-राजनीतिक तनाव ने बढ़ाई चिंता
शेयर बाजार में गिरावट की एक अन्य प्रमुख वजह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई अचानक तेजी है। पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितता और ईरान पर सख्त प्रतिबंधों की घोषणाओं के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उछाल आया है। एशियाई अर्थव्यवस्थाएं (विशेषकर भारत, जापान और दक्षिण कोरिया) अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल के आयात पर निर्भर हैं। महंगा क्रूड आयात बिल को बढ़ाता है, जिससे मुद्रास्फीति का खतरा पैदा होता है और केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरें ऊंची रखने का दबाव बना रहता है।
भारतीय शेयर बाजार (GIFT Nifty) पर क्या है असर
एशियाई बाजारों में मचे इस कोहराम का असर भारतीय बाजारों के शुरुआती संकेतों पर भी देखने को मिल रहा है। गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) शुरुआती कारोबार में सुस्त और नकारात्मक रुझान दर्शा रहा है, जो घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स—निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स—के लिए एक सतर्क या कमजोर शुरुआत का संकेत देता है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की मजबूत खरीदारी और कंपनियों के बेहतर घरेलू आउटलुक से बाजार को निचले स्तरों पर सहारा मिलने की उम्मीद है।
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