
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के रणमैदान से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली रक्षा खबर सामने आ रही है। पिछले करीब डेढ़ महीने तक अमेरिका और इजरायल के भीषण हवाई हमलों और मिसाइल दागे जाने से भारी नुकसान झेलने वाला ईरान एक बार फिर बेहद आक्रामक अंदाज में उठ खड़ा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान अपनी सैन्य शक्ति और युद्धक क्षमताओं को दोबारा मजबूत करने के लिए पूरी ताकत से जुट गया है। अमेरिकी मीडिया आउटलेट सीएनएन (CNN) की एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अपनी सेना का आधुनिकीकरण और हथियारों का निर्माण उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज रफ्तार के साथ कर रहा है, जो आने वाले समय में एक नए सैन्य संकट का संकेत दे रहा है।
छह महीने के भीतर तैयार होगी ईरान की नई ‘ड्रोन आर्मी’
सीएनएन ने अपनी रिपोर्ट में पश्चिमी और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों से जुड़े बेहद विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान अगले छह महीनों के भीतर अपने घातक और विनाशकारी ड्रोन बेड़े (Drone Fleet) को पूरी तरह से फिर से खड़ा कर सकता है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि एक तरफ जहां दोनों पक्षों के बीच युद्ध विराम (Ceasefire) को लेकर कूटनीतिक बातचीत चल रही है, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे ईरान ने अपने सीक्रेट अंडरग्राउंड प्लांटों में ड्रोन्स का बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन फिर से शुरू कर दिया है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलनों को ईरान ने किया फेल
अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) के खुफिया आकलनों से परिचित अधिकारियों का कहना है कि ईरानी सेना के पुनर्निर्माण की यह रफ्तार वाशिंगटन के शुरुआती अनुमानों से कहीं ज्यादा तेज और आक्रामक है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ईरानियों ने ड्रोन, कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें और रॉकेट बनाने की अपनी सभी पुरानी समय-सीमाओं (Deadlines) को पार करते हुए नया रिकॉर्ड बना दिया है। ईरान इस समय अपनी नष्ट हो चुकी मिसाइल साइट्स, मोबाइल लॉन्चर्स और प्रमुख वेपन सिस्टम को बदलने के काम में दिन-रात लगा हुआ है। आपको बता दें कि इनमें से कई रणनीतिक ठिकाने बीते 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त हमलों के दौरान पूरी तरह से तबाह कर दिए गए थे।
शांति वार्ता के बीच पाकिस्तान की एंट्री: गृह मंत्री नकवी पहुंचे तेहरान
ईरान के इस तेजी से हथियार बनाने की यह रिपोर्ट ठीक ऐसे समय पर आई है, जब पर्दे के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच इस अघोषित युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने की दिशा में जोर-शोर से अंतरराष्ट्रीय कोशिशें की जा रही हैं। इसी कूटनीतिक शांति प्रयास के तहत पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने गुरुवार को तेहरान में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से एक बेहद महत्वपूर्ण और लंबी मुलाकात की। नकवी एक सप्ताह से भी कम समय के भीतर अपनी दूसरी आपातकालीन यात्रा पर बुधवार को तेहरान पहुंचे हैं। पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच की गहरी कूटनीतिक खाई को पाटने और खाड़ी क्षेत्र में किसी भी बड़े परमाणु या पारंपरिक युद्ध को टालने के लिए एक मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘इरना’ (IRNA) के मुताबिक, विदेश मंत्री अराघची और पाकिस्तानी गृह मंत्री नकवी के बीच हुई इस बैठक में ईरान और अमेरिका के बीच ओमान या अन्य गुप्त चैनलों के जरिए होने वाली अप्रत्यक्ष वार्ता (Indirect Talks) के रोडमैप पर विस्तार से चर्चा की गई है।
ट्रंप की ‘सख्त’ चेतावनी और ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का पलटवार
पाकिस्तानी शिष्टमंडल की यह तेहरान यात्रा ऐसे नाजुक मोड़ पर हो रही है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक बेहद कड़ा बयान देते हुए कहा था कि अगर ईरान के साथ कोई ठोस और स्थायी समझौता नहीं हुआ, तो महज कुछ ही दिनों के भीतर अमेरिकी वायुसेना के हमले दोबारा शुरू कर दिए जाएंगे। ट्रंप ने यह भी खुलासा किया था कि खाड़ी के कई अरब देशों के नेताओं ने उनसे आखिरी समय में ईरान पर होने वाले महा-हमले को टालने का व्यक्तिगत अनुरोध किया था।
दूसरी ओर, ट्रंप की इस धमकी पर ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने भी दोटूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर इस बार युद्ध दोबारा शुरू हुआ, तो दुनिया को कई ऐसी अप्रत्याशित और विनाशकारी घटनाएं देखने को मिलेंगी जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। इसके साथ ही ईरान की सबसे ताकतवर सेना ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ (IRGC) ने भी अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि ईरान की धरती पर किया गया अब कोई भी अगला हमला एक ऐसे क्षेत्रीय युद्ध को जन्म देगा, जिसकी लपटें पूरे पश्चिम एशिया की सीमाओं को लांघकर सीधे पश्चिमी देशों तक पहुंचेंगी।
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