
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक ऐसा खुलासा किया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और डिजिटल दुनिया में हलचल मचा दी है। नेतन्याहू का दावा है कि पाकिस्तान, अमेरिका और इजरायल के दशकों पुराने मजबूत रिश्तों में दरार डालने के लिए एक खतरनाक ‘शैडो कैंपेन’ (गुप्त अभियान) चला रहा है। इस खुलासे के बाद अब युद्ध का मैदान सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म्स पर भी शिफ्ट हो गया है।
पाकिस्तान के बेसमेंट और फर्जी ‘टेक्सास निवासी’ का सच
हाल ही में सीबीएस न्यूज के प्रसिद्ध कार्यक्रम ’60 मिनट्स’ को दिए एक इंटरव्यू में बेंजामिन नेतन्याहू ने इस ‘डिजिटल बैटलफील्ड’ की परतें खोलीं। उन्होंने बताया कि किस तरह दुनिया भर के युवाओं, खासकर अमेरिकियों के मन में इजरायल के प्रति नफरत भरने का काम किया जा रहा है। नेतन्याहू ने एक चौंकाने वाला उदाहरण देते हुए कहा कि अक्सर अमेरिकी लोगों को ऐसे मैसेज मिलते हैं जिसमें भेजने वाला खुद को टेक्सास या अमेरिका के किसी अन्य राज्य का नागरिक बताता है। मैसेज में लिखा होता है कि वह पहले इजरायल का समर्थक था, लेकिन अब उसकी नीतियों से दुखी होकर खिलाफ हो गया है। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि जब इन मैसेजेस के आईपी एड्रेस (IP Address) की जांच की गई, तो उनकी लोकेशन अमेरिका नहीं, बल्कि पाकिस्तान का कोई बेसमेंट निकली।
सोशल मीडिया बना युद्ध का ‘8वां मोर्चा’
इजरायली पीएम ने इस स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए इसे ‘आठवां मोर्चा’ करार दिया है। उनके अनुसार, इजरायल वर्तमान में कई मोर्चों पर हथियारों से युद्ध लड़ रहा है, लेकिन सोशल मीडिया और मीडिया के जरिए लड़ा जा रहा यह ‘इनफॉर्मेशन वॉर’ सबसे चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान जैसे देश ‘बॉट फार्म्स’ और फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए प्रोपेगेंडा फैला रहे हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अमेरिका में इजरायल के प्रति सहानुभूति को खत्म करना और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गठबंधन को कमजोर करना है। नेतन्याहू ने यह भी संकेत दिया कि इस खेल में कई अन्य देश भी शामिल हो सकते हैं, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान के नाम का प्रमुखता से उल्लेख किया।
मध्यस्थ की भूमिका और पर्दे के पीछे का खेल
गौरतलब है कि पाकिस्तान और इजरायल के बीच कोई औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं हैं। पाकिस्तान लगातार गाजा और ईरान के मसले पर इजरायल की खुलकर आलोचना करता रहा है। हालांकि, हाल के दिनों में पाकिस्तान ने खुद को ईरान और अमेरिका-इजरायल विवाद के बीच एक मध्यस्थ के रूप में दिखाने की कोशिश की थी। लेकिन नेतन्याहू के इस ताजा बयान ने पाकिस्तान की उस छवि पर सवालिया निशान लगा दिया है। इस दावे से यह साफ हो गया है कि आज के दौर में कीबोर्ड और इंटरनेट की ताकत पारंपरिक सैन्य शक्ति जितनी ही प्रभावी हो गई है, जिसका इस्तेमाल नैरेटिव सेट करने के लिए किया जा रहा है।
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