पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के संकट और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने की भावुक अपील की है। पीएम की इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए एनडीए के सहयोगी दल शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद मिलिंद देवड़ा ने सरकार को एक ‘मास्टर प्लान’ सुझाया है। देवड़ा का दावा है कि यदि संसदीय समितियों की बैठकों को वर्चुअल (Online) कर दिया जाए, तो सरकारी खजाने के सालाना 100 करोड़ रुपये बचाए जा सकते हैं।
पीएम मोदी की अपील और वर्क फ्रॉम होम पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को हैदराबाद में देश को संबोधित करते हुए ईंधन संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया था। उन्होंने सुझाव दिया कि हमें एक बार फिर ‘वर्क फ्रॉम होम’ की संस्कृति को अपनाना चाहिए और गैर-जरूरी विदेश यात्राओं में कटौती करनी चाहिए। पीएम ने यह अपील ईरान-इजरायल तनाव के चलते वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका के मद्देनजर की है।
सांसदों के दिल्ली दौरे पर खर्च होते हैं करोड़ों
राज्यसभा सांसद मिलिंद देवड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि जब संसद का सत्र नहीं चल रहा हो, तब संसदीय समितियों और पीएसयू (PSU) रिव्यू मीटिंग्स को ऑनलाइन आयोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि इन बैठकों के लिए देशभर से सांसदों को दिल्ली बुलाने में यात्रा और ठहरने पर भारी भरकम सरकारी पैसा खर्च होता है। बैठकों के डिजिटल होने से न केवल 100 करोड़ रुपये की बचत होगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी, जो पर्यावरण के लिए भी सुखद होगा।
क्या है संसदीय समितियों का गणित?
भारत में वर्तमान में 24 विभागों से संबंधित संसदीय समितियां कार्यरत हैं। प्रत्येक समिति में कुल 31 सदस्य होते हैं, जिनमें 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा के सांसद शामिल हैं। ये समितियां मंत्रालयों के कामकाज, बजट आवंटन और महत्वपूर्ण विधेयकों की समीक्षा करती हैं। इन 700 से अधिक सांसदों की बार-बार होने वाली दिल्ली यात्रा और बैठकों के आयोजन का खर्च काफी बड़ा होता है, जिसे देवड़ा ने ‘ऑनलाइन’ विकल्प के जरिए कम करने का सुझाव दिया है।
होर्मुज स्ट्रेट का संकट और भारत की स्थिति
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ईरान के साथ जारी तनाव के कारण ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Hormuz Strait) के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है, जो वैश्विक तेल व्यापार का मुख्य मार्ग है। पड़ोसी देश पाकिस्तान और श्रीलंका पहले ही ईंधन संकट के कारण कड़ी पाबंदियां लगा चुके हैं। हालांकि, भारत के पास मजबूत ‘स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ है, जिसके कारण अभी तक पाबंदी की नौबत नहीं आई है, लेकिन भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए सरकार अब एहतियाती कदम उठा रही है।
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